जबलपुर बैंक ऑफ महाराष्ट्र फर्जीवाड़ा: पूर्व ब्रांच मैनेजर पर लाखों के गबन का आरोप
समझें क्या है पूरा मामला
- बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व शाखा प्रबंधक पर छह लाख रुपए से ज्यादा के गबन का आरोप है।
- जांच में कर्मचारियों की लॉगिन आईडी के गलत इस्तेमाल की बात सामने आई।
- स्व-सहायता समूहों के खातों से रकम पत्नी के खाते में भेजने का आरोप है।
- फर्जी बैंक खाता खोलकर एटीएम और मोबाइल बैंकिंग से भी रकम निकाली गई।
- EOW ने जांच के बाद धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज किया।
जबलपुर में बैंक अधिकारी पर EOW की बड़ी कार्रवाई
जबलपुर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बेनीखेड़ा शाखा से जुड़ा बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW ने शाखा के तत्कालीन प्रबंधक प्रीतम कुमार बेहरा के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जांच के अनुसार बैंक को छह लाख रुपए से ज्यादा की आर्थिक हानि पहुंची। आरोप है कि यह रकम अलग-अलग तरीकों से गलत तरीके से निकाली गई।
कैसे सामने आया पूरा मामला
इस मामले की शिकायत बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अंचल कार्यालय, जबलपुर की ओर से की गई। शिकायत के बाद भोपाल मुख्यालय के निर्देश पर विस्तृत जांच शुरू हुई। जांच की जिम्मेदारी EOW की निरीक्षक भूमेश्वरी चौहान को सौंपी गई। दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयान जांच का हिस्सा बने। इसके बाद कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं।
कर्मचारियों की लॉगिन आईडी का गलत इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल किया। इन आईडी से बैंकिंग लेनदेन किए गए। आरोप है कि नौ स्व-सहायता समूहों के खातों से कुल 4 लाख 21 हजार 108 रुपए ट्रांसफर किए गए। यह रकम आरोपी की पत्नी मोनालिसा बेहरा के खाते में भेजी गई। जांच एजेंसी का कहना है कि यह लेनदेन ग्राहकों की जानकारी के बिना हुआ।
फर्जी खाते से निकाली गई लाखों की रकम
जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया। आरोप है कि शाखा के एक आउटसोर्स कर्मचारी मनोज कुमार चक्रवर्ती के नाम पर बैंक खाता खोला गया। इसके बाद उसी खाते का एटीएम और मोबाइल बैंकिंग आरोपी ने अपने पास रखा। जांच के अनुसार इस खाते से 1 लाख 43 हजार 480 रुपए निकाले गए। यह रकम भी कथित तौर पर निजी इस्तेमाल में लाई गई।
लोक अदालत की राशि भी जमा नहीं हुई
जांच में लोक अदालत से जुड़ी रकम का मामला भी सामने आया। चार एनपीए खातों से रिकवरी के दौरान 38 हजार रुपए नकद मिले थे। आरोप है कि यह रकम बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई। जांच एजेंसी का दावा है कि पूरी राशि आरोपी ने अपने पास रख ली। इस पहलू को भी केस का अहम हिस्सा बनाया गया है।
जांच में रिकॉर्ड से गायब मिले दस्तावेज
EOW की जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड की भी जांच हुई। कई लेनदेन से जुड़े जरूरी वाउचर रिकॉर्ड में नहीं मिले। जांच टीम ने गवाहों के बयान भी दर्ज किए। बैंक कर्मचारियों ने कई अहम जानकारियां साझा कीं। इन तथ्यों के आधार पर अनधिकृत लेनदेन की पुष्टि होने का दावा किया गया।
कब हुआ पूरा फर्जीवाड़ा
जांच के अनुसार यह पूरा मामला 14 दिसंबर 2024 से 7 फरवरी 2025 के बीच का है। इसी अवधि में अलग-अलग तरीकों से कथित गड़बड़ियां की गईं। जांच एजेंसी ने इन सभी घटनाओं को दस्तावेजों से जोड़कर देखा। इसके बाद आपराधिक मामला दर्ज करने का फैसला लिया गया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस
EOW जबलपुर ने आरोपी प्रीतम कुमार बेहरा के खिलाफ अपराध क्रमांक 87/2026 दर्ज किया है। केस भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316(5) और 318(4) में दर्ज हुआ है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संशोधित धाराएं 7(सी), 13(1)(ए) और 13(2) भी लगाई गई हैं। बिना नंबर की एफआईआर आगे की प्रक्रिया के लिए मुख्यालय भोपाल भेजी गई है।
प्रीतम कुमार बेहरा बना आरोपी
जांच रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी प्रीतम कुमार बेहरा का मूल निवास पुरी, ओडिशा में है। वर्तमान में वह गढ़ा, जबलपुर में रह रहा है। मामला दर्ज होने के बाद EOW ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब पूरे वित्तीय लेनदेन की कड़ी भी खंगाल रही है।
यह मामला बैंकिंग व्यवस्था में आंतरिक निगरानी की अहमियत दिखाता है। कर्मचारियों की लॉगिन आईडी का गलत इस्तेमाल बड़ा सुरक्षा जोखिम माना जाता है। ऐसे मामलों में डिजिटल निगरानी और रिकॉर्ड की सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। जांच आगे बढ़ने पर नए तथ्य भी सामने आ सकते हैं।
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