मायके जाने की बात पर शैतान बना पति, पत्नी पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया
राजधानी रायपुर की एक अदालत ने पत्नी पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने वाले आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जितेंद्र प्रधान की अदालत ने आरोपी खेमराज महेश्वरी को हत्या का दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद और 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
मायके जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद
अभियोजन के मुताबिक, घटना वर्ष 2024 की है। खेमराज महेश्वरी अपनी पत्नी अमरिका महेश्वरी और दो बच्चों के साथ रायपुर के लाभांडी स्थित जैतखाम चौक के पास रहता था। घरेलू विवाद के दौरान पत्नी मायके जाने की तैयारी कर रही थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। गुस्से में आरोपी ने पत्नी को जान से मारने की धमकी दी और घर से बाहर निकल गया।
पेट्रोल लाकर लगा दी आग
कुछ देर बाद आरोपी प्लास्टिक की बोतल में पेट्रोल लेकर वापस लौटा। उसने पत्नी के शरीर पर पेट्रोल छिड़का और लाइटर से आग लगा दी। आग की चपेट में आने से अमरिका महेश्वरी गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
बच्चों के सामने हुई थी पूरी वारदात
घटना के समय दंपति के दोनों बच्चे लक्ष्मी महेश्वरी और रिहान महेश्वरी घर में मौजूद थे। दोनों ने अपनी मां को जिंदा जलते हुए देखा। मृतका की मां सोना बाई जांगड़े की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में पहले हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था। बाद में महिला की मौत के बाद पुलिस ने प्रकरण में हत्या की धारा जोड़ दी।
पहला अपराध बताकर मांगी थी राहत
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत से दलील दी कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और यह उसका पहला अपराध है, इसलिए सजा में नरमी बरती जाए। हालांकि अदालत ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पत्नी पर पेट्रोल डालकर उसे जिंदा जलाना अत्यंत जघन्य और क्रूर अपराध है, जिसमें किसी प्रकार की रियायत का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत बोली- मौत की नहीं, उम्रकैद की सजा उचित
फैसले में अदालत ने कहा कि यह मामला "विरल से विरलतम" श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। लेकिन अपराध की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा न्यायसंगत है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी 19 जनवरी 2024 से न्यायिक हिरासत में है और अब तक 893 दिन जेल में बिता चुका है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत यह अवधि उसकी सजा में समायोजित की जाएगी।
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