रायपुर नगर निगम का प्रॉपर्टी टैक्स टारगेट फेल, खाली प्लॉटों में अटकी रकम

Aishwarya Dwivedi | May 23, 2026, 10:16 IST
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रायपुर नगर निगम वित्तीय वर्ष 2025-26 में 370 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल 330 करोड़ रुपए ही वसूल सका। बड़े बकाएदारों और खाली प्लॉटों से सख्ती से टैक्स न वसूलने के कारण निगम का टार्गेट फेल हो गया।

NEWS IN SHORT

  • रायपुर नगर निगम संपत्ति कर का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया।
  • 370 करोड़ के टारगेट के मुकाबले सिर्फ 330 करोड़ रुपए वसूले।
  • खाली प्लॉटों के डिमांड नोट पर भी नहीं हुई कोई सख्त कार्रवाई।
  • महज 250 बड़े बकाएदारों के पास अटका है 100 करोड़ का टैक्स।
  • नए साल में 17% पेनाल्टी और सैटलमेंट योजना से होगी वसूली।

NEWS IN DETAIL

नगर निगम रायपुर इस वित्तीय वर्ष में भी संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) की वसूली का अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा करने में नाकाम रहा है। करदाताओं को दिसंबर 2025 तक छूट देने, ऑनलाइन भुगतान की सुविधा और जनवरी से मार्च तक संपत्तियों को सील करने जैसी ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद निगम पिछड़ गया। निगम की इस नाकामी का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है।

लक्ष्य से 400 करोड़ दूर रहा कलेक्शन

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नगर निगम ने 370 करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य रखा था। 31 मार्च 2026 तक केवल 310 करोड़ रुपए ही जमा हो सके। इसके बाद निगम ने समय सीमा को 30 अप्रैल तक बढ़ाते हुए एक महीने में 34 करोड़ वसूलने का अतिरिक्त टारगेट रखा, लेकिन इसमें भी केवल 20 करोड़ रुपए ही आ पाए। कुल मिलाकर निगम का अंतिम कलेक्शन 330 करोड़ रुपए पर ही सिमट गया। यदि निगम सख्ती दिखाता तो यह आंकड़ा 400 करोड़ के पार जा सकता था।

खाली प्लॉटों से भी नहीं मिला टैक्स

निगम को शहर के महज 200 से 250 बड़े रसूखदारों से करीब 100 करोड़ रुपए की वसूली करनी है, जो पिछले तीन साल से लंबित है। इसके अलावा, एक साल की मेहनत के बाद निगम ने सभी 10 जोनों में 5 हजार खाली प्लॉटों की पहचान की थी, जिनसे 25 करोड़ रुपए का राजस्व मिलना था। इनमें अधिकांश बड़े बिल्डर और उद्योगपति हैं। इन्हें डिमांड नोटिस तो भेजे गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण इस मद से महज 5 करोड़ रुपए ही वसूल हो सके।

इन जोनों में अटकी है सबसे बड़ी रकम

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जोन 08 (टाटीबंध, हीरापुर, कबीर नगर): फैक्ट्रियां और औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यह सबसे ऊपर है। यहाँ सिर्फ 19 बड़े बकाएदारों पर 85 लाख रुपए से अधिक का टैक्स बकाया है।

जोन 05 (सुंदर नगर, लाखे नगर): व्यावसायिक रूप से सक्रिय इस जोन में दर्जनों कमर्शियल आउटलेट्स पर प्रति व्यक्ति 13-13 लाख रुपए का टैक्स पेंडिंग है।

जोन 10 (तेलीबांधा, न्यू राजेंद्र नगर): वीआईपी और कमर्शियल हब वाले इस इलाके के 18 बड़े बकाएदारों (रेस्टोरेंट, क्लब, अस्पताल) पर 50 लाख से ज्यादा का बकाया है।

जोन 09 (पंडरी, मोवा): कपड़ा मार्केट और व्यावसायिक परिसरों वाले इस क्षेत्र में 12 बड़े डिफॉल्टरों पर ही 50 लाख से अधिक की राशि लंबित है।

वर्ष 2026-27 के लिए नए दावे और योजनाएं

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अपनी साख बचाने के लिए निगम प्रशासन ने नए वित्तीय वर्ष में फिर से बड़े दावे किए हैं:

1. प्रत्येक जोन के टॉप 10-20 बड़े बकाएदारों की सूची बनाकर रोजाना प्रॉपर्टी सील की जाएगी।
2. बकाया राशि पर 17% अधिभार (पेनाल्टी) जोड़कर नए डिमांड वारंट जारी होंगे।
3. सरकारी व अर्ध-सरकारी भवनों पर कुर्की के लिए नोटिस भेजे जाएंगे।

"संपत्ति कर की वसूली बढ़ाने के लिए अब तीन नई योजनाओं पर काम होगा। खाली प्लॉटों की पहचान के साथ नया सर्वे किया जाएगा। बड़े बकाएदारों को राहत देने के लिए एक सैटलमेंट योजना भी लाई जाएगी, ताकि इस साल हर हाल में वसूली का ग्राफ बढ़ाया जा सके।"— संबित मिश्रा, आयुक्त, नगर निगम रायपुर

निष्कर्ष

नगर निगम रायपुर द्वारा तमाम रियायतें, ऑनलाइन सुविधाएं और सीलिंग की कार्रवाई करने के बाद भी संपत्ति कर वसूली का लक्ष्य अधूरा रह गया। रसूखदार बड़े बकाएदारों और खाली प्लॉट मालिकों पर सख्ती न बरतने की प्रशासनिक ढिलाई का सीधा खामियाजा अब शहर के विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार के रूप में भुगतना पड़ेगा।

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