भोपाल मेट्रोपॉलिटन प्लान में 5 जिलों के 2523 गांव होंगे शामिल
News In Short
- भोपाल और इंदौर के लिए मेट्रोपॉलिटन एरिया सर्वे पूरा हो चुका है।
- भोपाल के विकास प्लान में 2523 गांव और 12 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल होगा।
- रायसेन, विदिशा, राजगढ़, सीहोर और नर्मदापुरम जिले भी भोपाल के प्लान में जुड़ेंगे।
- नगर निगम और नगर पालिकाओं के अधिकार पहले जैसे ही रहेंगे।
- जबलपुर और ग्वालियर के लिए भी मेट्रोपॉलिटन एरिया बनाने की तैयारी है।
News In Detail
भोपाल मेट्रोपॉलिटन प्लान क्या है?
भोपाल के मेट्रोपॉलिटन विकास प्लान में रायसेन, विदिशा, राजगढ़, सीहोर और नर्मदापुरम जिलों को शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे में चिह्नित क्षेत्रों को नगरीय विकास एवं आवास विभाग की मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचित (Notify) किया जाएगा। दोनों शहरों के विकास प्लान उनकी भौगोलिक और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए जाएंगे।
सरकार ने यह प्रोजेक्ट इसलिए शुरू किया है, क्योंकि बड़े शहरों के आसपास तेज शहरीकरण की वजह से अनियोजित और अव्यवस्थित विकास हो रहा था। सरकार का मकसद है कि दोनों शहरों और उनके आसपास के इलाकों का विकास सुनियोजित तरीके से हो।
नगर निगम के अधिकार रहेंगे सुरक्षित
एक अहम बात यह है कि मेट्रोपॉलिटन एरिया बन जाने के बाद भी नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के अधिकार वैसे ही रहेंगे। टैक्स वसूली, बिल्डिंग परमिशन और नियोजित क्षेत्रों से जुड़े काम स्थानीय निकाय ही करते रहेंगे।
मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी सिर्फ गैर-नियोजित क्षेत्रों में काम करेगी, वह भी केवल बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए। इससे आम लोगों के रोजमर्रा के कामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
मास्टर प्लान पर रोक क्यों?
भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान (Master Plan) फिलहाल रोके गए हैं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 24 फरवरी को विधानसभा में बताया था कि ये प्लान करीब डेढ़ साल पहले तैयार हो चुके थे, लेकिन अब इन्हें मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्रस्तावित प्लान के साथ मिलाकर फिर से देखा जाएगा या नए सिरे से तैयार किया जाएगा।
मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्लान को अंतिम रूप देने के बाद ही मास्टर प्लान को आगे बढ़ाया जाएगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि दोनों प्लान आपस में टकराएं नहीं।
एमपी में कब बना कानून?
मई 2025 में मध्यप्रदेश कैबिनेट ने मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट (MP Metropolitan Region Planning and Development Act), 2025 को मंजूरी दी। इसके बाद अगस्त 2025 में यह कानून एमपी विधानसभा में पारित हो गया। इस कानून के बाद ही सर्वे और नियोजन की प्रक्रिया को आधिकारिक आधार मिला।
जबलपुर और ग्वालियर की बारी
भोपाल और इंदौर के बाद अब जबलपुर और ग्वालियर के लिए भी मेट्रोपॉलिटन एरिया बनाने की योजना है। सरकार ने इसकी घोषणा पहले ही कर दी है। इससे प्रदेश के चार बड़े शहरों में नियोजित और समन्वित विकास की नींव रखी जाएगी। जबलपुर और ग्वालियर के लिए सर्वे और अधिसूचना की प्रक्रिया आने वाले समय में शुरू होने की उम्मीद है।
FAQ
- भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में कितने गांव और कितना क्षेत्र शामिल होगा?
भोपाल के मेट्रोपॉलिटन विकास प्लान में कुल 2,523 गांव शामिल होंगे। यह पूरा क्षेत्र 12,000 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा। इसमें भोपाल के साथ रायसेन, विदिशा, राजगढ़, सीहोर और नर्मदापुरम जिले भी आएंगे। सर्वे पूरा हो चुका है और नगरीय विकास विभाग की मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित किया जाएगा। - क्या मेट्रोपॉलिटन एरिया बनने से नगर निगम के अधिकार खत्म हो जाएंगे?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेट्रोपॉलिटन एरिया बनने के बाद भी नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के अधिकार पूरी तरह बने रहेंगे। टैक्स वसूली, बिल्डिंग परमिशन और नियोजित क्षेत्रों के काम स्थानीय निकाय ही देखते रहेंगे। मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी केवल गैर-नियोजित क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए काम करेगी। - भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान पर रोक क्यों लगी है?
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में बताया कि भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान करीब डेढ़ साल पहले तैयार हो चुके थे, लेकिन इन्हें मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लान के साथ समन्वय के लिए रोका गया है। एक बार मेट्रोपॉलिटन एरिया का प्लान तय हो जाने के बाद मास्टर प्लान को या तो संशोधित किया जाएगा या नए सिरे से बनाया जाएगा।
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