छत्तीसगढ़ पीडीएस की नई नीति : अब मिलेगा 90 प्रतिशत खड़ा चावल
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ पीडीएस में अब 90% खड़ा चावल देना अनिवार्य होगा।
- राशन में टूटे चावल यानी कनकी सिर्फ 10% मान्य होगी।
- बची हुई 15% कनकी का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में होगा।
- सार्थक पीडीएस फेज-2 से एआई आधारित बनेगी राशन प्रणाली।
- आधुनिक मशीनों की कमी से मिलर्स के सामने बड़ी चुनौती।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाले राशन के चावल की गुणवत्ता में अब बड़ा सुधार होने जा रहा है। केंद्र सरकार की नई 'इम्प्रूव्ड राइस स्कीम' को इसी आगामी खरीफ विपणन सीजन से लागू करने की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है। इस नई नीति के अमल में लाने के बाद राशन कार्डधारियों को मिलने वाले चावल में टूटे हुए चावल (कनकी) की मात्रा बेहद कम हो जाएगी और उपभोक्ताओं की थाली तक बेहतर अनाज पहुंचेगा।
क्या है नया मानक और बदलाव?
नई व्यवस्था के तहत अब मिलर्स के लिए पीडीएस चावल में 90 प्रतिशत खड़ा चावल देना अनिवार्य होगा, जबकि सिर्फ 10 प्रतिशत कनकी (ब्रोकन राइस) ही मान्य की जाएगी। गौरतलब है कि अब तक की व्यवस्था में 75 प्रतिशत खड़ा चावल और 25 प्रतिशत कनकी की अनुमति थी। इस बड़े नीतिगत बदलाव से चावल उत्पादन और मिलिंग की पूरी व्यवस्था को नए गुणवत्ता मानकों के अनुसार संचालित करना होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस फैसले को खाद्य सुरक्षा, पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक बड़ा व सराहनीय कदम बताया है।
एथेनॉल प्लांट में इस्तेमाल होगा बचा हुआ ब्रोकन राइस
सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर गरीब उपभोक्ताओं को बेहतर और साफ-सुथरा राशन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बचने वाले अतिरिक्त 15 प्रतिशत ब्रोकन चावल (कनकी) के सही इस्तेमाल का खाका भी तैयार कर लिया गया है। इस बची हुई कनकी के लिए अलग से टेंडर जारी किए जाएंगे और इसे एथेनॉल निर्माण प्लांटों को भेजा जाएगा।
इससे न केवल ब्रोकन राइस का सही औद्योगिक इस्तेमाल सुनिश्चित होगा, बल्कि राइस मिलर्स के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे। बता दें कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में पीडीएस के तहत लगभग 82.42 लाख राशन कार्डधारी हैं, जिन्हें हर साल करीब 25 लाख मीट्रिक टन चावल का वितरण किया जाता है।
एआई से हाईटेक होगी सार्वजनिक वितरण प्रणाली
राज्य में सिर्फ चावल की क्वालिटी ही नहीं, बल्कि पूरी राशन वितरण प्रणाली को ही आधुनिक बनाने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने ‘सार्थक पीडीएस योजना फेज-2’ को अगले पांच वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। इसके तहत राशन के भंडारण, वितरण से लेकर उसके ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) तक की पूरी मॉनिटरिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे गड़बड़ियों और कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम कसी जा सके।
मिलर्स के सामने तकनीक अपग्रेडेशन की बड़ी चुनौती
सरकार की इस योजना का स्वागत करते हुए भी राइस मिलर्स ने इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर चिंता जताई है। छत्तीसगढ़ राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल बोथरा का कहना है कि:
"योजना बेहद अच्छी है, लेकिन धरातल पर यह काफी चुनौतीपूर्ण साबित होगी। प्रदेश में 3 हजार से अधिक राइस मिलें संचालित हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या ऐसी मिलों की है जहां आधुनिक मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। अचानक ब्रोकन राइस की सीमा 25% से घटाकर 10% करना बिना तकनीकी बदलाव के संभव नहीं है।"
एसोसिएशन जल्द ही अपनी व्यावहारिक समस्याओं और तकनीकी सुधारों से जुड़े सुझावों का एक पत्र खाद्य सचिव को सौंपने की तैयारी कर रहा है।
केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव
इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ की खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार इस योजना को प्राथमिकता के साथ लागू करना चाहती है। इसके लिए राज्य की मिलों को तकनीकी रूप से अपग्रेड करना अनिवार्य होगा। विभाग ने मिलर्स को इन नए मानकों की जानकारी दे दी है और उनसे सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं। मिलर्स से मिलने वाले इन सुझावों का बारीकी से परीक्षण करने के बाद राज्य सरकार एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजेगी, ताकि मिलर्स को अपग्रेडेशन में मदद मिल सके।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में 'इम्प्रूव्ड राइस स्कीम' और 'सार्थक पीडीएस फेज-2' का लागू होना खाद्य सुरक्षा और सुशासन की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा। हालांकि, 3 हजार से अधिक राइस मिलों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे मिलर्स और सरकार के आपसी समन्वय से ही सुलझाया जा सकता है।
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