राजस्थान की नदियों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: लूनी, बांडी और जोजरी क्षेत्र में नई औद्योगिक इकाइयों पर रोक

Jageshwar Prasad | Nov 07, 2026, 13:17 IST
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लूनी नदी प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बजरी खनन पर SIT गठन का आदेश दिया, 100 मीटर सुरक्षा क्षेत्र बरकरार
लूनी नदी प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बजरी खनन पर SIT गठन का आदेश दिया, 100 मीटर सुरक्षा क्षेत्र बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में लूनी, बांडी और जोजरी नदी तंत्र के प्रदूषण और अवैध बजरी खनन पर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने लूनी नदी प्रदूषण से जुड़े स्वतः (Suo Motu) संज्ञान मामले में सुनवाई की। अदालत ने नदी क्षेत्रों के आसपास नए औद्योगिक प्रतिष्ठानों की स्थापना पर रोक लगाई है।

नदी तंत्र की स्थिति को लेकर अदालत पहले भी सख्त टिप्पणी कर चुकी है। इस बार की सुनवाई में अवैध खनन और उद्योगों के नियमन पर सीधे सवाल उठाए गए हैं।

राजस्थान में अवैध खनन और प्रदूषण पर SC सख्त: CBI जांच की चेतावनी, 20 लाख लोगों की जिंदगी दांव पर | SC strict on illegal mining and pollution in Rajasthan: CBI investigation warning, lives of 20 lakh people at stake
राजस्थान में अवैध खनन और प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार को CBI जांच की चेतावनी
26 Oct 2026 ,
By Mukesh Sharma
सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी-लूनी-बांडी नदी क्षेत्र में अवैध खनन को नियमित करने और सांगानेर में बिना एनओसी चल रहे उद्योगों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि सुधार न होने पर सीबीआई जांच कराई जाएगी और राज्य सरकार को जेडएलडी प्लांट्स के लिए वित्तीय प्रस्ताव देने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी-लूनी-बांडी नदी क्षेत्र में अवैध खनन को नियमित करने और सांगानेर में बिना एनओसी चल रहे उद्योगों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि सुधार न होने पर सीबीआई जांच कराई जाएगी और राज्य सरकार को जेडएलडी प्लांट्स के लिए वित्तीय प्रस्ताव देने को कहा है।

SIT का गठन और मिलीभगत की जांच

सूत्रों के अनुसार अदालत ने अवैध बजरी खनन के संगठित नेटवर्क की जांच के लिए तीन दिन में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। इसमें इस नेटवर्क में शामिल लोगों, लाभार्थियों और सरकारी अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जांच होगी।

SIT का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक स्तर का अधिकारी करेगा। सूत्रों के अनुसार जोधपुर, बालोतरा और पाली के पुलिस अधीक्षकों के इसमें शामिल किया जाएगा।

खनन पट्टे पर अदालत की टिप्पणी

अदालत ने साफ कहा कि अवैध खनन वाले क्षेत्रों में बाद में पट्टा जारी होने से पहले की अवैध गतिविधियों को वैधता नहीं मिल सकती। पीठ ने ये भी कहा कि खनन पट्टा प्रक्रिया के अनुसार जारी होना और खनन का पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना, दो अलग जरूरतें हैं।

नदी की सीमा से छेड़छाड़ नहीं

जल संसाधन विभाग ने सीवेज और उपचारित गंदे पानी के प्रवाह के आधार पर नदियों की चौड़ाई और सीमाएं नए सिरे से तय करने की कवायद की थी। अदालत ने इसे गलत ठहराया।

पीठ के अनुसार नदी की भौगोलिक सीमा और प्राकृतिक स्वरूप का निर्धारण उसमें बहने वाले सीवेज की मात्रा से नहीं किया जा सकता।

100 मीटर का सुरक्षा क्षेत्र और 500 मीटर की रोक

सूत्रों के अनुसार अदालत ने नदी की दर्ज बाहरी सीमाओं के दोनों ओर 100 मीटर अतिरिक्त सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने को कहा है। इन सीमाओं से 500 मीटर के भीतर लाल श्रेणी के उद्योग नहीं लगेंगे। हाई फ्लड लाइन और सुरक्षा क्षेत्र का वैज्ञानिक निर्धारण होने तक नदी क्षेत्र के पास नए औद्योगिक प्रतिष्ठानों की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।

बालोतरा में खनन और उद्योगों पर सवाल

सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट में बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील के कनाना गांव का जिक्र है। वहां कई खनन भूखंडों के सामूहिक पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन जरूरी बताया गया है। तीन भूखंडों में खनन शुरू हो चुका है, जबकि दो के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति लंबित है। समिति ने इन दो भूखंडों को स्वीकृति न देने की सिफारिश की है।

पीठ ने जोधपुर, पाली और बालोतरा के औद्योगिक क्षेत्रों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और शून्य तरल अपशिष्ट उत्सर्जन (ZLD) व्यवस्था की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई है।

भूजल की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी

अदालत ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को पक्षकार बनाने और जोधपुर, बालोतरा व पाली जिलों में भूजल की उपलब्धता, दोहन और गिरावट पर रिपोर्ट देने को कहा है। बालोतरा की गंभीर भूजल स्थिति पर राज्य सरकार से अलग शपथ पत्र भी मांगा गया है।

राज्य सरकार के लिए अगले निर्देश

अदालत ने राज्य सरकार को उद्योगों के लिए शून्य तरल अपशिष्ट उत्सर्जन संयंत्र लगाने के लिए वित्तीय सहायता नीति बनाने को कहा है। उपचारित पानी के पुन: उपयोग के लिए पाइपलाइन नेटवर्क तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह को न्याय मित्र नियुक्त किया गया है।
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