कांग्रेस महापौर रहे एजाज ढेबर के करीबी को बनाया एल्डरमैन, BJP एमएलए की सिफारिश
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर : छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार में कांग्रेस नेताओं की नियुक्ति हो रही है। बीजेपी ने एल्डरमैन नियुक्त करने की शुरुवात रायपुर से की। रायपुर नगर निगम में बीजेपी ने 11 एल्डरमैन नियुक्त किए। लेकिन जब सूची जारी हुई तो बवाल मच गया। बीजेपी ने कांग्रेस के महापौर रहे एजाज ढेबर के करीबी विनय ओझा को भी एल्डरमैन बना दिया।
सूची में विनय ओझा का नाम दूसरे नंबर पर आया। बीजेपी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि बीजेपी कार्यकर्ता दरी बिछा रहे हैं और पार्टी कांग्रेस के लोगों को पद दे रही है। उनका कहना है कि एक विधायक की सिफारिश से विनय ओझा की नियुक्ति की गई है।
एल्डरमैन नियुक्ति पर बवाल
छत्तीसगढ़ में लंबे इंतजार के बाद नगर निगमों और नगर पालिकाओं के लिए एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। लेकिन नियुक्तियों के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया है। राजधानी रायपुर में कुछ नामों को लेकर बीजेपी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं।
राज्य में नगरीय निकाय चुनाव करीब दो वर्ष पहले हुए थे, लेकिन एल्डरमैनों की नियुक्ति लगातार टलती रही। सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर यह फाइल लंबे समय तक विभिन्न कारणों से लंबित रही। वित्त विभाग ने भी एल्डरमैन व्यवस्था से जुड़े खर्च और उसके औचित्य को लेकर कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई थी। इसके बाद बीजेपी संगठन से भी राय ली गई और कई दौर की चर्चा के बाद हाल ही में सूची को अंतिम रूप दिया गया।
सूची सामने आते ही राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर असंतोष खुलकर सामने आने लगा। सोशल मीडिया पर भी नियुक्तियों को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा रायपुर नगर निगम की सूची को लेकर हो रही है।
बीजेपी सरकार ने की कांग्रेस नेता की नियुक्ति
विवाद का केंद्र सूची में शामिल विनय ओझा का नाम है। बीजेपी के कुछ पुराने कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि पूर्व महापौर एजाज ढेबर के करीबी माने जाने वाले व्यक्ति को एल्डरमैन कैसे बना दिया गया। इसे लेकर पार्टी के भीतर ही तंज कसते हुए कई तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं।
पार्टी नेताओं का कहना है कि विनय ओझा पहले भी बीजेपी से जुड़े रहे हैं और वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल के साथ लंबे समय तक काम कर चुके हैं। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए और एजाज ढेबर के महापौर कार्यकाल के दौरान सक्रिय रहे। विधानसभा और नगरीय निकाय चुनाव से पहले उन्होंने फिर बीजेपी का दामन थाम लिया था।
बीजेपी कार्यकर्ता नाराज
विनय ओझा की नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर ही अवसरवाद बनाम निष्ठा की बहस तेज हो गई है। बीजेपी के कई पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए लगातार काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है, जबकि दूसरे दलों से आए नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल रही है। कुछ नियुक्तियों को लेकर यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि ठेकेदारी से जुड़े लोगों और पूर्व पार्षदों को प्राथमिकता क्यों दी गई
जबकि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर नहीं मिला। सूत्रों का दावा है कि एल्डरमैन नियुक्ति के लिए संगठन से ही नाम मांगे गए थे और सूची तैयार करने से पहले वरिष्ठ नेताओं की सहमति भी ली गई थी। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष कम होता नजर नहीं आ रहा है। कुछ कार्यकर्ताओं ने तंज कसते हुए लिखा है कि विनय ओझा की नियुक्ति के लिए विधायक सुनील सोनी का आभार।
बिलासपुर में भी विवाद
बिलासपुर नगर निगम की एल्डरमैन सूची अब तक जारी नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित नामों को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग गुटों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों के मुताबिक महापौर पूजा विधानी और उनके पति अशोक विधानी की ओर से कुछ नाम प्रस्तावित किए गए हैं, वहीं बीजेपी संगठन और स्थानीय विधायकों के समर्थक भी अपने-अपने नाम सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जाता है
कि कुछ प्रस्तावित नामों पर लगातार आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, जिसके कारण पूरी सूची पर अंतिम सहमति नहीं बन पा रही है। प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने भी सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई सर्वसम्मति नहीं बन सकी है। नगर निगम के भाजपा पार्षद दल के भीतर भी मतभेद की स्थिति सामने आने की चर्चा है।
FAQ
- रायपुर में विवाद क्यों हुआ?
रायपुर नगर निगम में 11 एल्डरमैन की नियुक्ति के बाद विवाद हुआ। सूची में कांग्रेस के पूर्व महापौर के करीबी का नाम आने से असंतोष बढ़ा। - विनय ओझा कौन हैं?
विनय ओझा पहले बीजेपी से जुड़े रहे, बाद में कांग्रेस में गए और फिर वापस बीजेपी में आए। उन्हें हाल ही में एल्डरमैन बनाया गया है। - बिलासपुर में सूची क्यों अटकी है?
बिलासपुर में एल्डरमैन नामों को लेकर गुटबाजी और सहमति की कमी है, जिससे सूची अभी तक जारी नहीं हो सकी है।
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