मेडिकल कॉलेज में यौन शोषणः आरोपी को बचाने प्रशासनिक दबाव का खेल
VINAY VERMA | Sept 08, 2026, 16:28 IST
रायपुर मेडिकल कॉलेज मामला
रायपुर मेडिकल कॉलेज के यौन शोषण मामले में गवाह छात्र पर प्रशासनिक दबाव का मामला गरमाया है। कुलसचिव द्वारा जारी परीक्षा रोकने के विवादित आदेश को कुलपति ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- यौन उत्पीड़न केस में प्रशासनिक दबाव का खेल
- कुलसचिव ने पूरे PG बैच पर रोक लगाई
- डॉ. इक्षित को नियम उल्लंघन का नोटिस
- कुलपति ने आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किया
- कुलसचिव बोले, जांच जारी है रिपोर्ट देंगे
पीजी छात्रा से यौन उत्पीडन
इस पूरे मामले में आयुष विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दिनेश सिन्हा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुलसचिव ने मेडिकल कॉलेज के पीएसएम यानी कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पीजी छात्रों को परीक्षा से रोकने का आदेश जारी कर दिया।
खास बात यह है कि आदेश में पीजी छात्र डॉ. इक्षित सिंह को केंद्र में रखा गया और उनके खिलाफ नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। सवाल यह है कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव को मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों को परीक्षा से रोकने का अधिकार आखिर किस नियम के तहत मिला?
क्या लिखा है आदेश में?
साथ ही मामले की जांच कराने और जांच रिपोर्ट आने तक कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अन्य पीजी छात्रों को भी परीक्षा में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए गए। यानी एक छात्र पर लगे कथित नियम उल्लंघन के मामले में पूरे विभाग के पीजी छात्रों की परीक्षा पर ही सवाल खड़ा कर दिया गया। यही आदेश अब विवाद के केंद्र में है।
क्या है पीछे की कहानी?
छात्रा ने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की। काफी समय तक कार्रवाई नहीं होने के बाद उसने मौदहापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच के दौरान छात्रा के सहपाठी डॉ. इक्षित सिंह ने भी उसकी शिकायत को सही बताया। इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज हुई और डॉ. आशीष सिन्हा की गिरफ्तारी की गई।
अब दबाव बनाने का प्रयास:
इसी बीच उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई और जांच का आदेश सामने आया। आरोप लगाया जा रहा है कि यह पूरा कदम डॉ. इक्षित सिंह को गवाही से रोकने और आरोपी डॉ. आशीष सिन्हा को राहत पहुंचाने के लिए उठाया गया।
अधिकार से बाहर जाकर आदेश:
कुलसचिव डॉ. दिनेश सिन्हा ने डॉ. इक्षित सिंह को परीक्षा से रोकने का आदेश जारी किया। लेकिन आदेश जारी होने के बाद इसके अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठने लगे। मामला सामने आते ही आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीके पात्रा ने इस आदेश को समाप्त कर दिया।
क्या कह रहे कुलसचिव?
क्या डॉ. इक्षित सिंह के खिलाफ कार्रवाई का संबंध यौन उत्पीड़न मामले में उनकी गवाही से है? साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या आरोपी डॉ. आशीष सिन्हा को बचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया गया? इन सवालों पर कुलसचिव ने सिर्फ इतना कहा कि जांच जारी है। रिपोर्ट आने के बाद पूरी जानकारी दी जाएगी।
निष्कर्ष:
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