भोपाल में प्रदूषण घटाने के नाम पर, कचरे में फूंके गए करोड़ों, निगम पर उठे सवाल
News in Short
- केंद्र सरकार ने भोपाल में प्रदूषण कम करने के लिए फंड जारी किया था।
- नगर निगम ने फंड का उपयोग सफाई कार्यों पर किया, प्रदूषण कम करने के लिए नहीं।
- सिटीजंस फोरम ने इसे खारिज किया, आरोप लगाया फंड का दुरुपयोग हुआ है।
- नगर निगम ने सफाई को अपना मुख्य काम बताया, प्रदूषण नियंत्रण में सीमित भूमिका मानी।
- मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में चल रहा है, अदालत से कार्रवाई की उम्मीद।
News in Detail
भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, की हवा में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपए दिए थे। यह फंड नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत भोपाल नगर निगम को मिला था। इसका उद्देश्य शहर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना था। नगर निगम ने इस फंड का इस्तेमाल उन कार्यों पर किया, जो प्रदूषण कम करने में सहायक नहीं थे। अब भोपाल सिटीजंस फोरम और नगर निगम के बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में विवाद शुरू हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
भोपाल शहर 'नॉन-अटेनमेंट' शहरों में शामिल है। इन शहरों की हवा की गुणवत्ता पिछले पांच वर्षों से राष्ट्रीय मानकों से कम रही है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने NCAP के तहत फंड मंजूर किया था। लेकिन जब NGT ने इस फंड के खर्च का हिसाब मांगा, तो नगर निगम की रिपोर्ट देखकर हैरानी हुई।
नगर निगम की दलील
नगर निगम का कहना है कि फंड का उपयोग कचरा कलेक्शन स्टेशन बनाने, पुराने कचरे का निपटारा करने और कचरे के बैग खरीदने में किया गया। निगम का तर्क है कि ये कार्य अप्रत्यक्ष रूप से प्रदूषण को नियंत्रित करेंगे। निगम का मानना है कि यह कदम प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में है, हालांकि इसका सीधा संबंध प्रदूषण कम करने से नहीं है।
सिटीजंस फोरम का विरोध
भोपाल सिटीजंस फोरम के वकील, हरप्रीत सिंह गुप्ता ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज किया। उन्होंने कहा, गार्डन की मरम्मत करना या कचरा बैग खरीदना NCAP के उद्देश्यों के खिलाफ है। यह फंड प्रदूषण को कम करने के लिए था, न कि नगर निगम के सामान्य सफाई कार्यों के लिए। उनका कहना था कि इस फंड का दुरुपयोग हुआ है। इसे ऐसे कार्यों में खर्च किया गया, जो प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित नहीं थे।
नगर निगम का रुख
नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उनका मुख्य काम सफाई और कचरा प्रबंधन है, न कि प्रदूषण को कम करना। निगम का कहना है कि प्रदूषण कम करना एक मल्टी-सेक्टर काम है और वे अपनी जिम्मेदारी तक सीमित हैं।
अब इस मामले की पूरी नजरें NGT पर हैं। क्या अदालत इस दुरुपयोग पर कार्यवाही करेगी और भोपाल नगर निगम पर कार्रवाई करेगी?
प्रदूषण नियंत्रण के लिए फंड का सही उपयोग कैसे?
यह सवाल अब शहरवासियों और सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए फंड का सही उपयोग करना जरूरी है, ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सके। इसके लिए निगम को ऐसी योजनाओं पर काम करना चाहिए जो सीधे प्रदूषण में कमी लाने में सहायक हों, जैसे कि वाहनों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना, इंडस्ट्री के प्रदूषण पर कड़ी नीतियाँ लागू करना, और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना।
भले ही नगर निगम के पास सफाई और कचरा प्रबंधन का जिम्मा हो, प्रदूषण को कम करने में यह केवल एक हिस्सा है। प्रदूषण नियंत्रण एक बड़ा कार्य है, जिसमें विभिन्न विभागों का सहयोग और समन्वय जरूरी है। सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फंड का सही उपयोग हो।
ये भी पढ़ें...
नगर निगम भोपाल का कारनामा : सरकारी भूमि पर जारी की गई बिल्डिंग परमिशन
इंदौर नगर निगम को झटका, शिवाजी मार्केट के 120 दुकानदारों को छुट्टी के दिन हाईकोर्ट से स्टे
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी तेज, सरकार ने बनाई हाई लेवल कमेटी