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Photograph: (thesootr)
News In Short
- स्कूलों में निर्माण और मरम्मतीकरण का मामला।
- 'द सूत्र' ने किया था करोड़ों के गबन का खुलासा।
- कांग्रेस और बीजेपी विधायकों ने सदन में उठाए सवाल।
- स्कूल शिक्षा मंत्री ने कबूल की भ्रष्टाचार की बात।
- 'द सूत्र' की खबर के बाद कांग्रेस ने बोला था हमला।
- ध्यानाकर्षण सत्र में लखन घनघोरिया ने उठाया मुद्दा।
- बीजेपी विधायक चतुर्वेदी ने भी सरकार को घेरा।
News In Detail
'द सूत्र' के खुलासे के बाद सरकारी स्कूलों में रिपेयरिंग के नाम पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा में गरमा गया। कांग्रेस और बीजेपी के विधायकों ने गुरुवार को ध्यानाकर्षण सत्र में इस पर सवाल उठाए।
स्कूल शिक्षा मंत्री ने इस भ्रष्टाचार को स्वीकार करते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी। सरकार ने पूरे प्रदेश के स्कूलों में भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दिए। 'द सूत्र' ने एक स्कूल में करीब पांच करोड़ रुपए के गबन का खुलासा किया था।
हो के मायूस न यूं शाम से ढलते रहिए।
जिंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए।
एक ही ठांव पे ठहरेंगे तो थक जाएंगे।
धीरे-धीरे ही सही राह पे चलते रहिए।
कवि कुंवर बेचैन की ये पंक्तियां आज अचानक याद आने की वजह काफी बड़ी है। दरअसल, 'द सूत्र' भी कुछ इसी फिलॉसफी पर यकीन करता है। हम सबसे तेज पर नहीं, बल्कि धीरे और सटीक पर भरोसा करते हैं। हम सनसनी नहीं फैलाते सार्थक खबर दिखाते हैं। हम वायरल के पीछे नहीं भागते, वैल्यू को तवज्जो देते हैं और हमारी ये फिलॉसफी जब जमीन पर रंग दिखाती है तो खुशी होती है।
'द सूत्र' ने किया था खुलासा
मामला जुड़ा है 'द सूत्र' के बड़े खुलासों से। जो हमने फरवरी के पहले हफ्ते में डंके की चोट पर तमाम अहम तथ्यों, मजबूत तर्कों और सबूतों के साथ किया था। हमने बताया था कि मैहर जिले समेत प्रदेश के कई जिलों के सरकारी स्कूलों में पार्किंग शेड, साइकिल स्टैंड निर्माण और मरम्मतीकरण के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। एक जिले में करीब पांच करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है।
खबर दिखाने के अगले ही दिन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरा। जिस पर हमने उनसे बात की थी। बातचीत के दौरान सिंघार ने भरोसा दिलाया था कि वो ये मुद्दा विधानसभा के बजट सत्र में उठाएंगे। हुआ भी बिल्कुल वही।
जबलपुर पूर्व से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने ध्यानाकर्षण सत्र में यही मुद्दा उठाया। साथ ही मैहर से बीजेपी विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने भी स्कूलों में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछा।
इस सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भ्रष्टाचार की बात कबूल की और प्रदेश के सभी जिलों के स्कूलों की जांच कराने के निर्देश दिए। यानी 'द सूत्र' ने जो खुलासे किए थे। उन पर विधानसभा का ध्यानाकर्षण सत्र जमकर गरमाया। पूरा मामला जानने के लिए देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट...
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विधानसभा में उठाया मुद्दा
'द सूत्र' (the sootr) ने मैहर समेत प्रदेश के कई जिलों के सरकारी स्कूलों में साइकिल स्टैंड, पार्किंग शेड निर्माण और रंग-रोगन के नाम पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा किया था।
हमारे न्यूज बुलेटिन सूत्रधार और स्पेशल वीडियो सैगमेंट में घोटाले की परतें उधेड़ने के बाद मामले की गूंज विधानसभा तक सुनाई पड़ी। मैहर से बीजेपी विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी और कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने ध्यानाकर्षण सत्र में सरकार से तीखे सवाल पूछे।
बीजेपी विधायक ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक, उप संचालक और संयुक्त संचालक स्तर के अफसरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और सस्पेंड कर नौकरी से हटाने की मांग की। जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भ्रष्टाचार की बात कबूल की।
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मामला संगीन है: विधानसभा अध्यक्ष
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वहीं, मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मंत्री से कहा कि मामला संगीन है। अगर कोई अफसर जांच को प्रभावित कर सकता है तो उन्हें हटाकर जांच कराएं। इसके बाद मंत्री ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में भ्रष्टाचार की गंभीरता से जांच कराने की बात कही।
इससे पहले फरवरी के पहले हफ्ते में 'द सूत्र' के खुलासे के अगले ही दिन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर यही मुद्दा उठाकर सरकार से जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। 'द सूत्र' से बातचीत में सिंघार ने कहा था कि कांग्रेस ये मामला विधानसभा के बजट सत्र में उठाएगी।
विधायक घनघोरिया ने उठाए सवाल...
जबलपुर पूर्व से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सदन में सवाल उठाया, उन्होंने कहा कि स्कूलों में करोड़ों के भ्रष्टाचार का मामला मीडिया के जरिए सामने आ गया, वरना इतना बड़ा भ्रष्टाचार दबा ही रहता।
घनघोरिया ने लोक शिक्षण संचालनालय में सालों से एक ही जगह जमे अफसरों का मुद्दा भी उछाला। उन्होंने कहा कि DPI में एक ही जगह पर बैठे अफसरों ने कॉकस बना लिया है। संचालक, उप-संचालक और संयुक्त संचालक सीधे प्रस्ताव मंगवा लेते हैं, बिना टेंडर काम होते हैं, ये मामला भले ही मैहर जिले से सामने आया हो, लेकिन समस्या पूरे प्रदेश के स्कूलों की है।
घनघोरिया ने लोक शिक्षण संचालनालय के बीते तीन साल के कामों की जांच कराने की मांग की, साथ ही ऐसी नीति बनाने का आग्रह किया जिससे सरकारी कामों में बंदरबांट न हो। आखिर में कांग्रेस विधायक ने कहा कि जब स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह गड़बड़ी कबूल करहे हैं तो अफसरों को हटाया क्यों नहीं जा रहा है।
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बीजेपी विधायक चतुर्वेदी ने पूछे सवाल
बकौल चतुर्वेदी प्रदेश के स्कूलों में मरम्मत और रखरखाव की आड़ में संगठित रूप से आर्थिक अपराध हो रहे हैं। जमीन पर कोई काम किए बिना ही DPI के अफसर और ठेकेदार सरकारी खजाने को लूट रहे हैं। इस खेल में संचालक से लेकर उप संचालक और संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। लिहाजा, ऐसे भ्रष्ट अफसरों को तत्काल सस्पेंड करना चाहिए।
कांग्रेस और बीजेपी विधायक के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री ने मैहर जिले के स्कूलों में गड़बड़ी की बात मानी और बताया कि मामले में अब तक कुल 17 आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है। जिन ठेकेदारों ने फर्जी बिल लगाए, उन पर भी कार्रवाई होगी। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों के सरकारी स्कूलों में भ्रष्टाचार की जांच कराई जाएगी।
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17 प्रचार्य और एक चपरासी सस्पेंड
'द सूत्र' ने मैहर जिले के सरकारी स्कूलों में हुए घोटाले का खुलासा किया था। साथ ही अंदेशा जताया था कि एक स्कूल में करीब पांच करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। इसके बाद कलेक्टर ने जांच कराई, जिसमें भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई। लिहाजा, कलेक्टर ने तत्काल बीईओ के निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर को भेजा था। जिसके बाद बीईओ समेत 17 प्रचार्यों और एक चपरासी को सस्पेंड किया गया था। साथ ही ठेकेदार समेत सभी पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी।
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