254 गांव और शहर की बदलेगी तस्वीर, जानें भोपाल मास्टर प्लान 2047 में क्या है खास
समझें क्या है पूरा मामला...
- नया मास्टर प्लान 2047 भोपाल का भविष्य तय करेगा।
- 45 लाख आबादी के लिए शहर का खाका तैयार हुआ।
- असीमित एफएआर की सुविधा अब भोपाल में मिलेगी।
- नए प्लान में हरित क्षेत्र 27 प्रतिशत करने की तैयारी है।
- मास्टर प्लान में गरीबों के लिए किराए के घर बनाने पर जोर है।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 का प्रारूप जारी हुआ है। यह योजना 1016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए बनी है। इसमें 254 गांव शामिल किए गए हैं। योजना 45 लाख अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें प्राकृतिक संरक्षण, आर्थिक विकास और आधुनिक सुविधाओं पर जोर दिया गया है।
भोपाल का दायरा अब पहले से बड़ा
भोपाल मास्टर प्लान 2047 में 1016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है। इसमें 254 गांव भी शामिल किए गए हैं। योजना करीब 45 लाख अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके मुकाबले 2005 की योजना में 601.06 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 146 गांव शामिल थे। यानी नई योजना में भोपाल के विकास का दायरा काफी बढ़ाया गया है। इसका असर शहर के आसपास के गांवों और नए विकसित होने वाले क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
चार मुख्य आधार स्तंभ...
यह योजना चार बड़े स्तंभों पर टिकी है-
- पहला स्तंभ: प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण।
- दूसरा स्तंभ: आधुनिक और नागरिक हितैषी नियोजन।
- तीसरा स्तंभ: सुधारोन्मुख और परिवर्तनकारी नियोजन है।
- चौथा स्तंभ: आत्मनिर्भर और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला विकास है।
भोजताल यानी बड़ी झील को रामसर साइट का दर्जा मिला है। योजना में इसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों के संरक्षण का ध्यान रखा गया है।
ग्रोथ कॉरिडोर और नई सिटी
शहर में 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित है। यह एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू और अन्य क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इसी कॉरिडोर में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी यानी ईकेएआई (EKAI – Education Knowledge Artificial Intelligence) सिटी भी बनेगी।
यह भौंरी के मौजूदा एजुकेशन हब को अपग्रेड करके बनाई जाएगी। यहां शिक्षा, अनुसंधान और एआई आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
इस क्षेत्र में लोक परिवहन के लिए बीआरटीएस (BRTS – Bus Rapid Transit System) कॉरिडोर प्रस्तावित है। भविष्य में इसे एमआरटीएस (MRTS – Mass Rapid Transit System) में बदला जा सकेगा।
यहां अस्पताल, होटल, बाजार, कार्यालय और शिक्षण संस्थान विकसित किए जा सकते हैं। ग्रोथ कॉरिडोर को शहर के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ने के लिए रेडियल मार्ग और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट की योजना भी प्रस्तावित है।
हरियाली बढ़ेगी, पार्किंग पर भी ध्यान
साल 2005 की योजना में हरित क्षेत्र लगभग 16 प्रतिशत था। नई योजना में इसे बढ़ाकर लगभग 27 प्रतिशत किया गया है। यह राष्ट्रीय मानक से भी ज्यादा है। सर्विस एरिया के लिए भी 2 प्रतिशत क्षेत्र रखने का प्रस्ताव है।
भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए यहां गोल्फ कोर्स प्रस्तावित है। कॉलोनी स्तर पर खुला क्षेत्र भी 10 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है।
मनोरंजन, खेलकूद, और सार्वजनिक व सांस्कृतिक गतिविधियों वाली जमीन के मालिकों के लिए हरित टीडीआर (TDR – Transferable Development Rights) का प्रावधान रखा गया है। इसी तरह हेरिटेज टीडीआर का प्रावधान भी दिया गया है।
पार्किंग के लिए मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। सामुदायिक खुले क्षेत्रों में पार्किंग और आरडब्ल्यूए द्वारा पार्किंग शुल्क लेने के प्रावधान का भी उल्लेख है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य शहर में हरियाली और पार्किंग व्यवस्था को बेहतर करना है।
जमीन उपयोग का पूरा गणित
योजना में कुल 61017.02 हेक्टेयर भूमि बांटी गई है। आवासीय उपयोग के लिए सबसे ज्यादा 26755.50 हेक्टेयर यानी 43.85 प्रतिशत जमीन रखी गई है।
हरित क्षेत्र के लिए 16489.94 हेक्टेयर यानी 27.01 प्रतिशत जमीन तय है। परिवहन के लिए 5793.82 हेक्टेयर और सार्वजनिक उपयोग के लिए 4887.97 हेक्टेयर जमीन रखी गई है।
वाणिज्यिक उपयोग के लिए 1348.97 हेक्टेयर और औद्योगिक उपयोग के लिए 2137.25 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित है। मिश्रित उपयोग के लिए 2448.84 हेक्टेयर जमीन तय की गई है।
मास्टर प्लान 2047 में ये भी...
झील, जंगल और पहाड़ों को बचाने पर जोर
नए मास्टर प्लान (Bhopal Master Plan 2047) में भोपाल के प्राकृतिक क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। इसमें बड़ा तालाब और उसके जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण की बात कही गई है। इसके अलावा पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबों और जलधाराओं को बचाने के प्रावधान हैं।
योजना का उद्देश्य विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना है। यानी शहर का विस्तार हो, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम रहे। इससे झीलों, हरियाली और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों के संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है।
घर और निर्माण के नियमों में बदलाव
नए प्रारूप में विकास से जुड़े नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव है। इसमें भूखंड कटौती को हटाने की बात कही गई है। इससे नागरिकों और विकासकर्ताओं के लिए डिजाइन के विकल्प बढ़ सकते हैं।
भवन के आसपास छोड़े जाने वाले खुले स्थान से जुड़े नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। सड़क की चौड़ाई के आधार पर एफएआर तय करने की व्यवस्था रखी गई है। एफएआर से तय होता है कि किसी भूखंड पर कितना निर्माण किया जा सकता है। भवन की ऊंचाई से जुड़े कुछ प्रतिबंध हटाने का भी प्रस्ताव है।
सुरक्षा से डिजिटल निगरानी तक नई व्यवस्था
मास्टर प्लान 2047 में शहर की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने का प्रस्ताव है। इसमें सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री को पारदर्शी रखने जैसे प्रावधान हैं। सुरक्षित यातायात व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
योजना की निगरानी के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे विकास योजना की वास्तविक समय में निगरानी और अनधिकृत निर्माण जैसी समस्याओं पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। शिक्षा और एआई आधारित गतिविधियों के लिए EKAI सिटी की परिकल्पना भी है।
FAQ
- भोपाल मास्टर प्लान 2047 किस क्षेत्र के लिए बनाई गई है?
भोपाल मास्टर प्लान 1016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए बनाई गई है। इसमें 254 गांव शामिल किए गए हैं। - भोपाल मास्टर प्लान 2047 में हरित क्षेत्र कितना रखा गया है?
भोपाल मास्टर प्लान में हरित क्षेत्र को बढ़ाकर लगभग 27 प्रतिशत किया गया है। पहले यह लगभग 16 प्रतिशत था। - भोपाल मास्टर प्लान में ईकेएआई सिटी क्या है?
भोपाल मास्टर प्लान में ईकेएआई सिटी भौंरी के एजुकेशन हब को अपग्रेड करके बनाई जाएगी। यह शिक्षा, अनुसंधान और एआई आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था पर आधारित होगी।
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