भोपाल में यूनियन कार्बाइड के परिसर में बनेगा मिनी फॉरेस्ट, लगेंगे 1.5 लाख पेड़
News in Short
- 41 साल पुरानी गैस त्रासदी के बाद परिसर को नया रूप दिया जाएगा।
- 67 एकड़ में 1.5 लाख पेड़ लगाकर मिनी फॉरेस्ट तैयार होगा।
- परिसर शुद्ध ऑक्सीजन, पर्यावरण सुधार और हरियाली प्रदान करेगा।
- स्मारक और ईकोटूरिज्म केंद्र से भोपाल की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ेगी।
- वैज्ञानिक निगरानी में जहरीले कचरे को हटाकर सुरक्षित परियोजना पूरी होगी।
News in Detail
यूनियन कार्बाइड परिसर में 41 साल पुरानी गैस त्रासदी के बाद नया रूप दिया जा रहा है। 67 एकड़ में 1.5 लाख पेड़ लगाए जाएंगे। मिनी फॉरेस्ट से भोपाल को नई सांस, पर्यावरण सुधार और पर्यटन के अवसर मिलेंगे। CM मोहन यादव ने इस पहल की घोषणा की है।
परिसर बनेगा मिनी फॉरेस्ट
भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर को मिनी फॉरेस्ट और स्मारक में विकसित किया जाएगा। 67 एकड़ में डेढ़ लाख पौधे लगाए जाएंगे। यह परिसर उपवन और पर्यावरण सुधार के लिए समर्पित होगा। परिसर का विकास शहर को नई पहचान और हरियाली देगा।
पर्यावरण सुधार के लिए ऑक्सीजन जोन
परिसर में 1.5 लाख पेड़ों से शहर में शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी। यह सांस की बीमारियों को कम करेगा। विशिष्ट पौधे मिट्टी और भूजल से जहरीले तत्वों को सोखेंगे। 67 एकड़ की हरियाली शहर के बढ़ते तापमान को भी कम करेगी। शेष कचरे का वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा।
यूनियन कार्बाइड परिसर अब शांति और नई उम्मीद का प्रतीक बनेगा। यह स्थान गैस त्रासदी के ट्रॉमा को भुलाने में मदद करेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईकोटूरिज्म और शोध केंद्र के रूप में परिसर विकसित होगा। शहर की पहचान 'त्रासदी के शहर' से बदलकर 'पीस मेमोरियल' की होगी।
शेष कचरे की जांच की जाएगी
भोपाल की सबसे जहरीली भूमि पर यह परियोजना पर्यावरणविदों के मार्गदर्शन में हो रही है। 336 मीट्रिक टन जहर हटाने के बाद शेष कचरे की जांच की जाएगी। यह शहर में प्रदूषण का मुख्य स्रोत कम करने में मदद करेगा।
हिरोशिमा जैसी पहचान देने की तैयारी
सामाजिक संगठनों का कहना है कि यूनियन कार्बाइड परिसर को पीस मेमोरियल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इससे भोपाल की पहचान त्रासदी के शहर से बदलकर शांति और पर्यावरण के प्रतीक शहर के रूप में होगी।
पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार यूनियन कार्बाइड परिसर का भूजल प्रभावित है। लगाए जाने वाले पौधे जमीन के जहरीलेपन को कम कर सकते हैं। भोपाल ग्रुप ऑफ इंफॉर्मेशन एंड एक्शन के अनुसार परिसर और आसपास के क्षेत्र का वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी है। शेष जहरीले मलबे और भूजल की पूरी जांच के बाद ही स्थायी समाधान संभव होगा।
क्या था भोपाल गैस त्रासदी
41 साल पहले 2 और 3 दिसंबर 1984 को भोपाल गैस कांड हुआ। इसमें 20 हजार लोगों की मौत और 6 लाख प्रभावित हुए। इसके बाद परिसर में जहरीला कचरा पड़ा रहा। अब वैज्ञानिक तरीकों से इसे साफ करके स्मारक और मिनी फॉरेस्ट बनाया जा रहा है।
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