भोपाल मास्टर प्लान ड्रॉफ्ट को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, 30 साल का इंतजार खत्म
Jitendra Shrivastava | Sept 22, 2026, 19:15 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भोपाल के 21 साल से पेंडिंग मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दी। सीलिंग कार्रवाई पर कोर्ट ने 5 सख्त निर्देश जारी किए। सरकार ने अब कोई नई कमेटी न बनाने का आश्वासन दिया।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल मास्टर प्लान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है।
- सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने 5 सख्त निर्देश जारी किए हैं।
- मध्यप्रदेश सरकार बोली- अब कोई और कमेटी नहीं बनाएंगे।
- 1995 से भोपाल को कोई मास्टर प्लान नहीं मिला है।
- सुबह सील दुकानें शाम को खुलने से कोर्ट नाराज हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश...
- रहवासी इलाकों में किसी भी तरह की कमर्शियल गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
- सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहेगी।
- जिन इलाकों का लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या मिक्स्ड है, वहां भी कार्रवाई नहीं रुकेगी।
- रहवासी इलाकों में कार्रवाई किसी भी सूरत में नहीं रुकनी चाहिए।
कमेटी बनाने पर कोर्ट की नाराजगी
इसके बाद सरकार के वकील केएन नटराजन ने कोर्ट को बताया कि सरकार से बातचीत हो चुकी है। सरकार ने आश्वासन दिया कि अब कोई कमेटी नहीं बनेगी।
सीलिंग की कार्रवाई भी बाधित नहीं की जाएगी। कोर्ट ने यह आश्वासन स्वीकार कर लिया। फिलहाल कंटेंप्ट नहीं लगाया गया है, लेकिन लिखित आदेश में स्थिति साफ होगी।
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सुबह बंद, शाम को खुल रहीं दुकानें
कोर्ट ने माना कि भोपाल में निर्देशों का पूर्णतः पालन नहीं हो रहा है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने सख्ती से पालन करने का आदेश दोहराया।
1995 से नहीं आया नया मास्टर प्लान
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मास्टर प्लान को हरी झंडी दे दी। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया प्लान लागू होने तक सीलिंग कार्रवाई रुकेगी। इसका मतलब है कि मास्टर प्लान और सीलिंग, दोनों प्रक्रियाएं साथ-साथ चलती रहेंगी।
कैसे शुरू हुई सीलिंग की कार्रवाई
इसके बाद 3 दिन में 190 प्रतिष्ठान सील किए गए। लेकिन व्यापारी इसके विरोध में सड़क पर उतर आए, जिसके बाद कार्रवाई 22 दिन तक रुकी रही।
रहवासियों की प्रमुख मांगें
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