अडानी से मिले गिफ्ट्स कलेक्टर को सौंपे, तमनार माइंस प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीण एकजुट
रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित पेलमा कोल खदान परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। जनसुनवाई से ठीक एक दिन पहले ग्रामीणों ने कंपनी की ओर से बांटे गए दरी, क्रिकेट किट, बैट, स्टंप और पेटियों को कलेक्टर कार्यालय में पहुंचा दिया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना के समर्थन में माहौल बनाने के लिए गिफ्ट बांटे गए थे।
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन को आनन-फानन में 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित करनी पड़ी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने रायगढ़ कलेक्टर के अनुरोध पर आदेश जारी करते हुए अगली सूचना तक जनसुनवाई टाल दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
18 मई को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ ग्रामीण यह दावा करते नजर आए कि एसईसीएल और उससे जुड़ी कांट्रेक्टर कंपनियों की ओर से गांवों में सामान बांटा गया। आरोप लगाया गया कि जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों को प्रभावित करने और विरोध कम करने के उद्देश्य से यह वितरण किया गया।
हालांकि कंपनी या प्रशासन की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रंग ले लिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से सामान लौटाकर विरोध दर्ज कराया, जिसे इलाके में “एकता की ताकत” के रूप में देखा जा रहा है।
2077 हेक्टेयर में प्रस्तावित है परियोजना
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की पेलमा परियोजना लगभग 2077 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है। परियोजना की उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन प्रतिवर्ष बताई गई है। इस खदान से पेलमा, उरबा, मदुआडूमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडीह, सक्ता, मिलुपारा और खर्रा समेत कई गांव प्रभावित होने वाले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से बड़े पैमाने पर विस्थापन, खेती और जलस्रोतों पर असर पड़ सकता है।
पर्यावरण और विस्थापन को लेकर बढ़ी चिंता
तमनार क्षेत्र पहले से ही कोयला खदानों और उद्योगों के प्रदूषण की मार झेल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में राखड़, धूल और प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में एक और बड़ी कोयला परियोजना पर्यावरणीय संकट को और गहरा सकती है।
सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी परियोजना क्षेत्र के जंगलों और जल स्रोतों पर संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जनसुनवाई जैसी प्रक्रियाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और ग्रामीणों की वास्तविक आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
पहले भी विवादों में रही है पेलमा परियोजना
पेलमा खदान परियोजना (Adani Mining Tamnar) का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। बीते वर्षों में जमीन अधिग्रहण, मुआवजे की दर और ग्रामसभाओं की सहमति को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन हुए थे। ग्रामीणों का आरोप रहा है कि प्रभावित गांवों की सहमति के बिना परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
तमनार और रायगढ़ क्षेत्र लंबे समय से “खनन बनाम पर्यावरण” की बहस का केंद्र रहे हैं। यहां उद्योगों और कोल ब्लॉकों के खिलाफ प्रदूषण, विस्थापन और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें लगातार उठती रही हैं।
प्रशासन ने क्या कहा?
रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि एसईसीएल की तैयारी पूरी नहीं थी, इसलिए जनसुनवाई को फिलहाल स्थगित किया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि विरोध और कानून-व्यवस्था की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया।
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