छत्तीसगढ़ साड़ी घोटाला : जांच फाइलों में दफन, आखिर किसे बचा रहा महिला एवं बाल विकास विभाग
NEWS IN SHORT
- 9.7 करोड़ की साड़ी खरीदी में गड़बड़ी की पुष्टि
- 6.3 मीटर की जगह 5 मीटर तक निकली साड़ियां
- 7 जिलों में शिकायतें, जांच के बाद भी रिपोर्ट गायब
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मीडिया से बात करने पर रोक
- दो महीने बाद भी न कार्रवाई, न दोषियों पर शिकंजा
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में 9.7 करोड़ रुपए की साड़ी खरीदी की जांच अब सवालों के घेरे में है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने खुद माना कि सात जिलों में सप्लाई की गई साड़ियों में गड़बड़ी हुई है। तय मापदंड के अनुसार साड़ी की लंबाई 6.3 से घटकर 5 मीटर तक पहुंच गई। गुणवत्ता पर भी सवाल उठे। रंग छोड़ने, धागे निकलने और कपड़ा पतला होने की शिकायतें सामने आईं। ललेकिन हैरानी की बात यह है कि दो महीने बाद भी न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई। महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक अभी देखने-दिखवाने की बात कह रहीं।
जांच का शोर, नतीजों पर सन्नाटा
खबर सामने आने के बाद विभाग ने जांच समिति बनाई। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने भुगतान रोकने और साड़ियां बदलने के निर्देश दिए। संचालक रेणुका श्रीवास्तव ने भी जांच का दावा किया। जांच समिति ने सात जिलों में गड़बड़ी की पुष्टि भी कर दी। लेकिन इसके बाद पूरा मामला साइलेंट मोड में चला गया। आज तक यह नहीं बताया गया कि आखिर करोड़ों रुपए की खरीदी में गड़बड़ी कैसे हुई और जिम्मेदार कौन है। बताया जा रहा है कि 9.7 करोड़ का भुगतान भी कर दिया गया है।
जांच एजेंसी तक पर कार्रवाई नहीं
छग में महिला एंव बाल विकास विभाग को साड़ी सप्लाई करता है। जिसकी जांच के लिए तकनीकी एजेंसी भी है। मुंबई की राइट्स लिमिटेड ने साड़ी खरीदी से पहले सैंपल की जांच की थी। हरी झंडी मिलने के बाद ग्रामोद्योग विभाग ने साड़ी सप्लाई की। सवाल यह उठता है कि क्या जांच एजेंसी ने गलत रिपोर्ट दी विभाग ने उसकी सैंपल रिपोर्ट को दबा दिया।
मीडिया से बात की तो कार्रवाई होगी
सबसे गंभीर बात यह है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मीडिया से बात नहीं करने की हिदायत दी गई। व्हाट्सएप ग्रुपों में संदेश भेजकर चेतावनी दी गई कि कोई भी कर्मचारी मीडिया से चर्चा न करे। बताया जा रहा है कि कार्रवाई की धमकी तक दी गई। सवाल यह है कि यदि विभाग पूरी तरह पारदर्शी है तो फिर कर्मचारियों को चुप रहने के निर्देश क्यों दिए जा रहे हैं?
दो महीने बाद भी खाली हाथ कार्यकर्ता
खराब साड़ियां वापस ले ली गईं। लेकिन कई जगहों पर नई साड़ियां अब तक नहीं पहुंचीं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता न पुरानी साड़ी पहन पा रही हैं और न नई मिल रही है। यानी नुकसान भी उन्हीं का हुआ और जवाबदेही भी कहीं तय नहीं हुई।
सिर्फ साड़ियां बदलने का दावा
पूरा फोकस अब सिर्फ साड़ियों की रिप्लेसमेंट पर दिखाई दे रहा है। विभाग का कहना है कि जहां कमी मिली है वहां नई साड़ियां दी जाएंगी। लेकिन यह भी दावे में सिमटकर रह गया है। इधर असली सवालों पर विभाग की खामोशी बनी हुई है। यदि तय मापदंड से कम साड़ियां सप्लाई हुईं तो क्या यह सिर्फ तकनीकी गलती थी या फिर वित्तीय अनियमितता? क्या सप्लायर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों से समझौता किया गया? इन सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं है।
कमीशनखोरी की हर तरफ चर्चा
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि साड़ी खरीदी प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही है। आरोप यहां तक लगाए जा रहे हैं कि मंत्री बंगले से जुड़े कुछ लोग भी इस पूरी सप्लाई चेन में सक्रिय थे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि जांच अब तक इस दिशा में बढ़ती दिखाई नहीं दे रही। यही वजह है कि पूरे मामले पर पर्दा डालने की आशंका और मजबूत हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है
महिला एवं बाल विकास विभाग बार-बार कह रहा है कि जांच चल रही है। लेकिन दो महीने बाद भी न रिपोर्ट सामने आई, न किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न वित्तीय अनियमितता की जांच का कोई परिणाम दिखा। सात जिलों में गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है। अब सवाल सिर्फ इतना है कि 9.7 करोड़ की खरीदी में आखिर गड़बड़ किसने की और उसे बचा कौन रहा है?
FAQ
- छत्तीसगढ़ में साड़ी खरीदी विवाद किस राशि से जुड़ा हुआ है?
Ans: यह मामला लगभग 9.7 करोड़ रुपये की साड़ी खरीदी से जुड़ा है, जिसमें गुणवत्ता और मापदंडों में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। - महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ियों की निर्धारित लंबाई कितनी तय की गई थी?
Ans: खरीदी के लिए निर्धारित मानक के अनुसार प्रत्येक साड़ी की लंबाई 6.3 मीटर तय की गई थी। - कितने जिलों में साड़ियों को लेकर शिकायतें दर्ज हुई थीं?
Ans: राज्य के सात जिलों से साड़ियों की गुणवत्ता और लंबाई संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
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