भोपाल मास्टर प्लान ड्रॉफ्ट को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, 30 साल का इंतजार खत्म
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल मास्टर प्लान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है।
- सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने 5 सख्त निर्देश जारी किए हैं।
- मध्यप्रदेश सरकार बोली- अब कोई और कमेटी नहीं बनाएंगे।
- 1995 से भोपाल को कोई मास्टर प्लान नहीं मिला है।
- सुबह सील दुकानें शाम को खुलने से कोर्ट नाराज हुआ।
भोपाल के 21 साल से पेंडिंग मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट अब सरकार जारी कर सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस पर हरी झंडी दे दी। साथ ही कोर्ट ने सीलिंग कार्रवाई को लेकर 5 सख्त निर्देश भी जारी किए। सरकार ने आश्वासन दिया कि अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। अगली सुनवाई 23 नवंबर को तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश...
- रहवासी इलाकों में किसी भी तरह की कमर्शियल गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
- सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहेगी।
- जिन इलाकों का लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या मिक्स्ड है, वहां भी कार्रवाई नहीं रुकेगी।
- रहवासी इलाकों में कार्रवाई किसी भी सूरत में नहीं रुकनी चाहिए।
इन निर्देशों से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
कमेटी बनाने पर कोर्ट की नाराजगी
मध्यप्रदेश सरकार ने पहले एक जांच कमेटी बनाई थी। इसे लेकर कंटेंप्ट का मामला बना था। कोर्ट के एमिकस क्युरी एके सिन्हा ने इसकी जांच की थी। सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि कमेटी बनाकर सरकार ने अदालत की अवमानना की।
इसके बाद सरकार के वकील केएन नटराजन ने कोर्ट को बताया कि सरकार से बातचीत हो चुकी है। सरकार ने आश्वासन दिया कि अब कोई कमेटी नहीं बनेगी।
सीलिंग की कार्रवाई भी बाधित नहीं की जाएगी। कोर्ट ने यह आश्वासन स्वीकार कर लिया। फिलहाल कंटेंप्ट नहीं लगाया गया है, लेकिन लिखित आदेश में स्थिति साफ होगी।
सुबह बंद, शाम को खुल रहीं दुकानें
एमिकस क्युरी एके सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि सुनवाई से पहले सुबह भोपाल के करीब 10 रहवासियों की शिकायतें मिलीं। इनमें बताया गया कि सील की गई कई दुकानें सुबह बंद रहती हैं, लेकिन शाम को खुल जाती हैं।
कोर्ट ने माना कि भोपाल में निर्देशों का पूर्णतः पालन नहीं हो रहा है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने सख्ती से पालन करने का आदेश दोहराया।
1995 से नहीं आया नया मास्टर प्लान
सरकार के वकील नटराजन ने कोर्ट को अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भोपाल में 1995 से कोई नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ। साल 2005 का मास्टर प्लान भी एक्सपायर हो चुका है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि नया मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट सरकार के पास तैयार है। अब इसे लागू करना बाकी है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मास्टर प्लान को हरी झंडी दे दी। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया प्लान लागू होने तक सीलिंग कार्रवाई रुकेगी। इसका मतलब है कि मास्टर प्लान और सीलिंग, दोनों प्रक्रियाएं साथ-साथ चलती रहेंगी।
कैसे शुरू हुई सीलिंग की कार्रवाई
5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्र में चल रहे प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजे थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने का दौर चला। कुल 62 हजार 500 लिस्टेड प्रतिष्ठानों में से 8084 को नोटिस मिले।
इसके बाद 3 दिन में 190 प्रतिष्ठान सील किए गए। लेकिन व्यापारी इसके विरोध में सड़क पर उतर आए, जिसके बाद कार्रवाई 22 दिन तक रुकी रही।
रहवासियों की प्रमुख मांगें
रहवासी चाहते हैं कि आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां पूरी तरह बंद हों। उनका कहना है कि इससे शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति भंग हो रही है। असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ने का भी डर है। बढ़ते ट्रैफिक से स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।
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