वायरल वीडियो का असर, पेलमा कोल माइंस की जनसुनवाई टली
रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित पेलमा ओपनकास्ट कोल माइंस परियोजना को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। जनसुनवाई के एक दिन पहले सोशल मीडिया पर फिर वीडियो वायरल हुए कि ग्रामीणों को अपनी ओर करने के लिए कंपनी की ओर से छाते, पेटी, क्रिकेट किट दिए गए हैं। इन वीडियो में एसईसीएल और कांट्रेक्टर कंपनी पर ये गिफ्ट बांटने के आरोप लगाए गए हैं। बढ़ते विवाद को देखते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 19 मई को होने वाली जनसुनवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह फैसला रायगढ़ कलेक्टर के अनुरोध के बाद लिया गया। आदेश में कहा गया है कि अगली सूचना तक जनसुनवाई स्थगित रहेगी।
2077 हेक्टेयर में फैली है परियोजना
दरअसल, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की इस परियोजना का दायरा करीब 2077 हेक्टेयर में फैला है और प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन प्रतिवर्ष बताई गई है। यह खदान पेलमा, उरबा, मदुआडूमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडीह, सक्ता, मिलुपारा और खर्रा जैसे गांवों को प्रभावित करने वाली है।
विस्थापन और प्रदूषण को लेकर डर
लेकिन जनसुनवाई से पहले ही इलाके में विरोध की सुगबुगाहट तेज हो गई थी। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया था कि परियोजना से बड़े पैमाने पर विस्थापन, जलस्रोतों पर असर और पर्यावरणीय नुकसान होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि तमनार क्षेत्र पहले से ही कोयला खदानों और उद्योगों के प्रदूषण का बोझ झेल रहा है, ऐसे में एक और बड़ी परियोजना से हालात और बिगड़ सकते हैं।
पहले भी उठते रहे सवाल
पेलमा परियोजना का नाम पहले भी विवादों (Tamnar mining dispute) में रहा है। बीते वर्षों में जमीन अधिग्रहण, मुआवजे की दर और ग्रामसभाओं की सहमति को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन हुए थे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रभावित गांवों की वास्तविक आपत्तियों को नजरअंदाज कर औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने की कोशिश की जा रही है। कुछ पर्यावरण संगठनों ने परियोजना क्षेत्र में जंगल और जल स्रोतों पर संभावित खतरे को लेकर सवाल उठाए थे।
खनन बनाम पर्यावरण की पुरानी लड़ाई
तमनार और रायगढ़ का इलाका पहले भी कोयला खनन बनाम पर्यावरण के संघर्ष का बड़ा केंद्र रहा है। यहां उद्योगों और खदानों के खिलाफ प्रदूषण, राखड़ और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें लगातार उठती रही हैं। ऐसे में पेलमा की जनसुनवाई को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क नजर आ रहा था। सूत्रों के मुताबिक विरोध और कानून-व्यवस्था की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन नई तारीख कब घोषित करता है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी का कहना है एसईसीएल की तैयारी पूरी नहीं थी, इसलिए जनसुनवाई कैंसिल करनी पड़ी।
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