इंदौर में अपर सत्र न्यायाधीश एडीजे गलत जमानत देने से विजिलेंस जांच में आए, हाईकोर्ट ने किया सस्पेंड
Sanjay Gupta | Sept 12, 2024, 12:19 IST
इंदौर जिला कोर्ट में पदस्थ अपर सत्र न्यायाधीश ( एडीजे ) पंकज यादव
हाई कोर्ट की विजिलेंस विंग ने एडीजे पकंज यादव के आदेश की हुई शिकायत की विस्तृत जांच की और इसमें अनियमितता पाई। इस पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
इंदौर जिला कोर्ट में पदस्थ अपर सत्र न्यायाधीश ( एडीजे ) पंकज यादव को हाईकोर्ट इंदौर ने सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया है। उनके एक जमानत आदेश को लेकर शिकायत हुई थी, जिसकी हुई गोपनीय जांच में पाया गया कि उन्होंने दायरे के बाहर जाकर यह जमानत दी थी। वहीं इस मामले में पुलिस भी मामले में घिरी थी, लेकिन वह बच गए।
https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-garbhkal-the-sootr-survey-6952867
पुलिस ने एक फ्लैट मालिक से 151 किलो एमडी ड्रग बरामद की थी। उसकी सुप्रीम कोर्ट से भी अग्रिम जमानत खारिज हो गई। वह पुलिस के पास सरेंडर हुआ और फिर उसे कोर्ट में पेश किया गया। मुख्य न्यायाधीश जिनके कोर्ट में यह केस आया वह दो दिन की छुट्टी पर थे और पंकज यादव प्रभार में थे।
जब कोर्ट में केस आया तो उन्होंने पुलिस से प्रतिवेदन नहीं मांगा। इसी के साथ एक तय क्वांटिटी से ज्यादा ड्रग्स मिली हो तो जमानत नहीं होगी,वह भी नहीं देखा। साथ ही जमानत देने का आधार होता है कि वह फिर से अपराध नहीं करेगा। अपराध रिकॉर्ड पर नहीं दिख रहा था, जबकि रिकॉर्ड पर था कि जब्ती उससे ही हुई है। वह खुद फ्लैट का मालिक भी है, लेकिन इन सभी तथ्यों के परे जाकर आरोपी को जमानत दी गई।
वहीं इस मामले में पुलिस की ओर से भी हद दर्जे की लापरवाही की गई, उन्होंने लिखकर दे दिया कि उन्हें पुलिस रिमांड की जरूरत नहीं है, जबकि वह पुलिस के पास सरेंडर हुआ था और कोई पूछताछ भी नहीं हुई थी। वहीं ना ही कोई प्रतिवेदन कोर्ट ने ना मांगा और ना ही पुलिस ने दिया। इसके चलते आरोपी छूट गया।
हाई कोर्ट की विजिलेंस विंग ने एडीजे पकंज यादव के आदेश की हुई शिकायत की विस्तृत जांच की और इसमें अनियमितता पाई। इस पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। विंग ने गोपनीय जांच कर प्रतिवेदन चीफ जस्टिस को दिया था, उनके निर्देश के बाद निलंबित किया गया है।
![sanjay gupta]()
https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-garbhkal-the-sootr-survey-6952867
यह था मामला
जब कोर्ट में केस आया तो उन्होंने पुलिस से प्रतिवेदन नहीं मांगा। इसी के साथ एक तय क्वांटिटी से ज्यादा ड्रग्स मिली हो तो जमानत नहीं होगी,वह भी नहीं देखा। साथ ही जमानत देने का आधार होता है कि वह फिर से अपराध नहीं करेगा। अपराध रिकॉर्ड पर नहीं दिख रहा था, जबकि रिकॉर्ड पर था कि जब्ती उससे ही हुई है। वह खुद फ्लैट का मालिक भी है, लेकिन इन सभी तथ्यों के परे जाकर आरोपी को जमानत दी गई।
पुलिस ने भी जमकर की थी लापरवाही
विजिलेंस विंग की जांच में पाई गई अनियमितता
sanjay gupta
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari