भोपाल में पानी के बिल की वसूली निजी एजेंसियों के हाथों में! बढ़ी नाराजगी, कांग्रेस ने उठाए सवाल
पानी के बिल की वसूली पर सियासत गरमाई
भोपाल में पानी के बिल की वसूली को लेकर राजनीति गरमा गई है। मामला केवल जलकर वसूली (water tax) का नहीं है। यह नगर निगम की जिम्मेदारी और नागरिकों के अधिकारों से भी जुड़ा है। शहर में जलापूर्ति और बिलिंग की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। अब जलकर वसूली में निजी एजेंसियों की भूमिका बढ़ाने की तैयारी है। इस प्रस्ताव से कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या निजी एजेंसी से वसूली आसान होगी? या फिर उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ेगी?
निजी एजेंसी की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
भोपाल नगर निगम (Bhopal Municipal Corporation) के पास जलकर वसूली का अपना प्रशासनिक ढांचा है। इसके बावजूद निजी एजेंसी की जरूरत क्यों महसूस हुई? प्रस्ताव की समीक्षा में यह सवाल महत्वपूर्ण है। क्या निगम के मौजूदा कर्मचारी वसूली नहीं कर पा रहे हैं? क्या बकाया जलकर की राशि लगातार बढ़ रही है? यदि ऐसा है तो कुल बकाया कितना है? किन कॉलोनियों में वसूली की समस्या ज्यादा है? इन सवालों के जवाब के लिए निगम के आधिकारिक आंकड़े सामने आने चाहिए।
कांग्रेस का आरोप निगम अपनी जिम्मेदारी क्यों छोड़े?
कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने निजी एजेंसियों से जलकर वसूली कराने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बकायादारों के घर निजी एजेंट भेजने की तैयारी है। कांग्रेस ने मेयर इन काउंसिल में प्रस्ताव पारित होने पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी की मांग है कि जलकर वसूली नगर निगम खुद करे। व्यवस्था नहीं बदलने पर कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी है। हालांकि निजी एजेंसी को कितने अधिकार मिलेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए परिषद के निर्णय और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा जरूरी होगी।
हर कॉलोनी में लागू नहीं होगी व्यवस्था
महापौर मालती राय ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उनके मुताबिक यह प्रस्ताव पूरे भोपाल के लिए नहीं है। यह केवल बल्क जल कनेक्शन वाली कॉलोनियों से संबंधित है। इन कॉलोनियों की रहवासी समितियों को वसूली और प्रबंधन में परेशानी हो रही है। महापौर का दावा है कि यह व्यवस्था स्वैच्छिक होगी। संबंधित समिति की सहमति के बिना निजी एजेंसी को काम नहीं सौंपा जाएगा। हालांकि इस व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल अब भी बने हुए हैं। समिति की सहमति लेने की लिखित प्रक्रिया क्या होगी? किसी व्यक्तिगत उपभोक्ता की आपत्ति कैसे सुनी जाएगी?
करोड़ों की जलापूर्ति व्यवस्था, फिर वसूली पर विवाद क्यों?
भाजपा पक्ष का तर्क है कि सरकार ने नर्मदा जल परियोजना पर करोड़ों रुपए खर्च किए। इसी परियोजना के जरिए भोपाल में जलापूर्ति की व्यवस्था विकसित की गई है। जलापूर्ति के साथ जलकर की वसूली भी जरूरी है। जलापूर्ति व्यवस्था चलाने के लिए राजस्व की आवश्यकता होती है। हालांकि राजस्व संग्रह और उसकी निगरानी दो अलग जिम्मेदारियां हैं। निजी एजेंसी वसूली करेगी तो उसे कितना भुगतान मिलेगा? क्या भुगतान तय शुल्क के आधार पर होगा? या फिर यह वसूली गई राशि पर निर्भर करेगा? इन सभी सवालों से जुड़ी शर्तें सार्वजनिक होनी चाहिए।
निजी एजेंट घर पहुंचा तो नागरिक के अधिकार क्या होंगे?
यह इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू है। क्या निजी एजेंसी को केवल भुगतान संग्रह करने का अधिकार मिलेगा? या फिर बकाया राशि पर नोटिस देने की जिम्मेदारी भी होगी? गलत बिल या दोहरी वसूली की शिकायत कहां दर्ज होगी? भुगतान की रसीद नहीं मिलने पर उपभोक्ता किससे शिकायत करेगा?
कानूनी दृष्टि से निजी एजेंसी की नियुक्ति से निगम की वैधानिक जिम्मेदारियां स्वतः समाप्त नहीं होतीं। एजेंसी के अधिकार संबंधित नियमों और अनुबंध पर निर्भर करेंगे। उपभोक्ता संरक्षण और शिकायत निवारण की व्यवस्था भी इन्हीं से तय होगी। इसलिए एजेंसी की पहचान और अधिकृत भुगतान माध्यम की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। शिकायत अधिकारी का विवरण भी उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
क्या नगर निगम प्रस्ताव सार्वजनिक करेगा?
इस विवाद को केवल भाजपा-कांग्रेस की बयानबाजी तक सीमित रखना उचित नहीं होगा। नगर निगम को प्रस्ताव की प्रति और एजेंसी चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए। सेवा शुल्क और सहमति के प्रारूप की जानकारी भी सामने आनी चाहिए। शिकायत निवारण की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।
यदि व्यवस्था रहवासी समितियों की मांग पर बनी है तो संबंधित दस्तावेज सामने आने चाहिए। समितियों की मांगों और निर्णय प्रक्रिया की जानकारी से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। सबसे बड़ा सवाल अब भी जवाबदेही का है। जलकर वसूली नगर निगम करे या निजी एजेंसी। गलत वसूली और उपभोक्ता उत्पीड़न की शिकायत पर अंतिम जवाबदेही कौन लेगा?