भोपाल की लोअर लेक में अवैध निर्माण और सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, चार सप्ताह में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
लोअर लेक मामले में NGT ने क्या कहा?
15 अक्टूबर 2026 को एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में सुनवाई हुई। यह मामला मूल आवेदन क्रमांक 58/2026 (CZ) से जुड़ा है। इसमें राशिद नूर खान ने भोपाल कलेक्टर सहित अन्य को पक्षकार बनाया है।
सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। पीठ ने संबंधित विभागों को पर्यावरण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नगर निगम ने निर्माण को बताया मरम्मत
आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। उन्होंने झील क्षेत्र में कथित अवैध और अनधिकृत निर्माण का मुद्दा उठाया।
नगर निगम की ओर से बताया गया कि संबंधित कार्य मौजूदा संरचनाओं की मरम्मत से जुड़े हैं। इस पर ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए।
एनजीटी ने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध या अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। वेटलैंड संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है।
ट्रिब्यूनल ने वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के नियम 4 का उल्लेख किया। साथ ही इन प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
झील में सीवेज मिलने पर भी सवाल
सुनवाई में लोअर लेक के जल प्रदूषण का मुद्दा भी सामने आया। झील में बिना उपचारित सीवेज का पानी पहुंचने को लेकर चिंता जताई गई।
नगर निगम ने बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत काम चल रहा है। इसके अंतर्गत नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन का कार्य प्रगति पर है।
इसका उद्देश्य नालों से आने वाले गंदे पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना है। इससे झील में बिना उपचारित सीवेज पहुंचने से रोकने में मदद मिल सकती है।
एनजीटी ने नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए हैं। दोनों विभागों को सीवेज का प्रवाह रोकने के लिए उठाए गए कदम बताने होंगे।
नालों के डायवर्जन की प्रगति की जानकारी भी देनी होगी। इसके लिए चार सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर नाराजगी
लोअर लेक (Bhopal Lower Lake) के आसपास पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का मामला भी उठाया गया। शिकायत में जहरीले रसायनों के जरिए पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
कुछ पेड़ों की मृत्यु का मुद्दा भी ट्रिब्यूनल के सामने रखा गया। इस मामले में संबंधित विभागों से पहले कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई थी।
हालांकि, वन विभाग, नगर निगम और ट्री ऑफिसर ने कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की थी। इस पर एनजीटी की पीठ ने नाराजगी जताई।
ट्रिब्यूनल ने संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसमें पेड़ों को हुए नुकसान की जानकारी देनी होगी।
इसके अलावा वृक्ष कटाई की अनुमति से जुड़े रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करने होंगे। प्रतिपूरक वनीकरण के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।
भोज वेटलैंड का संरक्षण क्यों जरूरी?
भोपाल का भोज वेटलैंड अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर स्थल है। इसमें अपर लेक और लोअर लेक शामिल हैं। इन दोनों झीलों का पर्यावरण और जल संरक्षण की दृष्टि से विशेष महत्व है।
लोअर लेक की जल गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। झील के आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र भी इसके संरक्षण से जुड़ा है।
झील में बिना उपचारित सीवेज पहुंचने से जल प्रदूषण का खतरा बढ़ता है। वहीं, प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण से पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
पेड़ों को नुकसान पहुंचने से भी स्थानीय पर्यावरण प्रभावित हो सकता है। इसी कारण वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं।
वेटलैंड नियम 2017 क्या हैं?
केंद्र सरकार ने वेटलैंड के संरक्षण और प्रबंधन के लिए वर्ष 2017 में नियम बनाए थे। इनका उद्देश्य महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि क्षेत्रों को नुकसान से बचाना है।
इन नियमों के तहत अधिसूचित वेटलैंड में कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू होते हैं। इनमें बिना उपचारित अपशिष्ट जल छोड़ने जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।
नियम 4 में प्रतिबंधित गतिविधियों से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को इनका पालन सुनिश्चित करना होता है।
लोअर लेक मामले में एनजीटी ने इसी नियम का उल्लेख किया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
चार सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
एनजीटी ने संबंधित विभागों को चार सप्ताह का समय दिया है। इस दौरान अधिकारियों को कार्रवाई और अनुपालन से जुड़ी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सीवेज नियंत्रण की जानकारी देनी होगी। नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन की प्रगति भी बतानी होगी।
वहीं, वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को पेड़ों से जुड़े मामलों की रिपोर्ट देनी होगी। इसमें नुकसान, वृक्ष कटाई की अनुमति और प्रतिपूरक वनीकरण की जानकारी शामिल होगी।
ट्रिब्यूनल ने पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की बताई है।
अब 21 दिसंबर को अगली सुनवाई
लोअर लेक से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अगली सुनवाई से पहले संबंधित विभागों को निर्देशों के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इन रिपोर्टों के आधार पर ट्रिब्यूनल आगे मामले की समीक्षा करेगा।
फिलहाल अवैध निर्माण, सीवेज प्रदूषण और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर विभागीय कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। संबंधित विभागों की रिपोर्ट से पता चलेगा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।