दागी को प्रभार दिया तो नपेंगे एसपी, जा सकती है कप्तानी
Amresh Kushwaha | Sept 05, 2026, 12:11 IST
दागी को प्रभार दिया तो नपेंगे एसपी
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने रिव्यू डीपीसी के बाद 157 एएसआई को एसआई पद पर प्रमोट किया। इसमें 5 रिटायर्ड कर्मी भी शामिल हैं। दागी कर्मियों को प्रभार देने पर अब एसपी जिम्मेदार होंगे।
समझें क्या है पूरा मामला...
- पुलिस मुख्यालय ने रिव्यू डीपीसी के बाद बड़ा आदेश जारी किया है।
- 157 सहायक उपनिरीक्षकों को सब-इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन मिला है।
- इनमें 5 ऐसे कर्मी भी हैं जो पहले ही रिटायर हो चुके हैं।
- दागी कर्मियों को प्रभार देने पर अब एसपी जिम्मेदार माने जाएंगे।
- सभी प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।
रिटायर्ड कर्मियों को भी मिला हक
इनमें जबलपुर के कृष्ण कुमार शुक्ला और भिंड के विनिश्वर दयाल शामिल हैं। छतरपुर के छोटू लाल पटेल और रीवा के अशोक कुमार मिश्रा का नाम भी सूची में है। भोपाल के गणपत सिंह भी इसी सूची में शामिल हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि इन्हें पात्रता तिथि पर सेवा में मानते हुए काल्पनिक प्रमोशन तिथि दी गई है। इनका अंतिम मूल वेतन उसी पद के अनुसार तय होगा। इससे इन्हें पेंशन में फायदा मिलेगा।
ग्रेच्युटी और अवकाश एनकैशमेंट में भी बढ़ा हुआ आर्थिक लाभ मिलेगा। यह फैसला रिटायर्ड कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। डीआईजी (कार्मिक) यानी डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (Deputy Inspector General) रियाज इकबाल ने यह आदेश जारी किया है।
दागी को प्रभार दिया तो नपेंगे एसपी
इसका मतलब साफ है। यदि किसी दागी कर्मी को नई पोस्टिंग पर प्रभार दे दिया जाता है तो जिम्मेदारी सीधे संबंधित एसपी यानी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (Superintendent of Police) या यूनिट प्रमुख की होगी।
यानी अब हर जिले के कप्तान को खुद फाइल जांचनी होगी। यदि लापरवाही सामने आई तो गाज सीधे एसपी पर गिर सकती है। यह नियम पुलिस महकमे में जवाबदेही तय करने के लिए बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी सभी पदोन्नतियां
इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। यदि वहां से फैसला मौजूदा प्रमोशन के विपरीत आता है तो बड़ा बदलाव हो सकता है। इससे वरीयता सूची में फेरबदल की संभावना अभी भी बनी हुई है। इसलिए प्रमोट हुए कर्मियों के लिए यह राहत फिलहाल पूरी तरह स्थायी नहीं मानी जा रही है।
बालाघाट से 79 पुलिसकर्मियों का तबादला
तबादला होने वालों में 74 आरक्षक शामिल हैं। इसके अलावा चार कार्यवाहक प्रधान आरक्षक और एक प्रधान आरक्षक भी सूची में हैं। इन सभी को भोपाल सहित कई अलग-अलग जिलों में भेजा गया है।
खास बात यह है कि यह तबादला कर्मियों के अपने खर्च पर होगा। यानी उन्हें यात्रा भत्ता या स्थानांतरण भत्ता नहीं मिलेगा। इसके पीछे विभाग ने चार शर्तें तय की हैं।
तबादले की चार जरूरी शर्तें
यदि इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं होती तो उस कर्मी की रवानगी रोक दी जाएगी। इस तरह पुलिस मुख्यालय ने प्रमोशन और तबादला दोनों मामलों में सख्ती के साथ नियमों का पालन सुनिश्चित किया है।
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