डिलिस्टिंग की मांग को लेकर जनजाति समाज का शक्ति प्रदर्शन, बस्तर से दिल्ली तक हल्ला बोल
ST सूची में डिलिस्टिंग की मांग को लेकर जनजाति समाज आज दिल्ली में प्रदर्शन करेगा। बस्तर संभाग से करीब 1200 ग्रामीण दिल्ली पहुंचे हैं। इनके अलावा देशभर से करीब सवा लाख लोगों को दिल्ली में बुलाया गया है। ये लोग दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपेंगे। केंद्रीय मंत्री अमित शाह भी कार्यक्रम में आमंत्रित हैं। छग के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
धर्मांतरण बना बड़ा मुद्दा
बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल समस्या से प्रभावित रहा है। अब यहां धर्मांतरण का मुद्दा तेजी से उभर रहा है। जनजाति समाज का आरोप है कि गांव-गांव में ईसाई मिशनरियां सक्रिय हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भोले-भाले आदिवासियों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इससे जनजातीय संस्कृति और परंपराओं पर असर पड़ रहा है। समाज का दावा है कि कई गांवों में सामाजिक तनाव भी बढ़ा है।
आरक्षण लाभ पर उठे सवाल
अभियान से जुड़े ग्रामीणों का कहना है कि धर्म बदलने के बाद भी कई परिवार SC और ST आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। साथ ही सरकारी योजनाओं का फायदा भी उठा रहे हैं। जनजाति समाज इसे मूल आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर असर बता रहा है। उनका कहना है कि जो लोग पारंपरिक जनजातीय आस्था छोड़ चुके हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर डी-लिस्टिंग अभियान चलाया जा रहा है।
अवैध चर्च संचालन के आरोप
ग्रामीणों ने कई इलाकों में अवैध चर्च संचालन के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि मिशनरियों की मदद से धर्मांतरण बढ़ रहा है। समाज के लोगों का दावा है कि धर्मांतरित परिवारों को अलग से सुविधाएं भी मिल रही हैं। वहीं दूसरी तरफ वे जनजातीय योजनाओं का लाभ भी ले रहे हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सामाजिक न्याय का मुद्दा बताया
जनजाति समाज इस अभियान को सामाजिक न्याय से जोड़कर देख रहा है। लोगों का कहना है कि ST सूची का लाभ उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो पारंपरिक जनजातीय पहचान और संस्कृति से जुड़े हैं। समाज का मानना है कि डी-लिस्टिंग से मूल आदिवासी समुदाय के अधिकार सुरक्षित होंगे। साथ ही धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
दिल्ली पहुंचे जनजाति प्रतिनिधि राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें धर्मांतरित जनजातियों को ST सूची से हटाने की मांग की जाएगी। समाज को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी। देश के कई राज्यों में भी इस मांग को लेकर अभियान चल रहा है। बस्तर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है।
सवा लाख लोगों के शामिल होने का दावा
जनजाति समाज का दावा है कि इस अभियान से देशभर में करीब पांच लाख लोग जुड़े हैं। दिल्ली में भी अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक करीब सवा लाख लोग दिल्ली पहुंचेंगे। पांच अलग-अलग स्थानों से शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। शाम छह बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जनजाति समाज को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर दिल्ली में व्यापक तैयारी की गई है।
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