आर्मी विवाद : इंदौर नगर निगम ने मप्र शासन के आदेश को ही रद्दी की टोकरी में डाला, ड्रेस कोड पहले से लागू
Pratibha ranaa | May 17, 2024, 10:16 IST
आर्मी विवाद
मप्र शासन नगरीय विकास व आवास विभाग ने 6 नवंबर 2008 को सभी नगरी निकाय के लिए ड्रेस कोड लागू करते हुए आदेश जारी किए थे। लेकिन इसका पालन नहीं हुआ तो फिर 28 दिसंबर 2020 को शासन ने फिर सख्त आदेश जारी किए।
संजय गुप्ता, INDORE. इंदौर नगर निगम में रिमूवल गैंग को पहनाई गई आर्मी वर्दी ( army uniform ), द सूत्र के मुद्दा उठाने और नियम बताने के बाद उतर गई है। इस मामलें में तीन माह की सजा, 500 रुपए अर्थदंड के नियमों और फिर पठानकोट हमले के बाद देश में आर्मी वर्दी को लेकर आदेश व ग्वालियर में हटाई गई आर्मी वर्दी का खुलासा करने के बाद दू सूत्र नया खुलासा कर रहा है। इस मामले में साल 2008 से ही नगर निगमों के लिए ड्रेस कोड लागू है। ( army controversy )
मप्र शासन नगरीय विकास व आवास विभाग ने 6 नवंबर 2008 को सभी नगरी निकाय के लिए ड्रेस कोड लागू करते हुए आदेश जारी किए थे। लेकिन इसका पालन नहीं हुआ तो फिर 28 दिसंबर 2020 को शासन ने फिर सख्त आदेश जारी किए। दोनों ही आदेश बीजेपी की सरकार के समय ही जारी हुए हें। इसमें साफ गया कि देखने में आया है कि इस ड्रेस कोड़ का पालन नहीं हो रहा है, इसे कड़ाई से अमल में लाया जाए।
कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने इस मामले में आर्मी वर्दी को लेकर पुलिस सेना मुख्यालय को शिकायत भेज दी है और इसमें वहां से इस मामले के वीडियो और फोटो मांगे गए हैं। वह इसे अपने स्तर पर भी देख रहे हैं। वहीं यादव ने बताया कि मप्र शासन ने जब पहले ही 16 साल पहले ड्रेस कोड लागू कर दिया है और फिर 2020 में आदेश जारी कर चुके हैं तो इसे क्या कानून के जानकार महापौर पुष्यमित्र भार्गव और आईएएस निगमायुक्त शिवम वर्मा ने देखा नहीं। यह जो वर्दी लागू हुई और फिर इस पर खर्चा हुआ, इस फिर वापस लिया गया, इसे लेकर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने यहां तक कहा कि इस आर्मी वर्दी पर हुए खर्च को अधिकारियों से वसूला जाना चाहिए, उनके कारण यह आदेश लागू हुआ और खर्चा भी हुआ।
उधर, आश्चर्यजनक बात तो यह है कि खुद निगमायुक्त शिवम वर्मा इस ड्रेस कोड का पालन करते हैं और वह जब भी ऑफिस में होते हैं तो इसी ड्रेस कोड में ही नजर आते हैं। उनके देखा-देखी अन्य अधिकारी व स्टॉफ भी इसका पालन करने लगा है। लेकिन इसका असर निचले स्तर, जोन पर नहीं पहुंचा है और वह अपने हिसाब से कपड़ों में रहते हैं। उधर खुद निगम ने रिमवूल गैंग के लिए आर्मी वर्दी लागू कर इस ड्रेस कोड का उल्लंघन कर मारा।
कब जारी हुए ड्रेस कोड के आदेश
मप्र शासन नगरीय विकास व आवास विभाग ने 6 नवंबर 2008 को सभी नगरी निकाय के लिए ड्रेस कोड लागू करते हुए आदेश जारी किए थे। लेकिन इसका पालन नहीं हुआ तो फिर 28 दिसंबर 2020 को शासन ने फिर सख्त आदेश जारी किए। दोनों ही आदेश बीजेपी की सरकार के समय ही जारी हुए हें। इसमें साफ गया कि देखने में आया है कि इस ड्रेस कोड़ का पालन नहीं हो रहा है, इसे कड़ाई से अमल में लाया जाए।
यह है नगर निगम व निकायों के लिए ड्रेस कोड
- पुरूष अधिकारी व कर्मचारी दोनों के लिए- नेवी ब्लू पेंट और स्काई ब्लू शर्ट
- महिलाओं के लिए- स्काई ब्लू साड़ी, ब्लाउस या स्काई ब्लू कुर्ता, दुपट्टा व नेवी ब्लू सलवार
कांग्रेस ने की शिकायत
कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने इस मामले में आर्मी वर्दी को लेकर पुलिस सेना मुख्यालय को शिकायत भेज दी है और इसमें वहां से इस मामले के वीडियो और फोटो मांगे गए हैं। वह इसे अपने स्तर पर भी देख रहे हैं। वहीं यादव ने बताया कि मप्र शासन ने जब पहले ही 16 साल पहले ड्रेस कोड लागू कर दिया है और फिर 2020 में आदेश जारी कर चुके हैं तो इसे क्या कानून के जानकार महापौर पुष्यमित्र भार्गव और आईएएस निगमायुक्त शिवम वर्मा ने देखा नहीं। यह जो वर्दी लागू हुई और फिर इस पर खर्चा हुआ, इस फिर वापस लिया गया, इसे लेकर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने यहां तक कहा कि इस आर्मी वर्दी पर हुए खर्च को अधिकारियों से वसूला जाना चाहिए, उनके कारण यह आदेश लागू हुआ और खर्चा भी हुआ।
निगमायुक्त खुद पालन कर रहे, दूसरे नहीं
उधर, आश्चर्यजनक बात तो यह है कि खुद निगमायुक्त शिवम वर्मा इस ड्रेस कोड का पालन करते हैं और वह जब भी ऑफिस में होते हैं तो इसी ड्रेस कोड में ही नजर आते हैं। उनके देखा-देखी अन्य अधिकारी व स्टॉफ भी इसका पालन करने लगा है। लेकिन इसका असर निचले स्तर, जोन पर नहीं पहुंचा है और वह अपने हिसाब से कपड़ों में रहते हैं। उधर खुद निगम ने रिमवूल गैंग के लिए आर्मी वर्दी लागू कर इस ड्रेस कोड का उल्लंघन कर मारा।
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