पूजा-पाठ की आड़ में काटी 3 साल की फरारी, अब हुआ रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
कोल लेवी घोटाले में फरार कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को ईओडब्ल्यू ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि वे तीन साल तक देशभर के मंदिरों में दर्शन और पूजा कराते हुए छुपते रहे। रायपुर छोड़ने के बाद वे पहले ओडिशा गए, फिर उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों के धार्मिक स्थलों पर रुके। मंगलवार को बेटे वैभव को हिरासत में लेने के बाद बुधवार को खुद रामगोपाल ने ईओडब्ल्यू मुख्यालय जाकर सरेंडर किया। जांच में 800 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन का भी खुलासा हुआ है।
पुरी से वाराणसी तक मंदिरों की शरण
पूछताछ में रामगोपाल अग्रवाल ने खुद बताया कि रायपुर छोड़ने के बाद वे सबसे पहले ओडिशा गए। वहां पुरी और भुवनेश्वर के रिसॉर्ट में उन्होंने ठिकाना बनाया। इस दौरान उन्होंने मंदिरों में दर्शन किए और विशेष पूजा भी कराई। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, इसके बाद वे उत्तर प्रदेश पहुंचे। वाराणसी और प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश के कई धार्मिक स्थलों के उन्होंने दर्शन किए। मंदिरों का यह सहारा उनकी फरारी की रणनीति का अहम हिस्सा बना।
तेलंगाना से दिल्ली तक फैला फरारी का सफर
मंदिरों की यात्रा के बाद रामगोपाल अग्रवाल का सफर कई और राज्यों तक फैला। वे बाद में तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और राजस्थान भी गए। इसके अलावा मध्यप्रदेश और दिल्ली में भी वे कुछ समय तक रहे। इतने बड़े भौगोलिक दायरे में लगातार घूमते रहने के बावजूद वे तीन साल तक एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहे। इस दौरान वे लगातार परिवार, कुछ नेताओं और कारोबारियों के संपर्क में बने रहे। यही संपर्क आखिरकार जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी साबित हुए।
बेटे की हिरासत के बाद सामने आए
लंबे समय से जांच से दूर चल रहे रामगोपाल के खिलाफ विशेष अदालत ने स्थायी वारंट भी जारी कर दिया था। उनकी तलाश में लगातार छापेमारी हो रही थी, लेकिन वे अंडरग्राउंड बने रहे। मंगलवार को ईओडब्ल्यू ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल को हिरासत में लिया। इसके बाद दो दिनों तक वैभव से गहन पूछताछ की गई। इसी बीच बुधवार दोपहर रामगोपाल अग्रवाल खुद ईओडब्ल्यू मुख्यालय पहुंचे। वहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उनके बेटे वैभव को रात करीब साढ़े आठ बजे छोड़ दिया गया।
800 करोड़ का हवाला
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है। पार्टी फंड के नाम पर रामगोपाल ने करीब 800 करोड़ रुपए जुटाए थे। आरोप है कि यह रकम बोरी और कार्टन में इकट्ठा की जाती थी। इसके बाद इसे हवाला के जरिए दिल्ली भेजा जाता था।
कांग्रेस के एक अकाउंटेंट और रामगोपाल के निजी सहायक देवेंद्र डड़सेना ने भी इस मामले में बयान दिया है। उनके मुताबिक घोटाले का पैसा कांग्रेस भवन आता था और वहां से रामगोपाल के जरिए पार्टी फंड में भेजा जाता था। अब जांच एजेंसियां इस पूरे हवाला नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। यह देखना अहम होगा कि 800 करोड़ रुपए के इस लेनदेन में और कौन-कौन शामिल था।
FAQ
- रामगोपाल अग्रवाल फरारी के दौरान कहां-कहां रहे?
उत्तर: वे पहले ओडिशा के पुरी और भुवनेश्वर गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली में भी रहे। - रामगोपाल अग्रवाल ने खुद सरेंडर क्यों किया?
उत्तर: बेटे वैभव अग्रवाल को ईओडब्ल्यू ने हिरासत में लिया था। इसके बाद रामगोपाल खुद ईओडब्ल्यू मुख्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया। - 800 करोड़ का हवाला मामला क्या है?
उत्तर: पार्टी फंड के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपए बोरी-कार्टन में जुटाए गए थे। यह रकम हवाला के जरिए दिल्ली भेजी जाती थी।
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