बाबा बागेश्वर ने खोली एक देश-एक चुनाव पर पर्ची, बोले- बचेंगे देश के करोड़ों रुपए

Sanjay Dhiman | May 30, 2026, 23:34 IST
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बाबा बागेश्वर ने 'एक देश, एक चुनाव' की वकालत की। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पंच से सांसद तक सभी चुनाव एक साथ कराने से चुनावी खर्च और प्रशासनिक दबाव कम होंगे। इससे समय, पैसा और सरकारी संसाधन बचेंगे।

छतरपुर के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारत को बार-बार होने वाले चुनावों से मुक्ति मिलनी चाहिए। उन्होंने पंच, सरपंच, पार्षद, मेयर, विधायक और सांसद तक के चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया। इससे न केवल हजारों करोड़ रुपए बचेंगे, बल्कि प्रशासनिक संसाधनों और सुरक्षा बलों का बेहतर उपयोग भी होगा।



धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। साधना के बाद अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में लगातार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में उलझी रहती है।



चुनावी खर्च पर उठाया बड़ा सवाल

महाराज ने कहा कि देश में लगभग हर साल किसी न किसी स्तर पर चुनाव होते हैं। लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों की वजह से सरकारी संसाधन लगातार खर्च होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बार-बार चुनाव कराने में जो हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं, उनका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता है।



पंच से सांसद तक एक साथ चुनाव

बाबा बागेश्वर ने बताया कि यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं तो उम्मीदवारों को भी राहत मिलेगी। एक ही चुनावी अभियान में गांव के पंच से लेकर सांसद तक के उम्मीदवार जनता के बीच जा सकेंगे। इस तरह चुनाव प्रक्रिया कम खर्चीली और व्यवस्थित हो जाएगी।



प्रशासन और सुरक्षा बलों पर दबाव

हर चुनाव के दौरान हजारों की संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अमला चुनावी ड्यूटी में लगाया जाता है। इससे नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। यदि चुनाव एक साथ हों तो सुरक्षा बलों और सरकारी मशीनरी पर दबाव भी कम होगा।



आर्थिक मजबूती से जोड़ता संदेश

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत हो रहा है। ऐसे समय में भारत को संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए। चुनावी खर्च में कमी लाकर विकास और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा निवेश किया जा सकता है।



क्यों चर्चा में है ‘एक देश- एक चुनाव’?

देश में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं या नहीं। समर्थक तर्क देते हैं कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी। वहीं आलोचक कहते हैं कि इससे संघीय ढांचा और क्षेत्रीय मुद्दों पर असर पड़ सकता है। बाबा बागेश्वर का बयान इस बहस को धार्मिक और सामाजिक मंच से नई ऊर्जा देता दिख रहा है।



FAQ

  1. 'एक देश, एक चुनाव' का मतलब क्या है?
    इसका मतलब है कि सभी चुनाव—पंच, सरपंच, पार्षद, मेयर, विधायक और सांसद-एक साथ आयोजित किए जाएं। इससे बार-बार होने वाले चुनावों में समय, पैसा और प्रशासनिक दबाव बच सकता है।
  2. इससे सरकारी खर्च में कितना बचत हो सकती है?
    विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग चुनावों की वजह से सालाना हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। एक साथ चुनाव कराने से यह राशि बच सकती है और इसे विकास पर खर्च किया जा सकता है।
  3. प्रशासनिक और सुरक्षा बलों पर इसका क्या असर होगा?
    चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासनिक कर्मी लंबे समय तक चुनाव ड्यूटी में रहते हैं। एक साथ चुनाव होने से यह दबाव कम होगा और सामान्य प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा।

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