मध्यप्रदेश में आपदा पीढ़ितों का हक भी हड़प रहे घोटालेबाज

मध्य प्रदेश में प्राकृतिक आपदा पीड़ितों के मुआवजा वितरण में करोड़ों का घोटाला हुआ। कैग की रिपोर्ट ने गड़बड़ी की पुष्टि की। अब घपलेबाजों पर कार्रवाई के सवाल उठने लगे हैं।

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Sanjay Sharma
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Photograph: (thesootr)

News In Short

  • मध्य प्रदेश में मुआवजा वितरण में करोड़ों की हेराफेरी की गई।
  • अधिकारियों की मिलीभगत से अपात्रों को मुआवजा राशि दी गई।
  • कैग की रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि, कार्रवाई पर सवाल उठे।
  • राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा कमीशन वसूली की गई।
  • घोटाले की जांच में तहसील स्तर पर गड़बड़ी सामने आई।

News In Detail

मध्यप्रदेश में मुआवजा राशि के वितरण को भी अधिकारियों ने घोटाले का जरिया बना लिया है। विधानसभा में प्राकृतिक आपदा, ओला-अतिवृष्टि, सूखा, सर्पदंश से मौतें हुई। इनमें बीते सालों में मुआवजा बांटने में करोड़ों की हेराफेरी के मामले विधायकों ने उठाए हैं।

वहीं कैग की रिपोर्ट भी राहत राशि वितरण में अनियमितता की पुष्टि करती है। मुआवजा राशि के घपलेबाजों पर फौरी कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए हैं। साल दर साल राहत राशि बांटने में हेराफेरी होने के तथ्यों के सामने आने के बावजूद सरकार पारदर्शी व्यवस्था बनाने में सफल नहीं रही है। 

एक अरब से ज्यादा राहत राशि स्वीकृत

मध्य प्रदेश मे बीते एक दशक में सरकार द्वारा 1,60,303 बाढ़, ओला- अतिवृष्टि, सर्पदंश, आकाशीय बिजली, अग्नि दुर्घटना प्रभावितों को मुआवजा राशि बांटी गई है। इन पीढ़ितों को सरकार से एक अरब रुपए से भी ज्यादा मुआवजा और राहत राशि स्वीकृत की गई है।

यह राशि राजस्व विभाग के अधिकारियों के माध्यम से बैंक खातों में जमा कराई गई। अधिकारियों की मिलीभगत से इसमें भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की पड़ताल में मध्य प्रदेश की कई तहसीलों में धांधली सामने आई है।

राजधानी भोपाल से सटे रायसेन जिले की तहसीलों में ही 90 लाख रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी लेखा परीक्षण में पकड़ में आ चुकी है।  प्रदेश के 55 जिलों में तहसील स्तर पर मुआवजा- राहत राशि घोटाला करोड़ों रुपए का है। 

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ऐसे दिया गया घपले को अंजाम 

मुआवजा और राहत राशि के वितरण में घोटाले को राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, आरआई और पटवारी इस गड़बड़झाले की मुख्य कड़ियां हैं।

अपात्रों को हितग्राही बनाकर एजेंटों की मदद से उनके खातों में राहत और मुआवजा राशि जमा की जाती है। इसी में से सबके पास अपना - अपना हिस्सा पहुंच जाता है।

कैग के लेखा परीक्षण में अधिकारी- कर्मचारियों द्वारा की गई गड़बड़ी सामने आने के बाद कई तहसीलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। इनमें से ज्यादातर घपलेबाज अपने संपर्कों के सहारे कार्रवाई को टालने में कामयाब रहे या फौरी कार्रवाई के बाद बच निकले। 

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तहसीलों में लाखों की हेराफेरी 

विधानसभा में विधायक देवेन्द्र पटेल के प्रश्न के जवाब में सरकार ने रायसेन जिले में मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की बात स्वीकार की है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के जवाब के अनुसार रायसेन की बेगमगंज तहसील में कैग द्वारा 169 प्रकरणों का परीक्षण किया गया है। जिसमें 57.19 लाख रुपए की मुआवजा और राहत राशि का भुगतान गलत और अपात्रों के बैंक खातों में किया गया है।

सिलवानी में 18.90 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि बांटने में गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में पटवारी और राजस्वकर्मियों पर जिम्मेदारी तय की गई है। उदयपुरा तहसील में 3 लाख रुपए, सुल्तानपुर में 9 लाख रुपए अपात्रों को मुआवजा और राहत राशि के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं।

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मुआवजा बांटने में कमीशन वसूली

मुआवजा और राहत राशि बांटने में राजस्वकर्मी जमकर कमीशन वसूल रहे हैं। इसके लिए अपात्रों को हितग्राही सूची में शामिल किया जाता है या वास्तवित हितग्राही के हिस्से की राशि अन्य व्यक्ति के बैंक खातों में जमा कर दी जाती है।

विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, राजगढ़, जैसे राजधानी से सटे जिलों के अलावा ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा संभाग की तहसीलों में भी प्राकृतिक आपदा पीढ़ितों के नाम पर करोड़ों की घपलेबाजी हुई है।

इन मामलों में पटवारी, आरआई, तहसीलदार जैसे राजस्वकर्मियों की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई बेहद फौरी होने से वे लाखों- करोड़ों कमाने का लालच नहीं छोड़ रहे। वहीं सरकारी खजाने की लूट की राशि की वसूली भी बेहद सुस्त है।

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