IIM से एमबीए के बाद मिली कॉर्पोरेट जॉब छोड़ प्रशासन की राह पकड़ी आईएएस दिव्यांशु चौधरी ने

IAS दिव्यांशु चौधरी ने BITS पिलानी से इंजीनियरिंग और IIM कोलकाता से MBA के बाद HSBC बैंक में नौकरी की। लेकिन मन में संतोष न मिलने पर UPSC की तैयारी शुरू की। दूसरे प्रयास में उन्होंने AIR-30 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया।

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Abhilasha Saksena Chakraborty
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IAS Divyanshu Choudhary
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आज जहां देश के अधिकतर युवा कॉर्पोरेट जॉब की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। वहीं कई युवा आज भी प्राइवेट सेक्टर को चमक-धमक से दूर समाज सेवा को अपना लक्ष्य बना रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं जयपुर के रहने वाले आईएएस दिव्यांशु चौधरी, जिन्होंने कठिन मेहनत कर UPSC पास की। दिव्यांशु का मानना है कि UPSC की तैयारी कोई एक दिन का काम नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है।

पहले BITS पिलानी फिर IIM कोलकाता

दिव्यांशु की शुरुआती पढ़ाई जयपुर में हुई। वे हमेशा से एक मेधावी छात्र रहे। इंटरमीडिएट के बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान BITS Pilani में हुआ, जहाँ उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 2015 में  B.Tech किया। पढ़ाई पूरी होने के बाद दिव्यांशु की शैक्षणिक उड़ान यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आगे बढ़कर IIM कोलकाता से 2017 में MBA पूरा किया। आईआईएम से MBA के बाद दिव्यांशु ने एचएसबीसी  बैंक में फुल-टाइम नौकरी की, लेकिन दिल में IAS बनने की आग धीमे-धीमे और तेज होती गई।

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सुरक्षित नौकरी छोड़ UPSC की तैयारी

दिव्यांशु कहते हैं कि अपनी इंजीनियरिंग के दौरान मुझे कभी भी इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (EEE) में वास्तविक रुचि विकसित नहीं हुई। तीसरे वर्ष तक मुझे स्पष्ट हो गया था कि इस क्षेत्र में मास्टर्स या पीएचडी करना मेरे लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है।

मेरे सामने दो मुख्य विकल्प थे: MBA करना या सिविल सेवाओं में करियर बनाना। उस समय सिविल सेवाओं का विचार मुझे काफी चुनौतीपूर्ण लगा, क्योंकि प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन थी। हर साल केवल कुछ सौ पद निकलते थे, जिनमें IAS की सिर्फ 180 सीटें थीं। दूसरी ओर, MBA मुझे अधिक व्यवहारिक विकल्प लगा।

मुझे लगा कि इससे मुझे वे प्रबंधकीय कौशल मिलेंगे जो कॉर्पोरेट और सरकारी दोनों क्षेत्रों में उपयोगी होंगे। साथ ही, 20 वर्ष की उम्र में एक फ्रेशर होने के नाते, मजबूत गणितीय पृष्ठभूमि के साथ मेरे पास खोने के लिए बहुत कम था। मैंने CAT परीक्षा दी, अच्छा प्रदर्शन किया और IIM कोलकाता में प्रवेश पा लिया।

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IIM कोलकाता में पहले वर्ष के बाद, मैंने हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) मुंबई में इंटर्नशिप की। इस अनुभव ने स्पष्ट कर दिया कि कॉर्पोरेट क्षेत्र मेरे लिए नहीं है।

कॉर्पोरेट दुनिया की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी प्रकृति और महानगरीय शहरों की तेज़ रफ़्तार जीवनशैली मेरे स्वभाव से मेल नहीं खाती थी।

सिविल सेवाओं की ओर मेरा झुकाव दो महत्वपूर्ण अनुभवों से बना। BITS पिलानी में, मैं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से जुड़ा था, जहां मैं बच्चों को पढ़ाता था। यह अनुभव अत्यंत आत्मसंतोष देने वाला था।

IIM कोलकाता में, मैंने Teach for India के साथ एक लाइव प्रोजेक्ट किया जिसमें स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों (SMCs) पर काम किया। SMC ऐसा मंच है जो माता-पिता, शिक्षकों और प्रशासन को एक साथ लाकर स्कूलों के लिए सामूहिक निर्णय लेने की सुविधा देता है।

हम इस मॉडल को कोलकाता और दिल्ली दोनों में सफलतापूर्वक लागू कर पाए। इसके बाद माने तय कर लिए कि आईएएस बनना है। अपनी नौकरी छोड़कर वे दिल्ली पहुंचे और पूरी निष्ठा से UPSC की तैयारी में जुट गए। 

कैसे की UPSC की तैयारी

उन्होंने कोचिंग सामग्री या नोट्स पर निर्भर रहने के बजाय ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग किया। उन्होंने 80–100 मॉक टेस्ट पेपर सॉल्व किए। लगातार उत्तर लेखन और समय प्रबंधन पर ध्यान दिया।

हर दिन 7 घंटे की पढ़ाई का दिव्यांशु का नियम था। इसके साथ ही वो कोचिंग के लिए भी समय निकालते थे। दिव्यांशु ने वैकल्पिक विषय के रूप में गणित लिया क्योंकि यह स्कोरिंग माना जाता है।

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प्रीलिम्स की तैयारी पर ध्यान दें

परीक्षा के तीनों चरण महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना था कि प्रारंभिक परीक्षा को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह UPSC की सबसे पहली और सबसे चुनौतीपूर्ण सीढ़ी है, इसलिए उन्होंने इस पर विशेष फोकस रखा।

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दूसरे प्रयास में मिली सफलता

पहले प्रयास में वो इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन लक्ष्य से चूक गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और और भी अधिक फोकस के साथ तैयारी की।

दूसरे प्रयास में उन्होंने UPSC CSE में AIR-30 हासिल कर ली। यह सफलता सिर्फ एक रैंक नहीं, बल्कि उनकी कठोर मेहनत, धैर्य और अनुशासन की गवाही थी।

हिमांशु बताते हैं कि उन्होंने पूरी तैयारी के दौरान किसी तरह का तनाव नहीं लिया। बहुत ही आराम से पढ़ाई की। इस दौरान परिवार ने लगातार मोटीवेट किया और यही उनकी सफलता का कारण बना। 

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कहानियां लिखने के हैं शौकीन

दिव्यांशु को हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद है। इसके लिए वो अच्छी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं। उनकी भारतीय पौराणिक कथाओं में गहरी रुचि है। उनकी लिखी कुछ कहानियां अखबारों का हिस्सा बन चुकी हैं। 

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UPSC अभ्यर्थियों के लिए दिव्यांशु चौधरी की सलाह

  • वैकल्पिक विषय बहुत सोच-समझकर चुनें
  • ऐसा विषय चुनें जिसमें आपकी रुचि हो और जिसे आप लंबे समय तक पढ़ सकें।
  • इंटरनेट का सही उपयोग करें
  • अभी सबसे अच्छी किताबें और मटेरियल ऑनलाइन उपलब्ध हैं, इसलिए फालतू स्रोतों में समय न गंवाएं।
  • लिखने की प्रैक्टिस अनिवार्य है
  • UPSC सिर्फ पढ़ने से नहीं, बल्कि सटीक और प्रभावी लिखने से जीती जाती है।
  • हर दिन 5-6 घंटे पढ़ाई जरूर करें। 
  • मॉक टेस्ट जरूर दें
  • 80–100 मॉक की प्रैक्टिस ने ही उनकी प्रारंभिक सफलता सुनिश्चित की।
  • हर अभ्यर्थी की क्षमता और परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए किसी की रणनीति कॉपी न करें।

करियर एक नजर

नाम: दिव्यांशु चौधरी

जन्मस्थान: जयपुर

एजुकेशन: बी टेक, एमबीए

बैच: 2021

कैडर: मध्य प्रदेश

पदस्थापना

दिव्यांशु वर्तमान में एसडीओ और असिस्टेंट कलेक्टर डिंडोरी के पद पर कार्यरत हैं। वे एसडीएम डबरा और एसडीएम बैतूल भी रह चुके हैं। 

eआज दिव्यांशु चौधरी हर युवा के लिए प्रेरणा हैं। सुरक्षित नौकरी छोड़ने का साहस, लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा, इन तीन चीज़ों ने उन्हें UPSC जैसे कठिनतम परीक्षा में विजयी बनाया। उनका विनम्र व्यवहार, सरल जीवन और जमीन से जुड़ा दृष्टिकोण उन्हें एक लोकप्रिय और प्रेरक युवा अधिकारी बनाता है।

FAQ

दिव्यांशु चौधरी का वैकल्पिक (Optional) विषय क्या था?
उन्होंने गणित (Mathematics) को अपना वैकल्पिक विषय चुना।
दिव्यांशु ने UPSC में कितने प्रयास में सफलता पाई?
उन्होंने दूसरे प्रयास में UPSC CSE में AIR-30 हासिल की।
UPSC अभ्यर्थियों को दिव्यांशु चौधरी क्या सलाह देते हैं?
विषय सोच-समझकर चुनें, उत्तर लेखन करें, मॉक टेस्ट दें और सही रणनीति अपनाएँ।



 

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