श्रमोदय स्कूल में फर्जी फर्म के नाम से ठेकेदार-प्राचार्य डकार गए 1.55 करोड़, 7 पर FIR
भोपाल के सरकारी श्रमोदय आवासीय स्कूल, मुगलिया छाप में अफसरों और ठेकेदारों ने बच्चों के खाने के लिए आई सरकारी रकम में गबन किया। मेस के पैसे के नाम पर कुल एक करोड़ 55 लाख रुपए हड़प लिए गए।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मामला पकड़ा। साथ ही इस खेल के मास्टरमाइंड समेत तीन पूर्व प्राचार्य और एक लेखापाल समेत सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
द सूत्र ने उठाया था मामला
द सूत्र ने मजदूरों के बच्चों को आवासीय शिक्षा देने वाले श्रमोदय विद्यालयों की मैस के घोटाले को उठाया था। इसको लेकर अक्टूबर 2025 में सिलसिलवार समाचार प्रकाशित किए गए थे।
तब श्रमोदय विद्यालयों के प्राचार्य और लेखापाल के अलावा कर्मकाम मंडल के अधिकारियों ने घोटाले को छिपाने की कोशिश की थी। इस घोटाले को उजागर करने की सबसे अहम कड़ी सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ गुप्ता बने।
इनके द्वारा ही मजदूरों के बच्चों के हक के भोजन में सेंध लगाने वालों की शिकायत ईओडब्ल्यु तक पहुंचाई गई थी। इससे संबंधित तथ्यों को भी जुटाया जिसके चलते अब घोटाले में शामिल सात लोगों पर ईओडब्ल्यु ने शिकंजा कस दिया है।
मैस चला रही कंपनी की जगह श्रमोदय विद्यालय ने फर्जी खातों में किया पांच करोड़ का भुगतान
कैसे रची गई 1.55 करोड़ की साजिश
साल 2021 में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने चार श्रमोदय स्कूलों में मेस संचालन का टेंडर निकाला था। भोपाल-इंदौर का ठेका कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था।
कंपनी को मैस चलाने के बदले में आवासीय विद्यालयों से बैंक ऑफ बड़ौदा की गोवा शाखा के अकाउंट में किया जाता था। इसी बीच कंपनी के सुपरवाइजर गौरव शर्मा ने 2023 में श्रमोदय विद्यालयों के प्राचार्य, लेखापाल से मिलकर घोटाले की साजिश रची थी।
उसने असली कंपनी के नाम से प्राइवेट लिमिटेड हटाकर अलग फर्म कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस का अकाउंट खोल लिया था। फर्म उसके परिचित हर्ष मरजानी के नाम से थी। इसका अकाउंट AU स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंदौर में खोला गया था।
मैस के 5 करोड़ दूसरे खातों में भुगतान पर श्रमोदय विद्यालय प्राचार्यों से मांगा जवाब
हेराफेरी में शामिल हुए प्राचार्य-लेखापाल
वहीं 27 जून 2024 को गौरव शर्मा ने फर्जी लेटरहेड पर बैंक खाता बदलने का आवेदन किया था। लेखापाल लीना विश्वकर्मा ने अधिकारियों की जानकारी और स्वीकृति के बिना ही फाइल से बैंक अकाउंट बदल दिया था।
इससे मैस संचालन के नाम पर होने वाला लाखों रुपए का भुगतान टेंडर हासिल करने वाली कंपनी की जगह उसके मिलते-जुलते नाम वाली फर्म के अकाउंट में पहुंचने लगा।
प्राचार्यों ने भी लाखों रुपए का भुगतान बदले हुए बैंक अकाउंट और दूसरे नाम की फर्म को करने पर आपत्ति दर्ज नहीं की। इस वजह से असली कंपनी के लाखों रुपए फर्जी फर्म डकारती रही।
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शिकायत को भी करते रहे नजरअंदाज
अगस्त - सितम्बर 2025 में कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड ने भुगतान न होने पर श्रमोदय विद्यालय के प्राचार्यों से संपर्क किया था। वहीं प्राचार्यों ने बैंक खातों में भुगतान की जानकारी देकर पल्ला झाड़ लिया था।
इससे परेशान कंपनी द्वारा अकाउंट स्टेटमेंट के साथ दोबारा शिकायत की गई थी। इसके बाद भी विद्यालय प्रबंधन अनदेखा करता रहा। इसके बाद कंपनी की ओर से आर्थिक अपराध ब्यूरो में शिकायत की गई थी।
जांच में इस घोटाले की परतें खुलकर सामने आई। इसके बाद फर्जी कंपनी से मिलकर डेढ़ करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ।
एक ने गलती पकड़ी, दूसरे ने फिर दोहराई
EOW की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ये हुआ कि, फरवरी 2025 में ट्रांसफर पर पहुंचे प्राचार्य प्रदीप राजावत ने इस गड़बड़ी को पकड़ा था। उन्होंने लेखापाल की गलती को अपने हाथ से सुधार कर चेक पर प्राइवेट लिमिटेड कराया था।
इसी वजह से कई महीनों बाद असली कंपनी के खाते में 21 लाख 95 हजार रुपए का भुगतान हुआ था। वीरेंद्र दुबे के प्राचार्य बनते ही फिर फर्जी फर्म के खाते में भुगतान किया जाने लगा।
तीन साल पहले हुई थी घोटाले की तैयारी
जांच में एक और बात सामने आई थी। गौरव द्वारा अनाधिकृत रूप से प्राचार्यों और लेखापाल से मिलकर अक्टूबर 2023 से ही फर्जी फर्म के खाते में भुगतान की तैयारी कर ली गई थी।
जबकि खाता बदलने का पत्र 2024 में दिया गया था। यानी लेखापाल ने पत्र के बिना ही 2023 में गलत खाते में 20 लाख 95 हजार रुपए का भुगतान कर दिया था।
किन-किन पर गिरी गाज?
EOW ने कुल एक करोड़ 55 लाख 49 हजार 498 रुपए के गबन के मामले में सात लोगों पर FIR दर्ज की है। इनमें फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड और टेंडर लेने वाली कंपनी का सुपरवाईजर गौरव शर्मा भी शामिल है।
इसके अलावा फर्जी फर्म का मालिक हर्ष मरजानी सहित कई लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, दस्तावेजों में जालसाजी, और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
आरोपियों के नाम: गौरव शर्मा का सहयोगी कर्मचारी कुलदीप शुक्ला, पूर्व प्राचार्य विजय सिंह महोबिया, पूर्व प्राचार्य संतोष सिंह सिसौदिया, पूर्व प्राचार्य वीरेन्द्र दुबे, लेखापाल लीना विश्वकर्मा।
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