वर्ग 2-3 के वेटिंग शिक्षकों का आंदोलन: राहुल गांधी को भेजा न्योता, क्या आएंगे भोपाल
समझें क्या है पूरा मामला
- वेटिंग शिक्षक एक महीने से भोपाल में आंदोलन कर रहे हैं।
- अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग कर रहे हैं।
- राहुल गांधी को आंदोलन में आने का ज्ञापन भेजा गया।
- राहुल गांधी की भोपाल यात्रा अभी तय नहीं हुई।
- पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी।
पिछले 1 महीने से ज्यादा समय से भोपाल में एक आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन में कभी कोई भूख हड़ताल पर बैठा, तो कभी कोई। लेकिन इस आंदोलन की चर्चा उस वक्त तेज हुई, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इनके आंदोलन में आने की बात कही।
दरअसल भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय के बाहर, MP शिक्षक भर्ती वर्ग 2 और 3 के वेटिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। ये वेटिंग शिक्षक लगातार पदवृद्धि की मांग कर रहे हैं। लेकिन डीपीआई आयुक्त ने नियमों का हवाला देकर इनकी मांग ठुकरा दी। पर क्या वाकई राहुल गांधी इनका साथ देने भोपाल आएंगे ?
कब तक आ सकते हैं राहुल ?
डीपीआई के बाहर भूख हड़ताल कर रहे वेटिंग शिक्षक नरेंद्र राजपूत से द सूत्र ने बात की। राजपूत का कहना है कि राहुल गांधी को आंदोलन में आने का औपचारिक ज्ञापन भेज दिया गया है। उनकी टीम ने कहा कि वो 1-2 दिन में राहुल गांधी से इस पर चर्चा करेंगे। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
जो ज्ञापन राहुल गांधी को भेजा गया है। उसमें लिखा है कि 21 अगस्त 2026 से वर्ग 2 और 3 के अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसे 31 दिन पूरे हो चुके हैं। इसके बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस एवं संतोषजनक समाधान हासिल नहीं हुआ। अभ्यर्थियों ने अपने ज्ञापन में राहुल गांधी से मांग की है कि वो भोपाल आकर अभ्यर्थियों से मुलाकात करें, उनकी समस्याओं को सुनें और उनका सहयोग करें।
छात्रों की गूंज में राहुल ने किया वादा
19 सितंबर को इंदौर में हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने वर्ग 2 और 3 के मुद्दे पर बात की। राहुल ने महिला अभ्यर्थी से कहा था कि वो उनके आंदोलन में आएंगे। राहुल ने कहा कि आप मुझे अपने आंदोलन में बुलाओ। इसके बाद ये बहस तेज हो गई कि क्या वाकई राहुल गांधी भोपाल आएंगे।
जीतू पटवारी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह चुके हैं कि अब प्रदेश के हर जिले में छात्रों की गूंज कार्यक्रम होगा। इस बात से इन वेटिंग अभ्यर्थियों को और उम्मीद बंध गई है कि शायद राहुल गांधी के आने से सरकार उनकी बात सुनें।
शिक्षा मंत्री ने धोखा दिया
भूख हड़ताल पर बैठे नरेंद्र राजपूत ने द सूत्र को बताया कि शिक्षा मंत्री ने उनके साथ धोखा किया। राजपूत की मानें तो शिक्षा मंत्री ने ईश्वर की कसम खाई, और कहा कि वो पदवृद्धि चाहते हैं। लेकिन इसके बाद डीपीआई कमिश्नर को फोन लगाकर मामले से पल्ला झाड़ लिया।
एक दूसरे अभ्यर्थी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार भर्ती में पदों की संख्या ज्यादा दिखाने के लिए बैकलॉग के पदों को शामिल करती है। लेकिन बैकलॉग के पदों पर भी भर्ती नहीं होती। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस आंदोलन में एसटी वर्ग के छात्र भी शामिल हैं। अगर बैकलॉग के पद भरे जाते तो उन्हें नौकरी जरूर मिलती।
सरकार पर भेदभाव का आरोप
अभ्यर्थियों का आरोप है कि शिक्षा मंत्री और आयुक्त, रिजल्ट के बाद पदवृद्धि न करने का नियम बता रहे हैं। जबकि पहले वो ऐसा कर चुके हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि डीपीआई ने एक आदेश जारी किया था। इसमें 762 पदों पर नोटिफिकेशन निकाले बिना सीधी भर्ती की गई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि स्पेशल डीएलएड और बीएलएड वालों की जॉइनिंग हुई थी, तो इनकी क्यों नहीं हो सकती ?
पुलिस के नोटिस पर भी गुस्सा
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने पुलिस के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। दरअसल पुलिस ने एक नोटिस चिपकाया है। जिसमें आरोप है कि अभ्यर्थियों ने डीपीआई का गेट नंबर 2 बंद कर दिया है।
पुलिस का कहना है कि ये लोग यहां अनाधिकृत रूप से बैठे हैं, जिसकी वजह से स्टाफ और लोगों को आने जाने में परेशानी हो रही है। पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी है। लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि हम नौकरी और अपना हक मांगने कहां जाएं ? क्या हम हमारे धान के खेत में बैठें ? ऐसा करने से क्या हमारी समस्या दूर होगी ?
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