मध्यप्रदेश में आपदा पीढ़ितों का हक भी हड़प रहे घोटालेबाज
Sanjay Sharma | Feb 27, 2026, 23:01 IST
Photograph: (thesootr)
मध्य प्रदेश में प्राकृतिक आपदा पीड़ितों के मुआवजा वितरण में करोड़ों का घोटाला हुआ। कैग की रिपोर्ट ने गड़बड़ी की पुष्टि की। अब घपलेबाजों पर कार्रवाई के सवाल उठने लगे हैं।
News In Short
- मध्य प्रदेश में मुआवजा वितरण में करोड़ों की हेराफेरी की गई।
- अधिकारियों की मिलीभगत से अपात्रों को मुआवजा राशि दी गई।
- कैग की रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि, कार्रवाई पर सवाल उठे।
- राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा कमीशन वसूली की गई।
- घोटाले की जांच में तहसील स्तर पर गड़बड़ी सामने आई।
News In Detail
वहीं कैग की रिपोर्ट भी राहत राशि वितरण में अनियमितता की पुष्टि करती है। मुआवजा राशि के घपलेबाजों पर फौरी कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए हैं। साल दर साल राहत राशि बांटने में हेराफेरी होने के तथ्यों के सामने आने के बावजूद सरकार पारदर्शी व्यवस्था बनाने में सफल नहीं रही है।
एक अरब से ज्यादा राहत राशि स्वीकृत
यह राशि राजस्व विभाग के अधिकारियों के माध्यम से बैंक खातों में जमा कराई गई। अधिकारियों की मिलीभगत से इसमें भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की पड़ताल में मध्य प्रदेश की कई तहसीलों में धांधली सामने आई है।
राजधानी भोपाल से सटे रायसेन जिले की तहसीलों में ही 90 लाख रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी लेखा परीक्षण में पकड़ में आ चुकी है। प्रदेश के 55 जिलों में तहसील स्तर पर मुआवजा- राहत राशि घोटाला करोड़ों रुपए का है।
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ऐसे दिया गया घपले को अंजाम
अपात्रों को हितग्राही बनाकर एजेंटों की मदद से उनके खातों में राहत और मुआवजा राशि जमा की जाती है। इसी में से सबके पास अपना - अपना हिस्सा पहुंच जाता है।
कैग के लेखा परीक्षण में अधिकारी- कर्मचारियों द्वारा की गई गड़बड़ी सामने आने के बाद कई तहसीलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। इनमें से ज्यादातर घपलेबाज अपने संपर्कों के सहारे कार्रवाई को टालने में कामयाब रहे या फौरी कार्रवाई के बाद बच निकले।
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तहसीलों में लाखों की हेराफेरी
सिलवानी में 18.90 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि बांटने में गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में पटवारी और राजस्वकर्मियों पर जिम्मेदारी तय की गई है। उदयपुरा तहसील में 3 लाख रुपए, सुल्तानपुर में 9 लाख रुपए अपात्रों को मुआवजा और राहत राशि के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं।
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मुआवजा बांटने में कमीशन वसूली
विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, राजगढ़, जैसे राजधानी से सटे जिलों के अलावा ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा संभाग की तहसीलों में भी प्राकृतिक आपदा पीढ़ितों के नाम पर करोड़ों की घपलेबाजी हुई है।
इन मामलों में पटवारी, आरआई, तहसीलदार जैसे राजस्वकर्मियों की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई बेहद फौरी होने से वे लाखों- करोड़ों कमाने का लालच नहीं छोड़ रहे। वहीं सरकारी खजाने की लूट की राशि की वसूली भी बेहद सुस्त है।
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