80 हजार शिक्षकों को 31 अगस्त तक TET पास करना अनिवार्य, आधों की उम्र 50 पार
Harrison Masih | Jul 10, 2026, 20:01 IST
शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य 2026
छत्तीसगढ़ के 80 शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना अनिवार्य होगा। अधिकांश शिक्षक 50 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जिससे परीक्षा की तैयारी उनके लिए चुनौती बन गई है।
छत्तीसगढ़ के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के सामने अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के करीब 80 हजार 491 शिक्षक टीईटी के दायरे में आ गए हैं। इन शिक्षकों को तय समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, अन्यथा उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।
इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित वे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति 3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच हुई थी। उन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। वजह यह है कि इस दायरे में आने वाले अधिकांश शिक्षक अब 50 वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके हैं। कई शिक्षकों की उम्र 54 से 55 वर्ष तक पहुंच चुकी है।
लंबे समय बाद दोबारा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद अब उन्हें छात्रों की तरह परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी से छूट नहीं मिलेगी। इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को भी खारिज किया जा चुका है।
हालांकि, अदालत ने शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी पास करने की समय सीमा बढ़ाई है। पहले यह समय सीमा 31 अगस्त 2027 तक थी, जिसे बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2028 कर दिया गया है।
इस बीच सोशल मीडिया पर टीईटी से छूट मिलने को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने इन्हें भ्रामक बताया है।
संगठनों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के हलफनामे को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है कि निर्धारित श्रेणी के शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी।
प्रदेश के सभी जिलों में टीईटी के दायरे में आने वाले शिक्षकों की संख्या अलग-अलग है।
सबसे ज्यादा शिक्षक कोंडागांव जिले में 5,334 हैं। इसके बाद:
बलौदाबाजार-भाटापारा - 4,535 शिक्षक
महासमुंद - 4,486 शिक्षक
सरगुजा - 4,328 शिक्षक
रायगढ़ - 4,207 शिक्षक
सूरजपुर - 4,151 शिक्षक
बलरामपुर - 3,830 शिक्षक
कबीरधाम - 3,750 शिक्षक
वहीं सबसे कम शिक्षक इन जिलों में हैं:
मुंगेली - 245 शिक्षक
रायपुर - 378 शिक्षक
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर - 478 शिक्षक
सुकमा - 658 शिक्षक
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी - 862 शिक्षक
शिक्षक संगठनों ने मौजूदा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि टीईटी नियमित रूप से आयोजित नहीं होती। कई बार परीक्षा दो-दो साल तक नहीं होती, जिससे शिक्षकों के पास सीमित अवसर रह जाते हैं।
उनकी मांग है कि सरकार मिशन मोड में हर तीन-चार महीने में टीईटी आयोजित करे, ताकि सभी शिक्षक समय सीमा के भीतर परीक्षा पास कर सकें।
शिक्षकों का कहना है कि टीईटी में पूछे जाने वाले प्रश्न कई बार काफी कठिन स्तर के होते हैं। कुछ प्रश्नों का स्तर लोक सेवा आयोग (PSC) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के बराबर होने की बात कही जा रही है।
उनका कहना है कि प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों के लिए अलग-अलग टीईटी होनी चाहिए और प्रश्न कक्षा आधारित पाठ्यक्रम के अनुसार होने चाहिए।
सेवानिवृत्त प्राचार्य वीडी ठाकुर ने कहा कि टीईटी का उद्देश्य शिक्षकों की दक्षता जांचना होना चाहिए, न कि वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को हतोत्साहित करना।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने सेवाकालीन शिक्षकों के लिए अलग विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की मांग की है।
टीईटी शिक्षक बनने और सेवा में बने रहने की अनिवार्य योग्यता है। जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय बचा है, उनके लिए टीईटी जरूरी होगी।
पांच वर्ष से कम सेवा शेष रहने वाले शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिलेगी। वर्ष 2001 से 2011 के बीच नियुक्त तीन श्रेणियों के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य होगी।
अब शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इतने बड़े संख्या में शिक्षकों को समय सीमा के भीतर परीक्षा देने का अवसर कैसे दिया जाए।
शिक्षक संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि टीईटी परीक्षा नियमित अंतराल पर कराई जाए और उम्र व अनुभव को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाई जाए।
31 अगस्त 2028 की अंतिम समय सीमा नजदीक आने के साथ ही प्रदेश के हजारों शिक्षकों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है।
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इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित वे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति 3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच हुई थी। उन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
50 साल से ज्यादा उम्र वाले शिक्षकों की बढ़ी चिंता
लंबे समय बाद दोबारा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद अब उन्हें छात्रों की तरह परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने छूट की मांग ठुकराई
हालांकि, अदालत ने शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी पास करने की समय सीमा बढ़ाई है। पहले यह समय सीमा 31 अगस्त 2027 तक थी, जिसे बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2028 कर दिया गया है।
सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे भ्रामक
संगठनों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के हलफनामे को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है कि निर्धारित श्रेणी के शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी।
कोंडागांव में सबसे ज्यादा शिक्षक टीईटी के दायरे में
सबसे ज्यादा शिक्षक कोंडागांव जिले में 5,334 हैं। इसके बाद:
बलौदाबाजार-भाटापारा - 4,535 शिक्षक
महासमुंद - 4,486 शिक्षक
सरगुजा - 4,328 शिक्षक
रायगढ़ - 4,207 शिक्षक
सूरजपुर - 4,151 शिक्षक
बलरामपुर - 3,830 शिक्षक
कबीरधाम - 3,750 शिक्षक
वहीं सबसे कम शिक्षक इन जिलों में हैं:
मुंगेली - 245 शिक्षक
रायपुर - 378 शिक्षक
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर - 478 शिक्षक
सुकमा - 658 शिक्षक
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी - 862 शिक्षक
हर तीन महीने में हो टीईटी परीक्षा
उनकी मांग है कि सरकार मिशन मोड में हर तीन-चार महीने में टीईटी आयोजित करे, ताकि सभी शिक्षक समय सीमा के भीतर परीक्षा पास कर सकें।
प्रश्नों के स्तर को लेकर भी नाराजगी
उनका कहना है कि प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों के लिए अलग-अलग टीईटी होनी चाहिए और प्रश्न कक्षा आधारित पाठ्यक्रम के अनुसार होने चाहिए।
सेवानिवृत्त प्राचार्य वीडी ठाकुर ने कहा कि टीईटी का उद्देश्य शिक्षकों की दक्षता जांचना होना चाहिए, न कि वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को हतोत्साहित करना।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने सेवाकालीन शिक्षकों के लिए अलग विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें
29 मई को दिए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था:
पांच वर्ष से कम सेवा शेष रहने वाले शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिलेगी। वर्ष 2001 से 2011 के बीच नियुक्त तीन श्रेणियों के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य होगी।
आगे क्या होगा?
शिक्षक संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि टीईटी परीक्षा नियमित अंतराल पर कराई जाए और उम्र व अनुभव को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाई जाए।
31 अगस्त 2028 की अंतिम समय सीमा नजदीक आने के साथ ही प्रदेश के हजारों शिक्षकों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है।
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