नकटी में तोड़े गरीबों के पीएम आवास, कांग्रेस ने बनाया नक्शा BJP ने चलाया बुलडोजर
छत्तीसगढ़ के नकटी में कांग्रेस और बीजेपी की मिलीजुली कुश्ती चल रही है। माननीयों के लिए आवास बनाने के लिए गरीबों के पीएम आवास तोड़ दिए गए। विधायकों के लिए आवास बनाने के लिए कांग्रेस सरकार ने योजना बनाई।
कांग्रेस सरकार में वहां पर 17 पीएम आवास भी बन गए। बिजली, पानी, मंदिर सबकी व्यवस्था हो गई। अब बीजेपी सरकार ने उन घरों पर बुलडोज़र चला दिए। तो क्या माननीयों के लिए दोनों सरकारें एक मत हैं। सवाल यह है कि कांग्रेस सरकार ने वो जगह विधायकों के घर के लिए दी थी तो फिर वहां पीएम आवास क्यों बनाये गए। वहीं बीजेपी ने कांग्रेस सरकार की 30 योजनाएं बंद कर दीं तो फिर यह योजना रद्द क्यों नहीं की।
150 बंगले बनेंगे:
नया रायपुर से लगे नकटी गांव में जिन परिवारों के आशियाने सरकारी जमीन खाली कराने की कार्रवाई के दौरान उजाड़े गए थे, उसी क्षेत्र में अब जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष आवासीय परियोजना विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।
हाउसिंग बोर्ड द्वारा प्रस्तावित इस योजना के तहत करीब 150 से 200 आलीशान बंगले बनाए जाएंगे, जिनकी अनुमानित कीमत 45 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक हो सकती है। सरकार का उद्देश्य विधायकों और सांसदों को रियायती दर पर विकसित भूखंड उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार प्रशासन ने लगभग 29 हेक्टेयर भूमि को विशेष आवासीय योजना के लिए चिन्हित किया है। इस क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ आधुनिक आवासीय कॉलोनी बसाने की तैयारी की जा रही है। परियोजना पर अधोसंरचना विकसित करने के लिए करीब 20 से 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
यह है योजना:
प्रस्ताव के मुताबिक इस योजना में 53 विधायकों और सांसदों के लिए विकसित भूखंड तैयार किए जाएंगे। इन प्लॉटों का आकार लगभग 3600 वर्गफुट तक रखा जा सकता है, जबकि सामान्य आवासीय योजना के अंतर्गत अन्य बड़े भूखंड भी विकसित किए जाएंगे। पूरे क्षेत्र में करीब 150 से 200 स्वतंत्र मकानों का निर्माण प्रस्तावित है।
इन बंगलों का आकार 2000, 2400 और 3600 वर्गफुट तक हो सकता है, जिससे यह नया आवासीय क्षेत्र प्रीमियम श्रेणी की कॉलोनी के रूप में विकसित होगा।
हाउसिंग बोर्ड बना रहा नक्शा:
बताया जा रहा है कि यह परियोजना नकटी गांव के विभिन्न खसरा नंबरों की जमीन पर विकसित की जाएगी। जमीन आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और हाउसिंग बोर्ड परियोजना का विस्तृत खाका तैयार कर रहा है।
योजना पूरी होने के बाद यह नया आवासीय क्षेत्र राजधानी क्षेत्र की प्रमुख हाई-एंड कॉलोनियों में शामिल हो सकता है। हालांकि इस परियोजना को लेकर कानूनी और सामाजिक सवाल भी उठने लगे हैं।
चारागाह की ज़मीन:
जानकारी के अनुसार, जिस भूमि पर योजना प्रस्तावित है, उसके एक हिस्से को चरागाह भूमि बताया जा रहा है। इस संबंध में न्यायालय में पहले से कानूनी विवाद भी चल चुका है। आलोचकों का कहना है कि यदि चरागाह अथवा सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर आवासीय योजना विकसित की जाती है तो इससे नियमों और न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना सरकार के लिए चुनौती होगा।
वहीं अधिकारियों का कहना है कि योजना को शासन के दिशा-निर्देशों और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाएगा।
पहले भी बने विधायकों के घर:
राज्य गठन के बाद जनप्रतिनिधियों को रियायती दर पर भूखंड देने की विशेष आवासीय योजना पहले भी लागू की जा चुकी है। अब तक 279 विधायक और सांसद इस योजना का लाभ ले चुके हैं। पहले चरण में पुरेना क्षेत्र में 108 भूखंड, दूसरे चरण में धरमपुरा में 55, तीसरे चरण में सेरीखेड़ी में 61 और चौथे चरण में सेरीखेड़ी फेज-2 में 55 भूखंड आवंटित किए गए थे। अब प्रस्तावित पांचवें चरण में नकटी क्षेत्र को शामिल किया गया है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, पहले आवंटित कई भूखंड बाद में बाजार मूल्य पर बेचे भी गए। हालांकि नियमों के अनुसार किसी जनप्रतिनिधि को जीवनकाल में इस विशेष योजना का लाभ केवल एक बार ही मिल सकता है।
माननीयों के लिए सब जायज:
नकटी में प्रस्तावित इस नई आवासीय योजना ने विकास, भूमि उपयोग और विस्थापन जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर सरकार इसे जनप्रतिनिधियों के लिए आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की पहल बता रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे हैं कि जिन जमीनों पर कभी गरीब परिवारों के घर थे, वहां अब महंगे बंगलों की कॉलोनी बसाने की तैयारी क्या सामाजिक न्याय और सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
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