बालाघाट में 19 बच्चों की मौत के बाद 7711 गंभीर कुपोषित मिले, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा
समझें क्या है पूरा मामला...
- बालाघाट के आदिवासी इलाकों में कई बच्चों की मौत हुई है।
- रिपोर्ट के अनुसार अब तक 19 बच्चों की मौत हुई है।
- राहुल गांधी ने भी बच्चों की मौत को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
- जांच में 7,711 बच्चे गंभीर कुपोषित मिले हैं।
- सरकार ने 50 गांवों में स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया है।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। यह इलाका बैगा जनजाति बहुल क्षेत्र है। जुलाई महीने से यहां बुखार, खसरा और मलेरिया के मामले बढ़े थे।
रिपोर्ट के अनुसार यहां 19 बच्चों की मौत हुई है। इसके बाद केंद्र सरकार ने स्क्रीनिंग शुरू करवाई। इस जांच में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
केंद्र सरकार की स्क्रीनिंग में सात हजार 711 बच्चे गंभीर कुपोषित पाए गए हैं। इनमें से 518 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया है। यह आंकड़ा इलाके की गंभीर स्थिति दिखाता है।
जांच में यह भी पता चला कि 13 हजार 406 बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं। इसके अलावा 274 बच्चों को गंभीर निमोनिया है। कुल 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों को छह महीने से पोषण आहार सही तरीके से नहीं मिला। नियम के अनुसार साल में 300 दिन आहार देना था। लेकिन बच्चों को सिर्फ 170 दिन ही आहार मिला।
50 गांवों तक पहुंची स्वास्थ्य निगरानी
जुलाई में बिरसा क्षेत्र के बैगा बहुल गांवों में बुखार और खसरे के मामले बढ़े थे। इसके बाद कुछ बच्चों की मौत की खबर आई। इसके बाद स्वास्थ्य निगरानी बढ़ा दी गई।
पहले सिर्फ तीन गांवों में निगरानी हो रही थी। अब यह बढ़कर करीब 50 गांवों तक पहुंच गई है। यहां 10 से ज्यादा डॉक्टर और 10 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर काम कर रहे हैं।
ये टीमें दुर्गम बस्तियों में जाकर सर्वे कर रही हैं। जहां भी बुखार, चकते या मौत की सूचना मिलती है, वहां तुरंत स्वास्थ्य टीम भेजी जा रही है। इससे समय पर इलाज मिल पा रहा है।
टीमें सिर्फ बुखार ही नहीं देख रहीं। मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और दूसरी बीमारियों की भी जांच हो रही है। इससे बच्चों की पूरी सेहत का आकलन हो रहा है।
केंद्र सरकार ने 12 अगस्त को एक विशेषज्ञ टीम भी बालाघाट भेजी थी। आईसीएमआर यानी ICMR (Indian Council of Medical Research) और मेडिकल कॉलेज की टीमें भी यहां काम कर रही हैं। अब तक 32,433 लोगों की मेडिकल जांच हो चुकी है।
दस्तक-2026 अभियान के तहत भी बड़ा काम हुआ है। इस अभियान में 1.58 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। यह अभियान बच्चों की बीमारियों को समय पर पकड़ने के लिए चलाया जाता है।
अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति
प्रभावित इलाकों में अब तक 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 379 बच्चे ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। बाकी 52 बच्चे अभी भर्ती हैं।
मौत की वजह जानने के लिए सरकार ने समीक्षा भी की है। उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की गई है। इसमें खसरा, मलेरिया, दोनों बीमारियों का एक साथ संक्रमण सामने आया है।
इसके अलावा कुपोषण, डिहाइड्रेशन और शॉक जैसी अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याएं भी मिली हैं। इन सभी वजहों से बच्चों की हालत गंभीर हुई। समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि कई समस्याएं एक साथ जुड़ी थीं।
खसरे से बचाव के लिए अतिरिक्त टीका
खसरे के खतरे को देखते हुए बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया गया है। एक से 10 साल की उम्र के 14 हजार 637 बच्चों को अतिरिक्त टीका दिया गया है। यह मीजल्स रूबेला यानी MR (Measles Rubella) टीका है।
संक्रमण रोकने के लिए 600 से ज्यादा प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा चार हजार 338 घरों में कीटनाशक का छिड़काव किया गया है। इससे मच्छरों और संक्रमण फैलने का खतरा कम होगा।
अस्थायी अस्पताल और राहत के इंतजाम
मरीजों के इलाज के लिए सगुंडा स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। यहां अतिरिक्त बेड, दवा और डॉक्टर की व्यवस्था की गई है। इससे मरीजों को तुरंत इलाज मिल रहा है।
कुकड़ेला इलाके में एक अस्थायी अस्पताल भी शुरू किया गया है। गंभीर मरीजों को बड़े अस्पताल तक पहुंचाने के लिए वाहन की सुविधा भी बढ़ाई गई है। इससे रेफर करने में देरी नहीं होगी।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मौत की खबर बेहद पीड़ादायक है।
राहुल गांधी ने कहा कि पीने के पानी, पोषण और समय पर इलाज की कमी बच्चों की जान ले रही है। उन्होंने इसे सरकार की पूरी विफलता बताया है।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद इस मामले का समाधान करें। उन्होंने क्षेत्र में तुरंत जांच, इलाज और राहत देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की जिंदगी से समझौता नहीं हो सकता।
गौरतलब है कि रिपोर्ट में मौतों की संख्या 19 बताई गई है, जबकि राहुल गांधी के बयान में यह आंकड़ा 30 है। इस अंतर पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
फिलहाल सरकार का पूरा जोर प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने पर है। स्क्रीनिंग और इलाज का काम लगातार जारी है। आने वाले दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
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