खूंखार नक्सली लीडर पापाराव का सरेंडर, डेडलाइन से पहले बड़ी सफलता
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई के बीच एक बड़ी सफलता की खबर आई है। सालों से सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से दूर रहे कुख्यात नक्सली लीडर पापाराव उर्फ सुन्नम चंद्रैया के सरेंडर करने की सूचना है। उसके साथ करीब एक दर्जन नक्सलियों के भी आत्मसमर्पण करने की संभावना जताई जा रही है।
आज पापाराव का सरेंडर
सूत्रों के मुताबिक, पापाराव अपने साथियों के साथ बीजापुर जिले के फरसेगढ़ इलाके में जंगल से बाहर चुका है। इसके बाद उसे संभाग मुख्यालय जगदलपुर लाया जाएगा, जहां वह बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी के सामने हथियार डालकर औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण करेगा।
50 लाख का इनामी, कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड
पापाराव पर 50 लाख रुपए का इनाम घोषित था और वह नक्सल संगठन का बेहद खतरनाक कमांडर माना जाता रहा है। उस पर कई बड़े हमलों में शामिल होने के आरोप हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
ताड़मेटला हमला (2010) - इस हमले में 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे
चिंगावरम बस ब्लास्ट - 32 नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत
कुटरू - बेदरे रोड IED ब्लास्ट (2024) - 8 जवान और एक ड्राइवर की मौत
बताया जाता है कि इन हमलों की योजना और क्रियान्वयन में पापाराव की अहम भूमिका रही थी।
दशकों से सक्रिय, सरेंडर को लेकर था अडिग
तेलंगाना मूल का 61 वर्षीय पापाराव लंबे समय से बीजापुर और आसपास के जंगलों में सक्रिय था। वह कोसा और हिड़मा जैसे बड़े नक्सली नेताओं के बाद भी संगठन में सक्रिय रहकर संघर्ष जारी रखने के पक्ष में था और सरेंडर के खिलाफ अड़ा हुआ माना जाता था।
सीएम साय का बयान
नक्सली कमांडर पापा राव के आत्मसमर्पण की खबर के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दृढ़ संकल्प के कारण देश में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान तेज हुआ है, जिसका असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की समयसीमा बेहद करीब है, ऐसे में पापा राव जैसे बड़े नक्सली कमांडर का सरेंडर करना इस अभियान की बड़ी सफलता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में पहले ही कई नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से नक्सलवाद की कमर टूटती जा रही है।
नक्सल नेतृत्व पर असर
पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में नक्सलियों की शीर्ष कमान लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच सकती है। अब संगठन में केवल कमांडर सोड़ी केशा का नाम प्रमुख रूप से बचा है, जो फिलहाल सरेंडर के मूड में नहीं बताया जा रहा है।
पहले एनकाउंटर की खबर निकली थी फर्जी
कुछ समय पहले पापाराव के मारे जाने की खबर भी सामने आई थी, लेकिन बाद में वह फर्जी साबित हुई। इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं।
निष्कर्ष:
अगर पापाराव का सरेंडर आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाता है, तो यह बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में इसके असर से और नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना भी बढ़ सकती है।
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