छत्तीसगढ़ में अर्बन डिजास्टर अथॉरिटी का गठन, बाढ़-आग-हादसों पर रखेगी नजर

VINAY VERMA | Jul 14, 2026, 12:38 IST
छत्तीसगढ़ में अर्बन डिजास्टर अथॉरिटी 2026
सरकार ने शहरी क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव, आगजनी, भवन हादसों और औद्योगिक दुर्घटनाओं से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया है। नगर निगम क्षेत्रों में अब आपदा प्रबंधन के लिए अलग तंत्र काम करेगा, जिसमें कई अधिकारी शामिल होंगे।

छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी इलाकों को आपदाओं से बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने छत्तीसगढ़ शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया है।



यानी नगर निगम क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव, आग, भवन हादसे और औद्योगिक दुर्घटनाओं से निपटने के लिए अलग तंत्र काम करेगा। सरकार का दावा है कि इससे आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेज होंगे।



हर बारिश में डूबते शहर बने वजह

राज्य के बड़े शहर हर मानसून में जलभराव की समस्या झेलते हैं। कई जगह सड़कें नदी बन जाती हैं। नालों का पानी घरों में घुस जाता है। आगजनी और औद्योगिक हादसे भी चुनौती बने रहते हैं।



अब तक इन हालात से निपटने के लिए कोई समर्पित शहरी आपदा तंत्र नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा 41ए के तहत यह नई अथॉरिटी बनाई गई है। हालांकि बड़े हादसों के लिए SDRF और फिर NDRF की भी मदद ली जाएगी।



कलेक्टर नहीं... निगम आयुक्त होंगे अध्यक्ष

नई व्यवस्था में संबंधित नगर निगम आयुक्त प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष होंगे। जिला कलेक्टर या उनके नामित अपर कलेक्टर उपाध्यक्ष होंगे।



पुलिस अधीक्षक, अग्निशमन अधिकारी, सीएमएचओ, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पर्यावरण संरक्षण मंडल और बिजली वितरण कंपनी के अधिकारी भी सदस्य होंगे। यानी किसी भी आपदा से निपटने के लिए पूरा प्रशासन एक मंच पर रहेगा।



हर शहर का बनेगा डिजास्टर ब्लूप्रिंट

प्राधिकरण हर नगर निगम के लिए अलग शहरी आपदा प्रबंधन योजना तैयार करेगा। इसमें जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान होगी। संवेदनशील इलाकों का डिजिटल डेटाबेस बनाया जाएगा।



नई परियोजनाओं में आपदा सुरक्षा मानकों को शामिल किया जाएगा। शहरी बाढ़, हीट वेव, भवन दुर्घटना और औद्योगिक जोखिम को लेकर पहले से रणनीति तैयार रहेगी।



मॉक ड्रिल से लेकर रेस्क्यू तक एक कमान

नई अथॉरिटी केवल कागजी योजना नहीं बनाएगी। शहरों में नियमित मॉक ड्रिल कराई जाएगी। पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और स्वयंसेवकों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा।



किसी भी हादसे की स्थिति में एकीकृत कमांड सिस्टम के तहत तत्काल कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर हीट वेव, गैस रिसाव और बाढ़ जैसी अलग-अलग आपदाओं के लिए विशेष उप-समितियां भी बनाई जाएंगी।



पैसे की कमी नहीं आने देगी सरकार

सरकार ने इस प्राधिकरण के लिए वित्तीय व्यवस्था भी तय कर दी है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि और राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से आवश्यक राशि उपलब्ध कराई जाएगी।



इसके अलावा स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी परियोजनाओं के फंड का उपयोग भी सुरक्षा और आपदा न्यूनीकरण से जुड़े ढांचे को मजबूत करने में किया जा सकेगा।



आपदा आने से पहले तैयारी पर फोकस

सरकार का फोकस अब राहत से ज्यादा रोकथाम पर है। यानी हादसा होने के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि पहले से तैयारी। जोखिम वाले इलाकों की पहचान, संसाधनों का समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था इस अथॉरिटी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।



सरकार को उम्मीद है कि इससे शहरी क्षेत्रों में आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।



ये खबरें भी पढ़ें...

Disaster Management: आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम, छत्तीसगढ़ में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन



हिमाचल में तैयार आपदा प्रबंधन की धुरी, 31 सेंसरों से मिलेगी हर हलचल की जानकारी



BHOPAL: एमपी में भारी बारिश का अलर्ट, गृहमंत्री ने की आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारियों की समीक्षा



मध्यप्रदेश में आपदा पीढ़ितों का हक भी हड़प रहे घोटालेबाज



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • जलभराव
  • आपदा प्रबंधन
  • राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग
  • Disaster Management