सीएम विष्णुदेव साय को बंगाल में मिला था ‘जंगल महल’ का ज़िम्मा, बीजेपी ने जीतीं सभी 16 आदिवासी सीटें

Arun Tiwari | May 05, 2026, 21:06 IST
vishnu-deo-sai-west-bengal-election-jungle-mahal-bjp-victory-st-seats-win
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की आदिवासी सीटों पर बड़ी जीत के पीछे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सक्रिय चुनावी भूमिका रही। साय को पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों, जंगल महल में प्रचार के लिए भेजा गया था।

Raipur : पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के पीछे कई रणनीतियां काम आईं। लेकिन अनुसूचित जनजाति (ST) बहुल सीटों पर पार्टी की सफलता ने खास ध्यान खींचा है।राज्य की 16 ST आरक्षित सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस सफलता में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय की सक्रिय चुनावी भूमिका भी अहम रही।



साय को आदिवासी सीटों का ज़िम्मा

बीजेपी ने आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए साय को पश्चिम बंगाल के ‘जंगल महल’ इलाके में प्रचार के लिए उतारा था। साय ने झारग्राम जिले की झारग्राम, बिनपुर, नयाग्राम और गोपीबल्लवपुर विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में रैलियां, रोड शो और जनसभाएं कीं। ये सभी सीटें बीजेपी को हासिल हुई हैं।



जंगल महल है वोट स्विंग ज़ोन

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जंगल महल लंबे समय से “स्विंग ज़ोन” माना जाता है। जहां आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि बीजेपी ने एक आदिवासी चेहरे के तौर पर साय को यहां उतारा। उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाता जुटे और इसका असर वोटिंग पैटर्न में भी दिखा।



इतने मतों से जीते आदिवासी नेता

चुनावी नतीजों में बीजेपी प्रत्याशी लक्ष्मीकांत साहू ने झारग्राम सीट से 38,147 वोटों से जीत दर्ज की। नयाग्राम में अमिय किस्कू 6,424 मतों से विजयी रहे। गोपीबल्लवपुर सीट पर राजेश महाता ने 26,675 वोटों से जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस को मात दी, जबकि बिनपुर में डॉ. प्रनत टूडू 22,977 मतों से विजयी हुए। इन सभी सीटों पर साय ने चुनाव प्रचार किया था।



जंगल महल और सियासत

जंगल महल क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कभी वामपंथी दलों का गढ़ रहा यह इलाका माओवादी प्रभाव से भी प्रभावित रहा, लेकिन 2011 के बाद यहां तृणमूल कांग्रेस का दबदबा बन गया था। इस बार बीजेपी ने उसी क्षेत्र में सेंध लगाकर बड़ा उलटफेर किया है।



बीजेपी को मिला 5 फीसदी तक वोट स्विंग

विशेषज्ञों का मानना है कि साय की आदिवासी नेता के रूप में पहचान और उनकी सीधी संवाद शैली ने मतदाताओं पर प्रभाव डाला। उन्होंने स्थानीय मुद्दों को उठाते हुए समुदाय के साथ जुड़ाव बनाया, जिससे बीजेपी को 2 से 5 फीसदी तक वोट स्विंग का फायदा मिला।



बंगाल में छत्तीसगढ़ मॉडल की चर्चा

इसके अलावा बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के ‘मॉडल’ को भी बंगाल में लागू किया। महतारी वंदन की तरह महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का वादा भी गेमचेंजर साबित हुआ।



179


क्या है जंगल महल

जंगल महल पश्चिम बंगाल का एक भौगोलिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका है, जो मुख्यतः राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित है। यह क्षेत्र घने जंगलों, आदिवासी आबादी और ऐतिहासिक रूप से राजनीतिक हलचलों के लिए जाना जाता है। जंगल महल में मुख्य रूप से तीन जिलों के इलाके शामिल माने जाते हैं।



इनमें झारग्राम, पश्चिम मिदनापुर, पुरुलिया हैं। यहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं। इलाका जंगलों और पहाड़ी भूभाग से घिरा हुआ है । विकास के मामले में लंबे समय तक पिछड़ा रहा है। जंगल महल को पश्चिम बंगाल की राजनीति में “स्विंग ज़ोन” कहा जाता है। यानी यहां के वोट किसी भी पार्टी की जीत-हार तय कर सकते हैं। इसी कारण चुनाव के समय सभी पार्टियां इस क्षेत्र पर खास ध्यान देती हैं।



यह खबरें भी पढ़े....

बंगाल से केरल तक कैसे बदल रही है देश की राजनीति- पंकज जगन्नाथ जयस्वाल



बीजेपी की बंगाल जीत पर क्या बोला मीडिया? किसी ने झालमुड़ी पर फोकस किया तो कोई बोला अबकी बार गंगा पार...



बंगाल में मारवाड़ियों का बजा डंका, भाजपा के टिकट पर पांच प्रवासी राजस्थानी जीते



छत्तीसगढ़ के रास्ते पर एमपी के विधायक, छत्तीसगढ़ मॉडल पर वेतन और पेंशन बढ़ाने पर जोर



Tags:
  • सीएम विष्णुदेव साय
  • बीजेपी
  • छत्तीसगढ़ मॉडल
  • पश्चिम बंगाल
  • पश्चिम बंगाल चुनाव