छत्तीसगढ़ में अपर कलेक्टर पर बेनामी संपत्ति और करोड़ों के जमीन घोटाले का आरोप
NEWS IN SHORT
- सूरजपुर में वरिष्ठ अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप
- सरकारी जमीन में कथित अनियमितताएं सामने आईं
- शिकायतकर्ता ने करोड़ों की संपत्ति में गड़बड़ी का दावा किया
- जिला प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई
- अधिकारी ने सभी आरोपों को निराधार बताया
NEWS IN DETAIL
Surajpur। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। जिले में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी पर भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सामने आते ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है।
सरकारी जमीन में अनियमितताएं
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारी ने अपने पूर्व कार्यकाल में सरकारी जमीन के सौदों में नियमों की अनदेखी की। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के ग्राम मदनपुर की पुनर्वास भूमि को कथित रूप से निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज कराया गया और बाद में बेनामी तरीके से हस्तांतरित किया गया।
शिकायतकर्ता का दावा
अधिवक्ता डीके सोनी का कहना है कि जमीन की वास्तविक कीमत करीब दो करोड़ रुपये थी, लेकिन दस्तावेज़ों में कम मूल्य दर्शाकर स्टांप शुल्क में भारी गड़बड़ी की गई। इसके अलावा कई चरणों में नामांतरण और रजिस्ट्री के दस्तावेज़ भी सामने आए हैं, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
जांच समिति का गठन
जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। समिति के अध्यक्ष जिला पंचायत सीईओ बिजेंद्र सिंह पाटले हैं। इसके सदस्य एसडीएम शिवानी जायसवाल, शिकायत शाखा प्रभारी सुनील अग्रवाल, भू-अभिलेख अधीक्षक भूपेंद्र कुमारी बंजारे और तहसीलदार सूर्यकांत साथ हैं। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वे मामले की पूरी जांच कर रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करें।
अन्य संपत्तियों में निवेश के आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिकारी ने प्रदेश और अन्य राज्यों में पेट्रोल पंप, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और अन्य संपत्तियों में निवेश किया। शिकायतकर्ता ने जांच एजेंसी को संबंधित दस्तावेज़ और साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं।
अधिकारी का पक्ष
अपर कलेक्टर ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि आरोप तथ्यहीन हैं और उन्होंने कभी किसी अनियमित कार्रवाई में शामिल नहीं रहे।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे जिले की प्रशासनिक निगाहें अब जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
FAQ
- प्रशासनिक अधिकारी पर क्या आरोप हैं?
भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के आरोप लगे हैं। - किसने शिकायत दर्ज कराई है?
अधिवक्ता डीके सोनी ने शिकायत की है। - किस जमीन का मामला है?
राष्ट्रीय राजमार्ग-43, ग्राम मदनपुर की पुनर्वास भूमि। - जांच के लिए क्या समिति बनी?
जिला पंचायत सीईओ अध्यक्ष वाली पांच सदस्यीय जांच समिति। - अधिकारियों ने आरोपों पर क्या कहा?
उन्होंने आरोपों को निराधार और तथ्यहीन बताया।
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