सट्टा किंग बाबू खेमानी का भाई गिरफ्तार, सट्टे के लिए बांटता था सिम और खाते

Aishwarya Dwivedi | May 02, 2026, 16:03 IST
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रायपुर पुलिस ने ऑनलाइन सटोरिये बाबू खेमानी के भाई संदीप असरानी को महासमुंद से गिरफ्तार किया। संदीप फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। पुलिस जल्द इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा करेगी।

NEWS IN SHORT

  • बाबू खेमानी का भाई महासमुंद से पकड़ा गया।
  • आरोपी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था।
  • जब्त सिम कार्ड संदीप के नाम पर ही दर्ज हैं।
  • सट्टा नेटवर्क के अन्य साथियों की तलाश जारी है।
  • पुलिस आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी जानकारी देगी।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ जारी 'जीरो टॉलरेंस' अभियान के तहत पुलिस ने एक और बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। सट्टा किंग बाबू खेमानी की गिरफ्तारी के बाद अब उसके पारिवारिक नेटवर्क तक पुलिस के हाथ पहुंच गए हैं।



महासमुंद से हुई गिरफ्तारी



पुलिस की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर महासमुंद में दबिश देकर संदीप असरानी और उसके एक साथी को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि संदीप असरानी, मुख्य आरोपी बाबू खेमानी की बुआ का लड़का है। यह गिरफ्तारी ऑनलाइन सट्टे के वित्तीय और तकनीकी ढांचे को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।



सिम कार्ड और बैंक खातों का मास्टरमाइंड

पूछताछ और अब तक की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि संदीप असरानी ही वह व्यक्ति था जो बाबू खेमानी के सट्टा साम्राज्य के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट जुटाता था। संदीप का मुख्य काम सट्टे के अवैध लेनदेन के लिए विभिन्न नामों से बैंक खाते उपलब्ध कराना था। सट्टेबाजी के ऐप और कॉलिंग के लिए जरूरी सिम कार्ड भी संदीप ही मैनेज करता था। बाबू खेमानी के पास से जो सिम कार्ड बरामद किए गए थे, उनमें से कई सिम कार्ड सीधे संदीप असरानी के नाम पर रजिस्टर्ड पाए गए हैं, जो उसके इस अपराध में सीधे संलिप्त होने का पुख्ता सबूत है।



पुलिस की कार्रवाई और आगामी खुलासे

फिलहाल, रायपुर पुलिस की टीम संदीप और उसके साथी से अज्ञात स्थान पर कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इन दोनों से पूछताछ के बाद सट्टा बाजार के कई सफेदपोश चेहरों और अंतर्राज्यीय संपर्कों के नाम सामने आ सकते हैं।



निष्कर्ष

ऑनलाइन सट्टा के इस दलदल ने न केवल युवाओं को बर्बाद किया है, बल्कि करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन के जरिए अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है। बाबू खेमानी के बाद उसके करीबी रिश्तेदारों की गिरफ्तारी यह साफ करती है कि पुलिस अब केवल प्यादों पर नहीं, बल्कि इस खेल के असली 'सप्लायर्स' पर वार कर रही है।



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