मंदिर-मस्जिद बैर कराते मेल कराती मधुशाला, गांववालों ने एक होकर सरकार से की मांग, हमारे गांव में खोलो शराब दुकान
RAIPUR : मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन ने अपनी काव्य कृति मधुशाला में लिखा है कि मंदिर मस्जिद बैर कराते, मेल कराती मधुशाला। ऐसा ही कुछ मामला छत्तीसगढ़ के एक गांव में आया है। इस गांव के सभी लोगों ने मिलकर सरकार से मांग की है कि उनके गांव में सरकारी शराब दुकान खोली जाए। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो आम सोच को उलट देता है। जहां आमतौर पर गांव-शहरों में शराब दुकानों को बंद कराने के लिए आंदोलन होते हैं, वहीं यहां के एक गांव के लोगों ने खुद अपने गांव में शासकीय शराब दुकान खोलने की मांग कर दी है। यह अनोखी मांग अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
शराब का कल्याणपुर मॉडल :
डोंगरगढ़ ब्लॉक के गांव कल्याणपुर के लोगों ने शराब की दुकान खुलवाने के लिए एक अलग रास्ता अपनाया। ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई जिसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि गांव में शासकीय शराब दुकान खोली जाए। यह फैसला सुनने में भले ही चौंकाने वाला लगे लेकिन इसके पीछे की सोच बेहद व्यावहारिक है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर गांव में सरकारी शराब दुकान खुलती है, तो अवैध शराब का कारोबार अपने आप कम हो जाएगा। शासकीय दुकान होने से शराब की क्वालिटी भी ठीक रहेगी। कीमत तय होगी और अवैध बिक्री पर लगाम लगेगी। इतना ही नहीं गांव वालों ने दुकान के लिए जमीन भी पसंद कर ली है।
प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक :
अपनी इस अनोखी मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण डोंगरगढ़ एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री, आबकारी मंत्री, कलेक्टर और एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि अवैध शराब के बढ़ते कारोबार को रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि अब इस समस्या को नजरअंदाज करना गांव के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
उलटी मांग के पीछे सीधी सोच :
आमतौर पर शराब दुकानों के विरोध में आंदोलन होते हैं लेकिन कल्याणपुर के ग्रामीणों ने इसके उलट सोच अपनाई है। उनका मानना है कि जब तक अवैध शराब पूरी तरह बंद नहीं होती तब तक नियंत्रित और वैध व्यवस्था ही बेहतर विकल्प है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि अवैध शराब न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे अपराध भी बढ़ते हैं। अगर सरकारी दुकान खुलती है, तो इस पर नियंत्रण संभव होगा और गांव में कानून व्यवस्था भी बेहतर होगी।
आंदोलन की चेतावनी :
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अब वे इस समस्या को और सहन नहीं करेंगे और किसी भी कीमत पर समाधान चाहते हैं। कल्याणपुर का यह मामला न सिर्फ प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब समस्या लंबे समय तक अनसुलझी रहती है, तो लोग परंपरागत सोच से हटकर नए रास्ते अपनाने लगते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस अनोखी मांग पर क्या फैसला लेता है।
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