16 सालों में 32 IAS ने दिया इस्तीफा, MP के 1, CG के 3 और राजस्थान के 2 अफसर शामिल

Amresh Kushwaha | Sept 07, 2026, 16:29 IST
Photograph: (thesootr)
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16 साल में देशभर में 32 IAS अफसरों के इस्तीफे मंजूर हुए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के 3, राजस्थान के 2 और मध्य प्रदेश के 1 अफसर शामिल हैं। यह जानकारी आरटीआई से सामने आई है। मध्यप्रदेश से रोमन सैनी का नाम भी इस सूची में है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • 2010 से अब तक देशभर में 32 IAS अफसरों के इस्तीफे मंजूर हुए हैं।
  • इनमें छत्तीसगढ़ के 3, राजस्थान के 2 और मप्र का 1 अफसर शामिल है।
  • यह जानकारी आरटीआई (RTI) से सामने आई है।
  • सरकार के पास इस्तीफा वापस लेने वालों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
  • आईएएस दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया।

इस साल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने इस्तीफे का ऐलान किया है। उन्होंने अपने 13 साल के करियर को अविस्मरणीय यात्रा बताया था।



यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई थी। हालांकि उनका इस्तीफा अभी भी उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर लंबित है। इस फैसले ने यूपी में राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है।



इसी के बाद यह सवाल उठा कि आखिर ऐसा कितनी बार होता है। एक आरटीआई के बाद जवाब मिला कि सरकार के मुताबिक 2010 से अब तक 32 इस्तीफे मंजूर हुए हैं। सरकार ने इन सभी अफसरों के नाम, कैडर और तारीखें भी जारी की हैं।



छत्तीसगढ़ के तीन इस्तीफे

छत्तीसगढ़ कैडर से भी तीन अफसरों के इस्तीफे मंजूर हो चुके हैं। यह आंकड़ा देश के बड़े कैडरों में शामिल है। 1994 बैच के अफसर राजकमल का इस्तीफा 17 जून 2010 को मंजूर हुआ था। इसी दिन 1984 बैच के अफसर बीआर मिश्रा का इस्तीफा भी स्वीकार किया गया था। इसके बाद 2005 बैच के अफसर ओम प्रकाश चौधरी ने भी नौकरी छोड़ी थी। उनका इस्तीफा 24 अगस्त 2018 को मंजूर हुआ था। इस तरह छत्तीसगढ़ कैडर के तीन अलग अलग बैचों के अफसरों ने नौकरी छोड़ी थी।



राजस्थान के दो इस्तीफे

राजस्थान कैडर से भी दो अफसरों के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं। 1987 बैच के अफसर डॉ. बी. शेखर का इस्तीफा 4 जून 2010 को मंजूर हुआ था। यह उसी साल का मामला है जब देशभर में सबसे ज्यादा इस्तीफे हुए थे। इसके बाद 2012 बैच के अफसर विक्रम जिंदल ने भी नौकरी छोड़ी थी। उनका इस्तीफा 15 जुलाई 2021 को स्वीकार किया गया था। यानी राजस्थान में करीब एक दशक के अंतर पर दो इस्तीफे हुए हैं।



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मध्यप्रदेश से रोमन सैनी का इस्तीफा

मध्य प्रदेश कैडर से सिर्फ एक अफसर का इस्तीफा मंजूर हुआ है। यह नाम है 2014 बैच के अफसर रोमन सैनी का। उनका इस्तीफा 27 अप्रैल 2018 को स्वीकार किया गया था। रोमन सैनी को शिक्षा क्षेत्र में भी जाना पहचाना नाम माना जाता है। मध्य प्रदेश कैडर में यह इकलौता मामला है, जो सूची में दर्ज है। यानी बाकी बड़े राज्यों की तुलना में एमपी में यह संख्या काफी कम है।



साल दर साल कितने इस्तीफे

हर साल इस्तीफों की संख्या एक जैसी नहीं रही है। साल 2010 इसमें सबसे अलग नजर आता है। अकेले उसी साल छह अफसरों के इस्तीफे मंजूर हुए थे। यह किसी भी अन्य साल से सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इसके बाद ज्यादातर साल में यह संख्या एक से चार के बीच रही है। साल 2018 में चार अफसरों ने और 2024 में तीन अफसरों ने इस्तीफा दिया था। इसी के बीच छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश के मामले भी दर्ज हुए थे।



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इस्तीफा और मंजूरी में फर्क

आंकड़ों के पीछे एक बारीक सच्चाई भी छिपी है। हर नाम के आगे दर्ज तारीख इस्तीफा देने की नहीं है। यह वह तारीख है जब सरकार ने इस्तीफा स्वीकार किया है। सेवा नियमों के तहत मंजूरी मिलने तक नौकरी जारी रहती है। जब तक सक्षम प्राधिकारी हस्ताक्षर नहीं करता, कुछ भी अंतिम नहीं होता। इस बीच कोई भी अफसर अपना इस्तीफा वापस ले सकता है। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों का कोई केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं है।



शाह फैसल का दिलचस्प मामला

यह बात शाह फैसल के मामले से बेहतर समझी जा सकती है। 2010 बैच के यूपीएससी टॉपर शाह फैसल ने जनवरी 2019 में इस्तीफा दिया था। उन्होंने राजनीतिक दल शुरू करने के लिए यह फैसला लिया था। 2020 की एक आरटीआई से पता चला कि उनका इस्तीफा तब भी लंबित था।



विभाग सिर्फ यही जवाब दे रहा था कि मामला विचाराधीन है। कागजों पर वे तब भी कार्यरत अफसर ही माने जा रहे थे। आखिरकार अप्रैल 2022 में उनका इस्तीफा वापसी का आवेदन मंजूर हुआ था। उन्हें बहाल कर अगस्त में पर्यटन मंत्रालय में तैनात किया गया था। उनका नाम स्वीकृत इस्तीफों की सूची में कभी शामिल नहीं हुआ है।



दिव्या मित्तल का मामला अटका

आईएएस दिव्या मित्तल का मामला अभी भी अनसुलझा है। उनका इस्तीफा उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर पेंडिंग है। जब तक मंजूरी नहीं मिलती, वे तकनीकी रूप से अफसर बनी रहेंगी। उनका मामला भी शाह फैसल जैसी स्थिति को दिखाता है।



यह साफ करता है कि इस्तीफा देना और उसका स्वीकार होना अलग बातें हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मामलों में भी यही नियम लागू हुआ। हर अफसर का इस्तीफा तभी अंतिम माना गया, जब सरकार ने उसे मंजूर किया।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सरकारी पारदर्शिता और सूचना के अधिकार के महत्व को दिखाती है। आरटीआई के जरिए मिली जानकारी नागरिकों को प्रशासनिक तंत्र समझने में मदद करती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों के प्रशासनिक तंत्र में बदलाव को समझना जरूरी है।



यह जानकारी दिखाती है कि सरकारी सेवा में इस्तीफा भी नियमों के दायरे में होता है। किसी अफसर का फैसला व्यक्तिगत होते हुए भी प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करता है। यह खबर संवैधानिक व्यवस्था में सेवा नियमों और जवाबदेही की भूमिका को भी उजागर करती है। इसलिए यह आम पाठकों और प्रशासनिक क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए जानना जरूरी है।



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