छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में 192 करोड़ का वित्तीय घोटाला

Aishwarya Dwivedi | Jul 20, 2026, 10:40 IST
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छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा रिपोर्ट 2024-25 में पाठ्य पुस्तक निगम की गंभीर वित्तीय अनिमितताओं का खुलासा हुआ है। निगम में 192 करोड़ रुपए की गड़बड़ी और 30 करोड़ की अतिरिक्त छपाई का मामला सामने आया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा की वार्षिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है।
  • पाठ्य पुस्तक निगम में 192 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी पाई गई।
  • रिपोर्ट में कुल नौ प्रमुख गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
  • बिना सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के करोड़ों के भुगतान किए गए।
  • पांच साल बीतने के बाद भी निगम ने कोई जवाब नहीं दिया।

192 करोड़ की गड़बड़ी उजागर

छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा की ताजा वार्षिक रिपोर्ट सामने आ चुकी है। इस रिपोर्ट ने राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के काम पर सवाल उठाए हैं। वित्त वर्ष 2017-18 से 2019-20 के ऑडिट में बड़े खुलासे हुए हैं। निगम में कुल 192 करोड़ 34 लाख रुपए से अधिक की गड़बड़ी मिली है। इसमें बैंक खातों के संचालन से लेकर छपाई तक के काम शामिल हैं। अधिकारियों ने वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर काम किया है।



बिना दस्तखत जारी हुए चेक

रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी आपत्ति 72.05 करोड़ रुपए की है। इसमें सक्षम अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर के बिना चेक जारी किए गए। नियमों को दरकिनार कर यह भारी भुगतान किया गया। मुद्रण कार्यों की सामग्री खरीद में भी भारी अनियमि‍तता हुई है। सामग्री खरीद नियम 2002 का पालन नहीं किया गया। इससे 69.84 करोड़ रुपए का गलत भुगतान किया गया।



छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम


जरूरत से ज्यादा किताबें छापीं

पापुनि ने बिना जरूरत के ही लाखों किताबें छाप दीं। इससे निगम को 30.10 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान हुआ। जरूरत से ज्यादा छपाई पर ऑडिट ने आपत्ति जताई है। निगम ने अपनी निधि का भी जमकर दुरुपयोग किया है। विभिन्न संस्थाओं को 96.13 लाख रुपए का स्वच्छ अनुदान बांट दिया गया। यह राशि नियम विरुद्ध तरीके से बांटी गई।



बोर्ड खरीद और खातों में हेरफेर

ग्रीन बोर्ड और साइन बोर्ड खरीद में नियमों की अनदेखी हुई। इस मद में 6.70 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। ऑडिट में इसे गंभीर वित्तीय अनिमितता माना गया है। निगम के बैंक खातों का हिसाब भी ठीक नहीं मिला। बैंक समाधान पत्रक न बनाने से 3.29 करोड़ की आपत्ति हुई। वहीं 8.50 करोड़ का खर्च खातों में दर्ज ही नहीं था।



तामझाम और गाड़ियों पर फुजूलखर्ची

बिना सरकारी स्वीकृति अधिकारियों पर 34.10 लाख खर्च किए गए। कर्मचारियों की सुख-सुविधाओं पर यह राशि उड़ाई गई। गाड़ियों के किराए में भी 55.90 लाख की गड़बड़ी मिली है। मार्च 2022 में अंकेक्षण रिपोर्ट जारी की गई थी। इसके बावजूद निगम ने पांच साल से कोई जवाब नहीं दिया। ऑडिट विभाग के पत्रों का भी कोई असर नहीं हुआ।



FAQ

  1. पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) में कुल कितने रुपए की गड़बड़ी मिली है?
    उत्तर: राज्य संपरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार निगम में कुल 192 करोड़ 34 लाख 95 हजार 595 रुपए की वित्तीय गड़बड़ी पाई गई है। यह गड़बड़ी वित्त वर्ष 2017-18 से 2019-20 के दौरान हुई है।
  2. सबसे बड़ी वित्तीय आपत्ति किस मामले में दर्ज की गई है?
    उत्तर: सबसे बड़ी आपत्ति 72.05 करोड़ रुपए की है। यह भुगतान सक्षम अधिकारियों के संयुक्त हस्ताक्षर के बिना चेक जारी करके किया गया था।
  3. किताबों की छपाई में कितना नुकसान हुआ है?
    उत्तर: आवश्यकता से अधिक पाठ्यपुस्तकों की छपाई करने के कारण निगम को 30.10 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।

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