MP मे जनता की सुनवाई के लिए बनी सीएम हेल्पलाइन सुस्त, 11 हजार से ज्यादा शिकायतें अब भी पेंडिंग, गृह विभाग से जुड़े मामले सर्वाधिक

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Neha Thakur
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MP मे जनता की सुनवाई के लिए बनी सीएम हेल्पलाइन सुस्त, 11 हजार से ज्यादा शिकायतें अब भी पेंडिंग, गृह विभाग से जुड़े मामले सर्वाधिक

BHOPAL. मध्यप्रदेश की जनता की शिकायतों की सुनवाई करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 अगस्त 2014 को शुरू की थी, लेकिन अब वहीं हेल्पलाइन सुस्त होती नजर आ रही है। दरअसल, 181 सीएम हेल्पलाइन में इन दिनों 11 हजार से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग है, जिसमें सबसे ज्यादा मामले गृह विभाग से संबंधित हैं। आंकड़ों के मुताबिक सीएम हेल्प लाइन पर निराकरण के लिए कुल 16,360 शिकायतें आईं, जिनमें से सिर्फ 5,187 को हल किया गया। 11,173 कंप्लेंट अभी भी लंबित हैं।





इन विभाग की सर्वाधिक शिकायतें





सीएम हेल्प लाइन पर निराकरण के लिए कुल 16,360 शिकायतें आई हैं। इनको मुख्यमंत्री जनसेवा शिविर में शामिल किया गया। इनमें से सिर्फ 5,187 शिकायतों का ही निराकरण किया जा सका, जबकि 11,173 अभी भी लंबित हैं। इन शिकायतों में गृह विभाग पहले पायदान पर है, जिसकी 2,925 शिकायतें लंबित हैं, जबकि दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग है, जहां 1683 शिकायतों को निराकरण का इंतजार है। इसके अलावा नगरीय विकास एवं आवास, स्कूल शिक्षा विभाग और चिकित्सा विभाग की भी एक हजार से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग हैं।





181 डायल करने पर समस्या का हल





मध्य प्रदेश के लोगों की समस्याओं का हल करने के लिए सीएम हेल्प लाइन नंबर है। 181 लोगों को उम्मीद थी कि 181 डायल करने पर उनकी समस्याओं का हल निकल जाएगा। लेकिन 11 हजार शिकायतों को अभी भी हल होने का इंतजार है। गौरतलब है कि 10 मई के पहले तक सीएम हेल्पलाइन पर 16,360 शिकायतें आई थीं। इनमें से सिर्फ 5,187 कंप्लेंट का ही निराकरण हो सका है, जबकि 11 हजार आवेदन लंबित पड़े हैं। कलेक्टर ने इन शिकायतों के निराकरण के लिए जनसेवा शिविर के माध्यम से 15 जून तक का समय दिया है।





6 विभागों ने बताया विशेष कारण





सीएम हेल्पलाइन विभाग अधिकारियों के मुताबिक 6 विभाग ऐसे हैं, जिनमें विशेष कारण का हवाला देकर करीब 4,000 से ज्यादा शिकायतों को अटका दिया गया है। इन विभागों में चिकित्सा, शिक्षा, स्कूल शिक्षा, अनुसूचित जाति कल्याण, जनजातीय और तकनीकी शिक्षा, कौशल विभाग एवं रोजगार विभाग शामिल हैं। अटकी हुई शिकायतों के मामले में ये विभाग कारण नहीं बता रहे हैं। जबकि प्रदेश के 31 विभागों में 50 फीसदी से ज्यादा शिकायतों का निराकरण नहीं हो सका है। इन विभागों में विमानन, विमुक्त घुमक्कड़ और अर्द्धघुमक्कड़ जाति कल्याण, संसदीय, पर्यावरण, खेल एवं युवा कल्याण, आपदा प्रबंधन, विधि एवं विधायी कार्य, उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, संस्कृति और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग शामिल हैं।



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