फरहदा और नवा रायपुर में सरकारी जमीनों पर अवैध प्लॉटिंग; 500 एकड़ पर कब्जा, अब सीमांकन के बाद चलेगा बुलडोजर
NEWS IN SHORT
- राजधानी में 500 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा
- कलेक्टर ने अवैध कब्जों पर सख्ती दिखाने का दिया आदेश
- फरहदा गांव में 300 एकड़ जमीन पर कब्जा, ग्रामीणों का विरोध
- सरकारी जमीन पहचानने के लिए ऑनलाइन रिकार्ड का इस्तेमाल करें
- लंबित मामलों पर प्रशासन ने उठाया सख्त कदम
NEWS IN DETAIL
Raipur : (रायपुर में अवैध प्लॉटिंग)राजधानी के शहरी और ग्रामीण इलाकों में 500 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है
कि इन मामलों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इन मामलों की जांच लंबित है, और इस कारण ना तो कब्जे हटाए गए हैं, और ना ही इन जमीनों पर कोई नया निर्माण शुरू हो पाया है।
कलेक्टर ने की सख्ती
कलेक्टर ने अब इन अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सभी तहसील अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अवैध कब्जों के मामलों की सुनवाई तुरंत पूरी की जाए।
जिन मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है, उन पर अवैध कब्जे हटाए जाएं। इसके अलावा, लापरवाही करने वाले अफसरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन तक की अनुशंसा हो सकती है।
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की सूची
(छत्तीसगढ़ में अवैध प्लॉटिंग)राजधानी के कई गांवों जैसे चंगोराभाठा, सेरीखेड़ी, गोगांव, सेजबहार, मंदिरहसौद, धरसींवा, फरहदा और नवा रायपुर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं।
इन जमीनों को पहले सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित किया गया था, जैसे कि चारागाह, खेल मैदान, तालाब और मुक्तिधाम, लेकिन अब शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी कर इन पर प्लॉटिंग और अन्य निर्माण किए गए हैं।
फरहदा गांव में 300 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा
फरहदा गांव में 300 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन पर कई लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। गांव के सरपंच संजय साहू ने इस समस्या को पिछले साल उठाया था
लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसके कारण गांववालों को शव दफनाने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। सरपंच का कहना है
कि अब तालाब पार शवों को दफनाया जा रहा है, जबकि गांव की सारी जमीन सरकारी है और इसका प्रमाण भी दस्तावेजों में मौजूद है।
कैसे पता करें जमीन सरकारी है या नहीं
आप भी आसानी से यह पता लगा सकते हैं कि किसी इलाके की जमीन सरकारी है या नहीं। राज्य सरकार ने 90% तक जमीन के रिकार्ड ऑनलाइन कर दिए हैं।
इसके लिए भुईंयां एप या राज्य की अधिकृत वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है। खसरा नंबर डालकर आप खातेदार का नाम चेक कर सकते हैं।
अगर दस्तावेज में शासन, नगर निगम/पालिका, ग्राम सभा/पंचायत या नजूल लिखा है, तो यह सरकारी जमीन मानी जाती है। साथ ही, घास भूमि, चरागाह, बंजर, आबादी या रास्ता जैसी श्रेणियाँ सरकारी जमीन को दर्शाती हैं।
वर्षों से लंबित जांच और कार्रवाई
कुछ मामलों की जांच पिछले दो सालों से लंबित है, जैसे भाठागांव में करीब 63 एकड़ चारागाह की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा।
अब तक इस पर एसडीएम ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। फरहदा गांव में 300 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत कलेक्टर तक पहुंच चुकी है
लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मंदिरहसौद के कुछ गांवों में भी करीब 70 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था, लेकिन अब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई है।
प्रशासन का उद्देश्य
अब प्रशासन ने इन लंबित मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों से तात्कालिक कार्रवाई करने का आदेश दिया है, ताकि इन सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हटाए जा सकें और इनका सही इस्तेमाल किया जा सके।
यह खबरें भी पढ़े...
अवैध प्लॉटिंग पर तय होगी अफसरों की जवाबदेही, सुबह दौरे पर न निकलने वाले सीएमओ को फटकार
अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन का बड़ा एक्शन: 217 प्लॉट अवैध घोषित, खरीदारों का हक समाप्त
अवैध प्लॉटिंग पर बड़ी कार्रवाई... छह जमीनों की रजिस्ट्री पर लगी रोक, 142 पर लग चुका है बैन
नए नियम से रुकेगी अवैध प्लॉटिंग... बिल्डरों पर कसेगा शिकंजा