भागीरथपुरा रहवासियों का आरोप: 50 से ज्यादा मौतें, शमशान का रजिस्टर छिपाया, मुआवजा अभी भी तय नहीं

Sanjay Gupta | Jan 19, 2026, 15:16 IST
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भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सच आखिर क्या है। जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट में पहले चार मौतें मानीं, फिर अगली सुनवाई में डेथ ऑडिट के आधार पर 15 मौतें स्वीकार कीं। वहीं अब तक 23 मौतें हो चुकी हैं। वहीं, रहवासियों का आरोप कुछ अलग ही आंकड़ा बता रहा है।

News In Short

  • भागीरथपुरा में दूषित पानी के चलते अस्पताल में 447 मरीज भर्ती हो चुके हैं।
  • इनमें से 432 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं और 15 अभी भर्ती हैं, जिनमें 6 आईसीयू में हैं।
  • अब तक 23 मौतें दर्ज हो चुकी हैं, 24वीं मौत पर प्रशासन ने खंडन किया है।
  • प्रशासन 21 पीड़ितों के परिजनों को राहत राशि के तौर पर 2-2 लाख रुपए दे चुका है।
  • राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान 50 से ज्यादा मौतों के आरोप लगाए गए हैं।

News In Detail

INDORE. भागीरथपुरा में मौतों का सच क्या है। क्या मौतें छिपाई जा रही हैं। जब इंदौर में 15 मौतें हो चुकी थीं, तब प्रशासन केवल 4 मौतें ही मान रहा था। बाद में दबाव के चलते डेथ ऑडिट कराया गया। इसमें कुल 21 मौतों का एनालिसिस किया गया है। इसमें से 15 मौतों का कारण डायरिया माना गया है। इस मामले में 20 जनवरी को हाईकोर्ट में फिर सुनवाई होना है।



लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात की थी। इस मुलाकत के बाद इस बातचीत का 8 मिनट का वीडियो जारी किया गया है। इसमें रहवासियों और पीड़ितों ने साफ आरोप लगाए हैं कि मौतें छिपाई गई हैं।



राहुल गांधी के सामने रहवासियों ने लगाए ये आरोप

रहवासियों ने राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान कहा कि भागीरथपुरा शमशान बन गया है। लोग 22 दिसंबर से ही बीमार होने लगे थे। पानी की शिकायतें तो पिछले 6 महीनों से हो रही थीं। वहीं, जब 200 से 250 लोग अस्पतालों में पहुंचे, तब जाकर प्रशासन ने संज्ञान लिया है।



रहवासियों ने आरोप लगाया कि मौतें छिपाई जा रही हैं। साथ ही, 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। लाशों को उनके गांव चुपचाप पहुंचा दिया गया है। शमशान घाट का रजिस्टर 28 दिसंबर को ही गायब कर दिया गया, ताकि मौतों का सही आंकड़ा सामने न आ सके। पीड़ितों ने कहा कि उन्हें सिर्फ साफ पानी चाहिए।



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3-3 हजार रुपए कनेक्शन के लिए लिए गए थे

रहवासियों ने यह भी बताया कि पिछले साल लाइन बदलने पर नल कनेक्शन के लिए उनसे 3-3 हजार रुपए लिए गए थे। इसके बावजूद साफ पानी नहीं मिला। लोग गरीब और मध्यमवर्गीय हैं, कब तक टैंकर मंगवाकर पानी पिएंगे।



उनकी बस एक ही मांग है कि उन्हें साफ पानी मिले। रहवासियों ने आरोप लगाया कि इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई और केवल दिखावटी कदम उठाए गए हैं।



डेथ ऑडिट में 21 मौतों पर यह रिपोर्ट

डेथ ऑडिट के तहत 12 जनवरी तक हुई 21 मौतों का एनालिसिस किया गया था। इन्हें अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है।



ये 6 मौतें सीएमएचओ के जरिए महामारी से घोषित की गईं

उर्मिला, तारा, नंदलाल, हीरालाल, अरविंद और पांच माह का अव्ययान



ये 3 मौतें महामारी से जुड़ी संभावित मानी गईं

गीता, उमा कोरी, गोमती और श्रवण



अस्पताल पहुंचने से पहले हुई 4 मौतें भी संभावित मानी गईं

सीमा, जीवन, रामकली और हरकुबाई



दो मौतें महामारी से पहले हुईं

सुमित्रा और संतोष (प्रशासन महामारी 24 दिसंबर से मान रहा है)



इन 2 मौतों को महामारी से नहीं जोड़ा गया

कमला पति तुलसीराम और सुनीता पति सतीश



चार मौतें महामारी से नहीं मानी गईं

अशोक, शंकरलाल, कमला और सुनिता



एक मौत संदिग्ध मानी गई

मंजुला, जिसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं



कुल मौतें- 23

सुमित्रा देवी, अशोकलाल पंवार, गोमती रावत, उर्मिला यादव, जीवनलाल बरेड़े, सीमा प्रजापत, संतोष बिगोलिया, अव्ययान साहू, श्रवण खुपराव, रामकली, नंदलाल, उमा कोरी, मंजुला वाढ़े, ताराबाई, हीरालाल, अरविंद लिखर, गीताबाई, हरकुंवर बाई, शंकर भाया, ओमप्रकाश शर्मा, सुनीता वर्मा और भगवानदास।



सुभद्राबाई की मौत 15 जनवरी को हुई थी। इसमें प्रशासन ने खंडन किया कि डायरिया से इस मौत का कोई संबंध नहीं है। यदि इस मौत को जोड़ें तो आंकड़ा 24 हो जाता है।



मुआवजा अब तक नहीं, केवल राहत राशि दी गई

अब तक प्रशासन द्वारा मुआवजा राशि नहीं दी गई है। जिन 21 परिजनों को दो-दो लाख रुपए दिए गए हैं। इसे राहत राशि कहा गया है। शासकीय नियमों के तहत मुआवजा राशि न्यूनतम चार लाख रुपए होती है। ऐसे में अभी तक मुआवजा राशि तय नहीं की गई है।



कांग्रेस एक-एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग कर रही है। वहीं राहुल गांधी ने कांग्रेस की ओर से 1-1 लाख रुपए के चेक पीड़ितों को दिए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 50-50 हजार रुपए की सहायता दी है। इस तरह कांग्रेस की ओर से कुल 1.5-1.5 लाख रुपए की सहायता दी गई है।



हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं में भी उचित मुआवजे की मांग उठाई गई है। यह राहत राशि भी जिला प्रशासन के जरिए रेडक्रॉस से दी गई है। शासन की ओर से भोपाल से इस मद में कोई राशि जारी नहीं की गई है।



इसी तरह उपचार भुगतान के लिए भी शासन स्तर से कोई फंड जारी नहीं हुआ है। कुल 447 मरीजों के उपचार का भुगतान किया जाना है। इसकी राशि करीब तीन करोड़ रुपए संभावित है।



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