भावांतर पर मंत्री करण सिंह वर्मा के तर्कों से भड़के सीएम मोहन यादव, बोले- व्यापारी कम में खरीद करेंगे तो आप क्या करेंगे?
मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना की राशि को मंजूरी दी है। मंगलवार, 15 अक्टूबर को हुई मोहन कैबिनेट बैठक में इस योजना की राशि तय की गई। लेकिन इस दौरान एमपी के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सोयाबीनकी कीमत को लेकर अपनी चिंता जताई। इससे मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) भड़क उठे।
राजस्व मंत्री बोले- क्या होगा यदि कीमत 4000 रुपए हो?
एमपी राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कैबिनेट बैठक के दौरान कहा कि सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल है। बाजार में यह 4000 रुपए प्रति क्विंटल बिकती है, तो किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार सिर्फ 800 रुपए प्रति क्विंटल भावांतर (Price difference) का भुगतान करेगी। इससे किसानों को 500 रुपए का नुकसान होगा, क्योंकि समर्थन मूल्य के मुकाबले बाजार मूल्य में 1328 रुपए का अंतर होगा।
सीएम बोले- क्या आप गलत खरीद को नहीं रोकेंगे?
भावांतर योजना किसानों के लिए है
वर्मा की चिंताओं के बाद मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि भावांतर योजना का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ किसानों के लाभ के लिए है। इसके तहत किसानों को किसी भी तरह के घाटे से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला (Deputy CM Rajendra Shukla) ने कहा कि यदि सोयाबीन मॉडल रेट (Model rate) से कम कीमत पर बिकता है, तो वह गुणवत्ता (Quality) के मानकों (FAQ) के अनुरूप नहीं होगा। यदि सोयाबीन गुणवत्ता मानकों (FAQ) के अनुरूप होगा, तो उसकी कीमत कम नहीं होगी।
किसानों के लिए क्या बदलाव होगा?
इस योजना का उद्देश्य किसानों को सोयाबीन की फसल का उचित मूल्य दिलाना है, ताकि उन्हें किसी तरह के नुकसान का सामना न करना पड़े। हालांकि, इस योजना को लेकर कुछ मंत्री और अधिकारी सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सीएम मोहन यादव ने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यापारी कीमतों में अनियमितता करेगा, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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