अग्निशामक यंत्र लगवाने शासन का नया नियम, प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने वसूली का लगाया आरोप, बदलने की मांग

VINAY VERMA | Feb 05, 2026, 19:44 IST
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छत्तीसगढ़ में लागू किए गए नए फायर सेफ्टी नियमों को लेकर निजी अस्पताल संचालकों में नाराजगी है। संचालकों का आरोप है कि हर साल फायर एनओसी के नाम पर लाखों रूपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

Raipur. छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू किए गए नए फायर सेफ्टी नियमों को लेकर प्राइवेट अस्पताल संचालकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।



निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया नया नियम सुरक्षा से ज्यादा उगाही का माध्यम बन गया है, जिसके तहत हर साल 2 से 5 लाख रुपए तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उन पर डाला जा रहा है।



इसी के विरोध में प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने एकजुट होकर गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता को पत्र लिखकर नियमों में संशोधन की मांग की है।



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क्या है मामला?

सरकार ने नवंबर 2025 को फायर एंड सेफ्टी (fire safety rules) को लेकर नया नियम जारी किया है। जिसके अनुसार छत्तीसगढ़ में नए नियम के तहत फायर एंड सेफ्टी का एनओसी लेना होगा।



निजी अस्पताल संचालकों का आरोप है कि क्लिनिक से लेकर बड़े अस्पतालों तक को फायर एनओसी अनिवार्य किया गया है। इसके लिए अग्निशमन विभाग द्वारा अधिकृत थर्ड पार्टी ऑडिटर तय किया गया है। जिसके निरीक्षण के बाद ही सर्टिफिकेट मिलेगा और यह हर साल करवाना होगा।



यही नहीं, बिना फायर एनओसी के स्वास्थ्य विभाग द्वारा नर्सिंग होम एक्ट के तहत क्लिनिक, नर्सिंग होम और अस्पतालों के संचालन लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं किया जा रहा है। निजी अस्पताल संचालक इसी बात का विरोध कर रहे हैं।



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तय फीस लाखों में

अस्पताल संचालकों का कहना है कि थर्ड पार्टी ऑडिटर द्वारा नर्सिंग होम और चिकित्सकीय संस्थानों से लगभग 10 रुपए प्रति वर्ग फिट की दर से शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा जीएसटी भी देना होगा।



औसतन 200 बिस्तरों वाले एक अस्पताल को हर साल लगभग 4 लाख रुपए केवल फायर एनओसी के नवीनीकरण पर खर्च करने पड़ रहे हैं। संचालकों का आरोप है कि यह शुल्क किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है और इससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ रही है।



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क्या लिखा है लेटर में

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य नर्सिंग होम एक्ट का मूल उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, न कि अग्निशमन से जुड़े जटिल और महंगे प्रावधानों के जरिए छोटे और मध्यम अस्पतालों को संचालन में मुश्किलों में डालना।



विशेष रूप से पहले से बने अस्पतालों और नर्सिंग होम को फायर एनओसी से जुड़ी तकनीकी और आर्थिक शर्तों को पूरा करने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।



दूसरे राज्यों के भी उदाहरण

अस्पताल संचालकों ने अपने पत्र में अन्य राज्यों के उदाहरण भी दिए हैं। मध्यप्रदेश सरकार 50 बिस्तरों से कम वाले अस्पतालों को पंजीकृत फायर इंजीनियर के एनओसी को मान्य करती है। बड़े अस्पतालों के लिए भी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता तीन वर्ष रखी गई है।



इसी तरह आंध्र प्रदेश में अगस्त और अक्टूबर 2021 में जारी आदेशों के अनुसार फायर एनओसी का नवीनीकरण पांच वर्षों के लिए किया जाता है।



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मंशा पर सवाल

इधर हेल्थकेयर प्रोवाइडर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता का कहना है कि एक तरफ सरकार जहां रायपुर को हेल्थ हब के रुप में डेवलप करना चाह रही है। नवा रायपुर में दूसरे राज्य के अस्पतालों को सस्ते दर पर जगह उपलब्ध करवा रही है।



वहीं रायपुर में स्थापित अस्पतालों पर नय नियम लादकर परेशान कर रही है। सरकार की मंशा पर सवाल है। सरकार तत्काल इस आदेश में बदलाव कर प्राइवेट अस्पताल संचालकों को राहत दे। जिससे गुणवत्ता पूर्ण इलाज मिल सकें।



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