35 हजार की भीड़, 12 करोड़ रुपए की लैब; गृह मंत्री अमित शाह के सामने सिस्टम की कसौटी
पहले संगठन की बैठक
30 सितंबर और 1 अक्टूबर को भोपाल में संगठन की बैठक होगी। इसमें भाजपा (Bharatiya Janata Party) के नए पदाधिकारी शामिल होंगे।
नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब भी बैठकों में शामिल होंगे। सह प्रभारी रेखा वर्मा और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी भी रहेंगे।
बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से चर्चा की खबर है। इस दौरान संगठन के कामकाज और आगामी रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
क्या तय है 3 अक्टूबर का कार्यक्रम?
29 सितंबर की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री ने तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बैठने, पेयजल और सफाई की व्यवस्था समय पर करने को कहा।
हालांकि मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम अब तक जारी नहीं हुआ बताया गया है। इसलिए पूरी रूपरेखा को अंतिम कहना जल्दबाजी होगी।
जुटेंगे 35 हजार पशुपालक
भेल दशहरा मैदान में पशुपालक सम्मेलन की तैयारी है। करीब 35 हजार पशुपालक और किसानों के आने की बात कही गई है।
अमित शाह भोपाल से उज्जैन के 255 करोड रुपए के डेयरी प्लांट का शिलान्यास करेंगे। इस दौरान भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के पशुपालकों को बोनस राशि भी बांटी जाएगी।
सोचिए एक बार। मंच से घोषणा आसान है। पशुपालक जानना चाहेगा कि बदलाव का फायदा उस तक कितना पहुंचेगा।
डेयरी लैब: पहला टेस्ट
रिपोर्टों के अनुसार इस डेयरी टेस्टिंग लैब की लागत करीब 12 करोड रुपए है। यहां दूध और डेयरी उत्पादों की 100 से ज्यादा मानकों पर जांच हो सकेगी।
पेस्टिसाइड्स (कीटनाशक) और एंटीबायोटिक (बैक्टीरिया रोकने वाली दवा) की जांच भी इसमें शामिल है। यही क्षमता दूध की गुणवत्ता जांच को मजबूत बना सकती है।
लैब बनी, आगे क्या देखना होगा?
लेकिन प्रयोगशाला बन जाना अंतिम नतीजा नहीं है। कितने नमूनों की जांच होगी? रिपोर्ट कितनी जल्दी मिलेगी? और खामी मिलने पर कार्रवाई कितनी असरदार होगी?
मध्य प्रदेश को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के आधिकारिक रिकॉर्ड में एक पुराना मामला दर्ज है। मामला भोपाल दुग्ध संघ के दूध परिवहन में अनियमितता की जांच का है। रिकॉर्ड में संबंधित अधिकारियों के निलंबन का भी विवरण है।
इसलिए नई तकनीक के साथ निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी है।
पुलिस सिस्टम का रिपोर्ट कार्ड
मध्य प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध और आतंकवाद-रोधी व्यवस्था पर तैयारी की है। माओवादी समस्या, पुलिस आधुनिकीकरण और सुरक्षा समन्वय भी सूची में हैं।
समीक्षा में नए आपराधिक कानून का क्रियान्वयन शामिल है। इसमें ई-साक्ष्य (डिजिटल सबूत) और ई-समन (ऑनलाइन नोटिस) आते हैं। फोरेंसिक (अपराध की वैज्ञानिक जांच) सेवाएं और मोबाइल फोरेंसिक वैन भी हैं।
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि व्यवस्था कितनी बनी। सवाल यह भी है कि जमीन पर वह कितनी असरदार रही।
पांच दिन की पुलिस प्रदर्शनी
3 अक्टूबर से करीब पांच दिन की पुलिस प्रदर्शनी लगाने की तैयारी है। इसमें पुलिस, फोरेंसिक, अभियोजन और जेल विभाग की भूमिका समझाई जाएगी। अभियोजन यानी अदालत में सरकार का पक्ष रखने वाला विभाग।
प्रदर्शनी आम नागरिकों के लिए खोलने की तैयारी है।
सहकारिता क्षेत्र का सवाल
इस दौरे से सहकारिता क्षेत्र की भी उम्मीदें बंधी हुई है। कसौटी (परिणाम) घोषणाओं की संख्या नहीं होगी। यह देखना होगा कि प्राथमिक समितियों की आर्थिक हालत कैसी है।
दूध उत्पादकों की आय, प्रसंस्करण क्षमता (Processing capacity) और किसान का सीधा फायदा भी पैमाना हैं। आय में इजाफा हुआ या नहीं, यही असली पैमाना है। प्रसंस्करण यानी दूध से दही, घी जैसे उत्पाद बनाने का काम।
प्रदर्शनी और समीक्षा उपलब्धि का पैमाना नहीं
सबसे अहम सवाल सिस्टम की कसौटी का है। लैब, प्रदर्शनी और समीक्षा अपने आप में उपलब्धि का पैमाना नहीं हैं। इनका मूल्यांकन जांच, कार्रवाई और किसान को मिले लाभ से होगा।
दौरा अंतिम रूप ले, तो कहानी सिर्फ संख्या की नहीं होगी। पुलिस सेवाओं का असली प्रदर्शन भी यही तय करेगा।
मंच की रोशनी बुझेगी, तो सिस्टम के नतीजे ही बोलेंगे।