छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग; हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा जवाब

Harrison Masih | May 04, 2026, 19:10 IST
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प्लास्टिक और पॉलिथीन के अनियंत्रित उपयोग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने इस मामले में शपथ पत्र की मांग की है। राज्य में 2020 और 2023 में प्लास्टिक पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन इन नियमों के पालन में कमी देखने को मिल रही है।

RAIPUR. छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक और पॉलिथीन के उपयोग, विक्रय, वितरण, परिवहन और संग्रहण पर रोक के बावजूद इनके अनियंत्रित उपयोग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने इस मामले में मुख्य सचिव से शपथ पत्र मांगा है। अगली सुनवाई 13 मई को होगी।



क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ में 'प्लास्टिक और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल मटेरियल (यूज एंड डिस्पोजल रेगुलेशन) एक्ट, 2020' और 'प्लास्टिक और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल मटेरियल (यूज एंड डिस्पोजल नियम, 2023)' लागू हैं। इन नियमों के तहत प्लास्टिक कैरी बैग, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, स्ट्रॉ और अन्य प्लास्टिक उत्पादों पर कड़ी रोक लगाई गई है। इसके अलावा, 200 मिलीलीटर से कम की PET बोतलें और अन्य गैर-पुनर्चक्रणीय पैकेजिंग को भी प्रतिबंधित किया गया है।



छूट की श्रेणियां

कुछ क्षेत्रों में विशेष छूट दी गई है, जैसे दवाइयों और मेडिकल उत्पादों के लिए प्लास्टिक बैग, कृषि और बागवानी के लिए कम्पोस्टेबल बैग, और निर्यात के लिए पुनर्चक्रित सामग्री वाले पैकेजिंग। इसके अतिरिक्त, 50 माइक्रोन से अधिक की प्लास्टिक की पैकेजिंग को भी छूट प्राप्त है।



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पत्राचार और जनहित याचिका

नितिन सिंघवी ने अगस्त 2024 से सरकार से पत्राचार किया था, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अव्यावहारिक निर्देशों के कारण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके बाद, उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।



समिति के गठन का प्रस्ताव

सिंघवी ने दिसंबर 2025 में सुझाव दिया कि आवास और पर्यावरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाए, जिसमें गृह विभाग और जलवायु परिवर्तन विभाग के सदस्य भी शामिल हों। यह समिति सबसे पहले यह पता लगाएगी कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक कहां से आ रहा है और इसका उत्पादन कहां हो रहा है। उन्होंने राज्य की सीमाओं पर चेकिंग करने के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाने का भी प्रस्ताव दिया है।



निष्कर्ष

यह मामला छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक प्रतिबंधों के पालन को लेकर एक अहम मोड़ पर है। अदालत ने शासन से शपथ पत्र की मांग की है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे और प्लास्टिक के उपयोग को नियंत्रित किया जा सकेगा।



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