धर्मांतरण कानून के खिलाफ मसीही समाज का बड़ा प्रदर्शन, हजारों लोग पहुंचे, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
Raipur. प्रदेश में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त मसीही समाज ने इस कानून के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए राजभवनघेराव का ऐलान किया था। इसको लेकर आज नवा रायपुर के तूता धरनास्थल पर समाज ने बड़ा प्रदर्शन किया।
धरने में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पहले विधेयक पर चर्चा की, जिसके बाद वे राजभवन की ओर कूच करने के लिए निकले, लेकिन स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने धरनास्थल के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की हुई थी, भीड़ को वहीं पर रोक दिया गया। समाज के पदाधिकारियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
शांतिपूर्ण विरोध का दावा
आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाना है। मंच से मसीही समाज के नेता इस विधेयक के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर लगातार अपनी बात रख रहे हैं।
पहले भी निकाली जा चुकी है रैली
पिछले सप्ताह रायपुर में मसीही समाज ने इस कानून के विरोध में रैली (Raipur Christian Protest rally) निकाली थी। यह रैली बुढ़ातालाब से अंबेडकर चौक तक आयोजित हुई थी।समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जिन प्रावधानों पर पहले आपत्ति जताई गई थी, उन्हें फिर से विधेयक में शामिल कर दिया गया है। उनका तर्क है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है।
उन्होंने “लालच” शब्द की स्पष्ट परिभाषा की मांग करते हुए कहा कि स्वेच्छा से धर्म अपनाने या प्रचार करने पर किसी प्रकार की रोक नहीं होनी चाहिए।
सरकार को चेतावनी: कोर्ट जाएंगे
मसीही समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इस कानून में संशोधन नहीं किया गया, तो वे न्यायालय का रुख करेंगे। साथ ही राज्यभर में मशाल रैली और विरोध प्रदर्शन जारी रखने की भी बात कही है।
जानिए क्या है धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026
विजय शर्मा द्वारा पेश यह विधेयक 1968 के पुराने कानून की जगह लाया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाना है।
सख्त सजा का प्रावधान
- अवैध धर्मांतरण पर: 7 से 10 साल जेल + न्यूनतम 5 लाख जुर्माना
- यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, SC/ST/OBC हो: 10 से 20 साल जेल + 10 लाख जुर्माना
- सामूहिक धर्मांतरण: 10 साल से आजीवन कारावास + 25 लाख जुर्माना
दोबारा दोषी होने पर कड़ी सजा
यदि कोई व्यक्ति पहले दोषी ठहराया जा चुका है और दोबारा अवैध धर्मांतरण में शामिल पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास हो सकता है।
मददगारों पर भी कार्रवाई
धर्मांतरण में सहयोग करने वालों को 6 महीने से 3 साल तक की सजा और 2 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा।
धर्म परिवर्तन के लिए सख्त नियम
- धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य
- अनुष्ठान कराने वाले (पादरी, मौलवी, पुजारी) को भी पहले से जानकारी देना होगा
- बिना सूचना के धर्मांतरण अवैध माना जाएगा
शादी और धर्म परिवर्तन पर प्रावधान
विधेयक में ऐसे विवाह को अवैध माना जाएगा, जिसमें धर्म परिवर्तन केवल शादी के उद्देश्य से किया गया हो। ऐसे मामलों में कोर्ट विवाह को शून्य घोषित कर सकता है।
विदेशी फंडिंग और संस्थाओं पर शिकंजा
धर्मांतरण से जुड़े मामलों में विदेशी फंडिंग पर रोक लगाई गई है। दोषी पाए जाने पर संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
विशेष अदालतों में होगी सुनवाई
धर्मांतरण कानूनके तहत हर जिले में विशेष अदालतें बनाई जाएंगी, जहां इन मामलों का निपटारा 6 महीने के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
राजनीतिक स्थिति
विधानसभा में यह विधेयक ध्वनि मत से पारित हुआ। जहां सत्तापक्ष ने इसका समर्थन किया, वहीं विपक्ष ने विरोध करते हुए वॉकआउट किया।
बढ़ता तनाव
प्रदेश के बस्तर, जशपुर, रायगढ़, रायपुर और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण को लेकर पहले से ही संवेदनशील स्थिति रही है। ऐसे में इस विधेयक के बाद सामाजिक और राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
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