आबकारी विभाग में बड़ा खेल.... मंत्री को बिना बताए आगे बढ़ी 22 निलंबित अफसरों की बहाली प्रक्रिया
Raipur. आबकारी विभाग में शराब घोटाले में काफी समय से निलंबित चल रहे 22 अधिकारियों और कर्मचारियों की गुपचुप बहाली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जब मामला आबकारी मंत्री के सामने लाया गया तो उन्होंने भी पल्ला झाड़ लिया और साफ़ कहा कि उन्हें ऐसी किसी कवायद की जानकारी नहीं है और अगर ऐसा कुछ हो रहा है तो वह इसे होने नहीं देंगे। दूसरी ओर विभाग के आबकारी आयुक्त खुद स्वीकार कर रहे हैं कि सभी निलंबित अधिकारियों ने बहाली के लिए आवेदन दिया है और विभाग उन आवेदनों को प्रक्रिया के तहत शासन को भेजने की तैयारी कर चुका है।
फाइल शासन को भेजने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से आबकारी विभाग की स्थापना शाखा में निलंबित अधिकारियों की बहाली से जुड़ी फाइल पर काम चल रहा है। संबंधित अधिकारियों के आवेदन और उनकी सेवा संबंधी जानकारी संकलित करके अब पूरा प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की स्थिति में है। यह फाइल फ़िलहाल आबकारी आयुक्त की टेबल पर है।
मंत्री का बयान और राजनीतिक टकराव
जब इस मामले में आबकारी मंत्री से बात की गई कि निलंबित अफसरों को कैसे बहाल कर रहे हैं? इस पर आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि उन्हें इस तरह की किसी फाइल की जानकारी नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि यदि वास्तव में ऐसी कोई प्रक्रिया चल रही है तो उसे होने नहीं दिया जाएगा। मंत्री के इस बयान ने पूरे मामले को साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया से निकालकर राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव के केंद्र में ला खड़ा किया है।
आयुक्त की प्रतिक्रिया और स्टाफ की कमी
उधर आबकारी आयुक्त पी एल्मा का कहना है कि सभी 22 निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों ने बहाली के लिए आवेदन दिया है। यह स्वाभाविक प्रक्रिया है क्योंकि कोई भी निलंबित कर्मचारी सेवा में वापस आना चाहता है। विभाग का काम केवल उन आवेदनों को शासन तक पहुंचाना है। अंतिम फैसला सरकार को करना है। हालांकि आयुक्त ने एक और महत्वपूर्ण बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि विभाग में उप संचालक स्तर से लेकर मैदानी अमले तक अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी है। कई जिलों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। विभाग लगातार शासन से अतिरिक्त स्टाफ की मांग कर रहा है।
बहाली पर सवाल और भविष्य की प्रक्रिया
जानकारों का कहना है कि ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्टाफ की कमी के कारण निलंबित अधिकारियों की वापसी पर विचार किया जा रहा है? फिलहाल बहाली की फाइल शासन के दरवाजे तक पहुंचने वाली है। लेकिन मंत्री के सख्त बयान ने इस पूरी प्रक्रिया को विवादों के घेरे में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार मंत्री के रुख को प्राथमिकता देती है या फिर विभाग की ओर से भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है, जबकि इन निलंबित अफसरों में से कई की संपत्ति ईडी अटैच भी कर चुकी है।
निलंबित अधिकारियों की सूची
इनमें नवीन प्रताप सिंह, नोहर सिंह ठाकुर, अरविंद पटेल, गंभीर सिंह, नितिन बंजारे, प्रकाश पाल, नीतू नोटानी, जनार्दन कोर्राम, वेदराम लहरे, दिनकर वासनिक, अनंत कुमार सिंह, अश्वनी अनंत, मंजूश्री केसर, प्रमोद नेताम, मोहित जायसवाल, जीतराम मंडावी, देवलाल वैद्य, अनिमेष नेताम, आशीष कौसम, सौरभ बख्शी, विजय सेन और जी.सिंह शामिल हैं।
FAQ
- निलंबित आबकारी अधिकारियों की बहाली का विवाद क्या है?
कुल 22 निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों की गुपचुप बहाली की तैयारी से विवाद बढ़ा। मंत्री ने कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, जबकि आयुक्त ने आवेदन और प्रस्ताव की पुष्टि की है। - छत्तीसगढ़ आबकारी मंत्री का बहाली पर क्या रुख है?
आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसी किसी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है और अगर वास्तव में ऐसा कुछ हो रहा है तो वे इसे होने नहीं देंगे। - छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में निलंबित अधिकारियों में कौन-कौन शामिल हैं?
निलंबित अधिकारियों में नवीन प्रताप सिंह, नोहर सिंह ठाकुर, अरविंद पटेल, गंभीर सिंह सहित कुल 22 नाम शामिल हैं। इनमें से कई की संपत्ति ईडी द्वारा अटैच की जा चुकी है।
यह खबरें भी पढ़ें...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली या मुआवजा तय करने का कोई फार्मूला नहीं
सरकार ने एक काम के लिए लगाए दो अफसर, अटक गई आईपीएस की बहाली की फाइल
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : अनवर, अरूणपति समेत अन्य ED की रिमांड पर, 12 जून को अगली सुनवाई
115 करोड़ के बाद अब छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में दो नए वित्तीय घोटालों का हुआ खुलासा