रामगोपाल अग्रवाल के घर ED की छापेमारी, 3 शहरों में दस्तावेजों की जांच जारी
समझें क्या है पूरा मामला
- रामगोपाल अग्रवाल के धमतरी स्थित ठिकानों पर ED की छापेमारी।
- रायपुर, दुर्ग-भिलाई और धमतरी में एक साथ कार्रवाई।
- कथित 3000 करोड़ रूपए के शराब घोटाले में जांच तेज।
- कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों की भी जांच जारी।
- रामगोपाल अग्रवाल सात दिन की ED हिरासत में हैं।
3000 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले में आरोपी कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके घर के बाहर जहां बल तैनात है, वहीं अंदर टीम के सदस्य दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब प्रवर्तन निदेशालय ने बीते मंगलवार को रायपुर केंद्रीय जेल से रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रायपुर की धनशोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA (Prevention of Money Laundering Act) अदालत ने मंगलवार को उन्हें सात दिन की ED हिरासत में भेज दिया था।
तीन शहरों में एक साथ हुई कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला मामले में ED की रेड पड़ी है। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और धमतरी में सुबह ED के अधिकारियों ने दबिश दी। अलग-अलग ठिकानों पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच जारी है।
रायपुर में रवि नगर स्थित अनूप अग्रवाल के घर पर ED की कार्रवाई चल रही है। वहीं दुर्ग में सजल जैन के घर पर सुबह करीब 6 से 7 बजे ED की टीम पहुंची। करीब 5 अधिकारियों की टीम यहां जांच कर रही है।
धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर भी दबिश
धमतरी में शराब, कोल और कस्टम मिलिंग घोटाले में आरोपी रामगोपाल अग्रवाल के सिहावा रोड स्थित आवास और उनके भतीजे के घर भी ED ने दबिश दी है।
तड़के पहुंची टीम में करीब 8 से 10 अधिकारी शामिल हैं, जो घर के अंदर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। मौके पर सुरक्षा बल के जवान भी तैनात किए गए हैं। ED की टीम दो गाड़ियों में सवार होकर छापेमारी के लिए पहुंची।
पैसों की हेराफेरी की हो रही जांच
जांच एजेंसी का आरोप है कि शराब घोटाला, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग से जुड़े पैसों को ठिकाने लगाने में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका थी। आरोप है कि उन्होंने घोटाले के पैसे को बड़ी संख्या में इधर से उधर किया।
ED अब इस मामले की जांच कर रही है कि यह पैसा कहां-कहां भेजा गया था। यह आरोप अभी अप्रमाणित है और जांच जारी है।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक मामलों में से एक माना जाता है। ED और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी EOW (Economic Offences Wing) की जांच के मुताबिक साल 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपए का अवैध घोटाला हुआ। मामले में कई IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्या है कोल लेवी घोटाला?
छत्तीसगढ़ का कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है।
ED और EOW के मुताबिक कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि अवैध रूप से वसूली गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूली गई।
क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला
छत्तीसगढ़ का कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है।
EOW के मुताबिक वर्ष 2015 से 2023 के बीच प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और उसके भुगतान में नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इस प्रक्रिया में करीब 127 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है।
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